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मां ने लोगों के बर्तन धो-धो कर पाला, बेटे ने दिया वो तोहफा कि आंखें छलकीं

Sun, 01 Jan 2017 09:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 01 Jan 2017 09:44 AM IST
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success story of maid son, wins chandigarh nagar nigam election and become counselor
काम वाली के बेटे ने जीता चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव
मां ने 27 साल तक कोठियों में बर्तन धोए, सफाई की और बच्चों को पाला। अब बेटे ने उसे वो तोहफा दिया कि उसकी आंखें खुशी से छलक पड़ीं। बात हो रही है चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव जीतने वाले भरत कुमार की। भाजपा की टिकट पर कामवाली के बेटे भरत ने जीत हासिल की।
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वार्ड नंबर-23 से भरत ने अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस की पूर्व मेयर कमलेश को छह हजार 9 सौ 74 वोटों से हरा दिया। भरत की जीत में उनकी मां शकुंतला का भी अहम रोल है। वह सेक्टरों की कोठियों में जाकर साफ-सफाई और बर्तन मांजने का काम करतीं थीं।
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उन्होंने बहुत ही मुश्किल हालात में भरत को पढ़ाया लिखाया और इस मुकाम तक पहुंचाया। उन्होंने बताया कि 40 साल पहले वह मुजफ्फरनगर (यूपी) के एक गांव से काम की तलाश में यहां आई थीं। शकुंतला ने बताया कि उन्होंने 27 साल तक कोठियों में काम किया। चुनाव में नोटबंदी के बीच भाजपा ने 26 में से 21 सीटों पर जीत हासिल की। 
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मेरे बेटे से कोई निराश होकर न जाए

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काम वाली के बेटे ने जीता चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव
मंगलवार सुबह से ही शकुंतला रामदरबार में अपने घर में बेटे के चुनाव परिणाम का इंतजार कर रहीं थीं। सुबह साढ़े दस बजे वह समय आया जिसका शकुंतला को बेसब्री से इंतजार था। किसी ने बताया भरत जीत गया है।

इतना सुनते ही उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इसके बाद उनके घर बधाई देने वालों का तांता लग गया। शकुंतला बताती है कि भरत को बड़े ही कष्टों में पाला है। चुनाव के दौरान मेरे बेटे के पास फोन भी नहीं था।

वह मेरा छोटा सा एक हजार रुपये का फोन लेकर चुनाव प्रचार में जाया करता था। उन्होंने कहा कि भगवान से दुआ है कि मेरे बेटे के पास कोई व्यक्ति निराश हो न जाए। शकुंतला भारतीय जनता पार्टी और लोगों के  सहयोग के लिए धन्यवाद दिया है।

काम की तलाश में 40 साल पहले आई थीं चंडीगढ़

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चंडीगढ़ नगर निगम चुनावों में खिला कमल
शकुंतला बतातीं है कि गरीबी से परेशान होकर वह यूपी के मुजफ्फरनगर जिले के गांव राजपुर तिलोरा से 40 वर्ष पहले चंडीगढ़ आईं थीं। उस समय भरत तीन वर्ष का था। अपने रिश्तेदार के साथ चंडीगढ़ आए थे। वहां पर जीवनयापन के लिए कुछ भी नहीं था।

शकुंतला ने कहा कि कोठी वालों ने मेरी बड़ी मदद की। बेटे को पढ़ाने के लिए हौसला देते रहे। गरीबी के बीच भरत ने जैसे-तैसे बीए तक की पढ़ाई की। वह बताती हैं कि उनके घर में आज भी 15 वर्ष पुराना टीवी है, जो किसी कोठी वाले ने दिया था।

 
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