{"_id":"5c541102bdec22118137331b","slug":"prabh-aasra-owner-shamsher-singh-and-his-wife-serving-help-to-people-success-story","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बेमिसालः बेसहारों का सहारा हैं प्रभ आसरा वाले वीरजी, मानवता की सेवा ही पति-पत्नी का मिशन","category":{"title":"Bashindey","title_hn":"बाशिंदे ","slug":"bashindey"}}
बेमिसालः बेसहारों का सहारा हैं प्रभ आसरा वाले वीरजी, मानवता की सेवा ही पति-पत्नी का मिशन
Fri, 01 Feb 2019 02:59 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 01 Feb 2019 02:59 PM IST
विज्ञापन
कपल की सक्सेस स्टोरी
सरदार शमशेर सिंह, जिन्हें लोग वीरजी के नाम से जानते हैं। जो कि करीब 15 सालों से अपनी पत्नी राजिंदर कौर के साथ मिलकर जरूरतमंद लोगों की मदद में जुटे हुए हैं। पूरी उम्र एक पिता अपने परिवार को संभालने में लगा देता है, लेकिन जब बुढ़ापा आता है, यादाशत कमजोर हो जाती है और आंखों से कम दिखाई व कानों से कम सुनाई देता है तो उस समय अपनों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, लेकिन उस समय परिवार वाले ही किनारा कर लेते हैं।
ऐसे ही सड़क किनारे किसी का एक्सिडेंट हो जाता है। घायल मदद के लिए चीख रहा होता है, लेकिन लोग देखकर भी अनदेखा कर आगे बढ़ जाते हैं। इतना ही नहीं किसी के घर कोई लड़की पैदा होती तो उसे बोझ समझ बेसहारा छोड़कर चले जाते हैं। ऐसे ही जरूरमंदों लोगों के लिए मददगार बनते हैं सरदार शमशेर सिंह। उनके द्वारा चंडीगढ़ कुराली रोड पर पडियाला में प्रभ आसरा केंद्र चलाया जा रहा है। जहां पर ऐसे लोगों की मदद की जाती है। संस्था द्वारा तीन सेंटर चलाए जा रहे हैं।
ऐसे आया मानवता की सेवा का ख्याल
शमशेर सिंह ने बताया कि मानवता की सेवा करने का जुनून बचपन से उनके अंदर था। उन्होंने अपने एक मित्र को करीब से मरते देखा था, जिससे वह काफी आहत हुए थे। इसके बाद से वह मानवता की सेवा के लिए आगे आए थे। उन्होंने बताया कि इस काम में गुरबाणी ने भी अहम भूमिका निभाई है। पूरा संसार उनके लिए एक परिवार है। उनकी कोशिश यह है कि जरूरतमंद की सहायता करना है।
विज्ञापन
किराए के कमरों से शुरू हुआ संस्थान
उन्होंने बताया कि यहां तक का सफर भी काफी चुनौतियों भरा रहा है, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने बताया कि वह खुद और उनकी पत्नी पेशे से केमिस्ट है। जब वह लोगों को इस तरह घायल व बेसहारा देखते तो उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाते थे, लेकिन उनकी उचित देखभाल हो पाए। इस काम में मुश्किल आती थी। ऐसे में उन्होंने शुरू में दो कमरे लेकर सेंटर शुरू किया था। इसके बाद यह सफर आगे बढ़ता ही चला गया।
विज्ञापन
ऐसे ही सड़क किनारे किसी का एक्सिडेंट हो जाता है। घायल मदद के लिए चीख रहा होता है, लेकिन लोग देखकर भी अनदेखा कर आगे बढ़ जाते हैं। इतना ही नहीं किसी के घर कोई लड़की पैदा होती तो उसे बोझ समझ बेसहारा छोड़कर चले जाते हैं। ऐसे ही जरूरमंदों लोगों के लिए मददगार बनते हैं सरदार शमशेर सिंह। उनके द्वारा चंडीगढ़ कुराली रोड पर पडियाला में प्रभ आसरा केंद्र चलाया जा रहा है। जहां पर ऐसे लोगों की मदद की जाती है। संस्था द्वारा तीन सेंटर चलाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
ऐसे आया मानवता की सेवा का ख्याल
शमशेर सिंह ने बताया कि मानवता की सेवा करने का जुनून बचपन से उनके अंदर था। उन्होंने अपने एक मित्र को करीब से मरते देखा था, जिससे वह काफी आहत हुए थे। इसके बाद से वह मानवता की सेवा के लिए आगे आए थे। उन्होंने बताया कि इस काम में गुरबाणी ने भी अहम भूमिका निभाई है। पूरा संसार उनके लिए एक परिवार है। उनकी कोशिश यह है कि जरूरतमंद की सहायता करना है।
