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एक आईएएस अफसर, जो मोटे इंसान को कर देते हैं पतला और कहते हैं- डॉक्टरी मेरा पहला प्यार

Mon, 20 Jan 2020 03:58 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Mon, 20 Jan 2020 03:58 PM IST
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Personality: An IAS that reduces fat to thin, Obesity
आईएएस अजय कुमार सिंगला - फोटो : अमर उजाला
एक साधारण परिवार से संबंध रखने वाले चंडीगढ़ के ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी डॉ. अजय कुमार सिंगला ने डॉक्टर की पढ़ाई करने के बाद सिविल सेवा को ज्वाइन किया। वे कहते हैं कि डाक्टरी उनका पहला प्यार है और लोकसेवा उनकी जिम्मेदारी। डॉ. सिंगला ने एमबीबीएस के बाद एमबीए भी किया है।
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इस दौरान उन्होंने मोटापे पर काफी शोध किए। कुछ शोध पत्र प्रकाशित भी हुए। वक्त मिलने पर वे डॉक्टरी परामर्श भी देते हैं। दफ्तर के कई कर्मचारी उनकी सलाह से वजन कम कर चुके हैं। सौम्य भाषा के धनी डा. सिंगला की खासियत है कि वे अपने काम को पूरी ईमानदारी और समय पर पूरा करते हैं। उनसे बातचीत के कुछ अंश...
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सवाल : आपका जन्म एक साधारण परिवार में हुआ। आईएएस तक का सफर कैसे तय किया?
जवाब :
बठिंडा (पंजाब) के एक गांव में शुरुआती पढ़ाई की। स्कूल खुले में लगता था, कोई भवन नहीं था। मेरे पिता ही उस स्कूल में एकमात्र अध्यापक थे। पांचवीं के बाद की पढ़ाई दूसरे गांव के स्कूल में की। रेतीला इलाका होने की वजह से आने-जाने में काफी समस्या होती थी। आगे की पढ़ाई के लिए शहर आ गया। उस समय 10वीं के बाद यूनिवर्सिटी हुआ करती थी तो 11वीं में यूनिवर्सिटी टॉप किया।
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मेडिकल में दाखिला लिया और एमबीबीएस की डिग्री हासिल की। एमडी में दाखिला मिल गया लेकिन समाज के लिए कुछ करने का जुनून सवार था। ऐसे में पंजाब सिविल मेडिकल सर्विस ज्वाइन किया। इसके बाद भी पढ़ाई जारी रही। 47 वर्ष की उम्र में मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रिेशन (एमबीए) की डिग्री और दिल्ली के भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) से इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) में डिप्लोमा हासिल किया।
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सवाल : सुना है अब भी आप मरीज देखते हैं?
जवाब :
डॉक्टरी मेरा प्यार है। सिविल सर्विस ज्वाइन करने के बाद भी मैं दवाइयों से दूर नहीं रह पाया। अभी भी मैं मरीज देखता हूं। अपने दफ्तर में कई लोगों को पतला कर चुका हूं लेकिन सिविल सर्विस का एक्सपोजर काफी बड़ा है, यहां बहुत कुछ सीखने को मिलता है। काम करने का क्षेत्र व्यापक है।

सवाल : चंडीगढ़ के बारें में क्या सोचते हैं? इस शहर के सामने क्या चुनौतियां हैं?
जवाब :
यह शहर बहुत खूबसूरत है। आने वाले समय पर इस शहर की सबसे बड़ी चुनौती ट्रैफिक और प्रदूषण है। अगर आने वाले कुछ सालों में इन पर लगाम नहीं लगाया गया तो चंडीगढ़ दिल्ली के जैसा बन जाएगा। प्रशासन इस बात को जानता है, इसलिए हम शहर में इलेक्ट्रिक बसें ला रहे हैं।

ज्यादा से ज्यादा लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट से यात्रा करें, इसके लिए काफी प्रयास किए जा रहे हैं। साइकिल शेयरिंग प्रोजेक्ट लाया जा रहा है। उत्तर भारत के लोग थोड़े आक्रामक होते हैं। हमें अपने व्यवहार पर काबू पाना होगा। हम सब तभी एक बेहतर समाज दे पाएंगे।

सवाल : खुद को कैसे फिट रखते हैं?
जवाब :
खुट को फिट रखना आसान है। बस कुछ आदतें डालनी पड़ती हैं। मैं सुबह सैर करता हूं। हेल्दी नाश्ता करने के बाद दफ्तर पहुंच जाता हूं। दफ्तर के समय मैं कुछ नहीं खाता। बीच-बीच में कॉफी पी लेता हूं, लेकिन वह भी दूध और चीनी के बगैर। शाम को कुछ हल्का खाने के बाद रात में कभी नहीं खाता। खाली समय में पढ़ता या फिर आराम करता हूं।

सवाल : कोई ऐसा समय जब आप निराश हुए हों?
जवाब :
इंसान में संवेदनाएं हैं, तो जाहिर सी बात है कि वह कभी न कभी निराश भी होता है, हताश और परेशान भी होता है। लेकिन यह चंद लम्हों की बात होती है। अगर कोई भी व्यक्ति कहे कि वह कभी निराश नहीं हुआ तो वह झूठ बोलता है। मैंने जब दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप की खबर सुनी थी तो बहुत दुख हुआ था। ऐसी खबरें अंदर से झकझोर कर रख देती हैं।
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