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अस्पताल की रिशेप्सनिस्ट बोली- नहीं लेंगे ये नोट, जाओ मोदी से करवाओ इलाज
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
Updated Fri, 11 Nov 2016 09:23 AM IST
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- फोटो : Demo Pic
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सेक्टर-69 स्थित एक नामी अस्पताल में वीरवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई। जब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के वकील अपनी मां का इलाज करवाने पहुंचे। लेकिन पांच सौ रुपये का नोट होने के कारण उन्हें बिना इलाज के वापस भेज दिया। वकील ने इस मामले में उचित कार्रवाई की मांग की है।
इस बारे में जानकारी देते हुए एडवोकेट हितेन नेहरा ने बताया कि वीरवार सुबह अपनी बुजुर्ग मां (78) को घुटनों में सूजन होने पर सेक्टर-69 के नामी अस्पताल में लेकर गए थे। उन्होंने फोन कर इसके लिए डॉक्टर से एप्वाइंटमेंट ली थी, लेकिन जब वह सेक्टर-15 चंडीगढ़ से अस्पताल में पहुंचे तो रिशेप्सन पर बैठी महिला ने उनसे पांच सौ रुपये कंसल्टेशन फीस मांगी। उन्होंने जब पांच सौ रुपये का नोट दिया तो महिला ने नोट लेने से मना कर दिया।
साथ ही सौ-सौ के नोट देने के लिए कहा। इसके बाद उन्होंने मां और ड्राइवर से पैसे इकट्ठे करके पैसे दिए तो मैडम ने कहा कि एक नोट पुराना है। लेकिन उनके पास और नोट नहीं थे। जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदेश के बारे में महिला को बताया तो उसका जवाब था कि जाओ हुंण तुसी मोदी तो ही इलाज करवा लो। इतना कहकर उन्हें जलील किया गया। इसके बाद उन्हें अस्पताल से निकाल दिया। एडवोकेट हितेन ने कहा कि ऐसे प्राइवेट अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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इस बारे में जानकारी देते हुए एडवोकेट हितेन नेहरा ने बताया कि वीरवार सुबह अपनी बुजुर्ग मां (78) को घुटनों में सूजन होने पर सेक्टर-69 के नामी अस्पताल में लेकर गए थे। उन्होंने फोन कर इसके लिए डॉक्टर से एप्वाइंटमेंट ली थी, लेकिन जब वह सेक्टर-15 चंडीगढ़ से अस्पताल में पहुंचे तो रिशेप्सन पर बैठी महिला ने उनसे पांच सौ रुपये कंसल्टेशन फीस मांगी। उन्होंने जब पांच सौ रुपये का नोट दिया तो महिला ने नोट लेने से मना कर दिया।
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साथ ही सौ-सौ के नोट देने के लिए कहा। इसके बाद उन्होंने मां और ड्राइवर से पैसे इकट्ठे करके पैसे दिए तो मैडम ने कहा कि एक नोट पुराना है। लेकिन उनके पास और नोट नहीं थे। जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदेश के बारे में महिला को बताया तो उसका जवाब था कि जाओ हुंण तुसी मोदी तो ही इलाज करवा लो। इतना कहकर उन्हें जलील किया गया। इसके बाद उन्हें अस्पताल से निकाल दिया। एडवोकेट हितेन ने कहा कि ऐसे प्राइवेट अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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