विज्ञापन
किराए के कमरों से शुरू हुआ संस्थान
उन्होंने बताया कि यहां तक का सफर भी काफी चुनौतियों भरा रहा है, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने बताया कि वह खुद और उनकी पत्नी पेशे से केमिस्ट है। जब वह लोगों को इस तरह घायल व बेसहारा देखते तो उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाते थे, लेकिन उनकी उचित देखभाल हो पाए। इस काम में मुश्किल आती थी। ऐसे में उन्होंने शुरू में दो कमरे लेकर सेंटर शुरू किया था। इसके बाद यह सफर आगे बढ़ता ही चला गया।
Trending Videos
जरूरतमंदों के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ते है
उन्होंने बताया कि मानवता के लिए उनकी सेवाएं देखकर 2011 में पंजाब स्टेट लीगल सर्विस अथारिटी ने उन्हें पैरा लीगल वालंटियर बनाया था। इससे उन्हें नागरिकों के कानूनी अधिकारों और सरकार की जिम्मेदारी का पता चला। इतना ही नहीं इसके बाद प्रभ आसरा केंद्र में लीगल एड क्लीनिक भी खोला गया। जहां पर जरूरतमंदों की सहायता की जाती है। शमशेर ने खुद एक महिला को खुद वित्तीय सहायता दिलाई। आज महिला अपने बच्चे के साथ बढ़िया जीवन जी रही है।
परिवार जैसा माहौल, मिलती हैं सारी सुविधाएं
संस्थान में कई बेसहारा और दिव्यांग लोग रहते हैं। इन लोगों में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल हैं, जिनका सारा ख्याल वीरजी की तरफ से रखा जाता है। वहां रहने वाले लोगों को पूरा फैमिली जैसा वातावरण दिया जाता है। हर त्योहार मनाया जाता है। इतना ही नहीं सभी दवाई और अन्य चीजों का का ख्याल रखा जाता है। इतना ही नहीं संस्था द्वारा आसपास के इलाके में मेडिकल कैंप लगाए जाते हैं। ग्रामीणों की सेवा की जाती है। हाईवे पर हादसों का शिकार होने वाले लोगों के लिए 24 घंटे की एंबुलेंस सुविधा रखी गई है। इसके अलावा बच्चों को पढ़ाया भी जाता है। इतना ही नहीं संस्था की एक बच्ची हॉल ही में हुई नेशनल गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर आई है।
1100 लोगों को अपने परिवारों से मिलाया
शमशेर सिंह जी ने बताया कि उनकी तरफ से मिशन मिलाप भी शुरू किया गया है, जिसके तहत उनकी संस्थान में पहुंचने वाले लोगों को उनके परिवारों से मिलाने की कोशिश की जा रही है। अब तक 1100 लोगों को उनके परिवारों से मिलाया जा चुका है। वहीं, उनकी यह मुहिम आगे भी जारी है।
परिवार जैसा माहौल, मिलती हैं सारी सुविधाएं
संस्थान में कई बेसहारा और दिव्यांग लोग रहते हैं। इन लोगों में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल हैं, जिनका सारा ख्याल वीरजी की तरफ से रखा जाता है। वहां रहने वाले लोगों को पूरा फैमिली जैसा वातावरण दिया जाता है। हर त्योहार मनाया जाता है। इतना ही नहीं सभी दवाई और अन्य चीजों का का ख्याल रखा जाता है। इतना ही नहीं संस्था द्वारा आसपास के इलाके में मेडिकल कैंप लगाए जाते हैं। ग्रामीणों की सेवा की जाती है। हाईवे पर हादसों का शिकार होने वाले लोगों के लिए 24 घंटे की एंबुलेंस सुविधा रखी गई है। इसके अलावा बच्चों को पढ़ाया भी जाता है। इतना ही नहीं संस्था की एक बच्ची हॉल ही में हुई नेशनल गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर आई है।
1100 लोगों को अपने परिवारों से मिलाया
शमशेर सिंह जी ने बताया कि उनकी तरफ से मिशन मिलाप भी शुरू किया गया है, जिसके तहत उनकी संस्थान में पहुंचने वाले लोगों को उनके परिवारों से मिलाने की कोशिश की जा रही है। अब तक 1100 लोगों को उनके परिवारों से मिलाया जा चुका है। वहीं, उनकी यह मुहिम आगे भी जारी है।