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‘दिव्यांगता को ताकत बनाएं और दिखा दें कि आप किसी से कम नहीं’

Sat, 12 Nov 2016 03:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 12 Nov 2016 03:50 PM IST
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"Make strength to your Diwyangta''
बोनफेस प्रभु - फोटो : अमर उजाला
दिव्यांगता के बावजूद इसे कमजोरी नही बल्कि उसे अपनी ताकत बनाई और पैरालंपिक पदक  विजेता बन सबको यह संदेश दे डाला कि जब मैं जब में कर सकता हूं तो आप क्यों नहीं। यह कहना है पहले पैरालंपिक पदक विजेता और पदमश्री अवार्डी हैरी बोनीफेस प्रभु का।
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वह इस दिनों दिव्यांगता के प्रति जागरूक करने के लिए कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक एक अभियान में जुटे हुए हैं। इसी सिलसिले में वह शुकव्रार को सेक्टर 31 स्थित ग्रिड के ऑफिस में पहुंचे। यहां पहुंचकर सबसे पहले उन्होंने संस्थान के बच्चों को संबोधित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आप अपनी दिव्यांगता को कमजोरी नहीं बल्कि अपनी ताकत बनाएं और दिखा दें कि आप किसी से कम नही हैं।
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डॉक्टर की लापरवाही से बने दिव्यांग
 हैरी बोनीफेस प्रभु ने बताया कि उनका जन्म एक आम बच्चे की तरह ही  हुआ  था। अगर डॅाक्टरों ने लापरवाही न बरती होती तो आज वह भी दूसरे लोगाें की तरह ही होते। बोनीफेस ने बताया कि ‘जब मैं मात्र 4 वर्ष का था तो बीमार होने के बाद डाक्टरों की लापरवाही के कारण दिव्यांग हो गया। 
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इसके बावजूद मेरे पिता ने हमेशा से ही मुझसे कहा करते थे कि तुम्हें हिम्मत हारने की जरूरत नहीं है। तुम्हारा जन्म एक खास मकसद केलिए हआ है। इसी बता को आज भी ध्यान में रखता हूं और दूसरो को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहता हूं।

हर किसी में कुछ विशेष होता है
बोनीफेस प्रभु ने बच्चों से कहा कि ‘हम सभी में कुछ न कुछ हुनर होता है । अब जरूरत है उसे बाहर निकालने की। जनून से किए हर काम के नतीजे हैरान करने वाले होते हैं।’ 

दिव्यांग बच्चों का प्लेटफार्म देना
पैरालंपिक में टेनिस में देश को मेडल जिताने वाले प्रभु ने कहा कि देश के दिव्यांग बच्चों को खोलों में अधिक से अधिक बेहतरीन प्लेटफार्म उपलब्ध करवाना चाहिए। ताकि उनका टैलेंट बाहर आ सके। इनके अनुसार वह खुद तो नहीं, बल्कि कोचों को ट्रेनिंग देना चाहते है जिससे कि वह दिव्यांग खिलाड़ियों को ट्रेंड कर सकने मे मदद कर। वहीं इनके अनुसार मेरे लिए देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से मुलाकात यादगार क्षणों में से एक है।

सभी का मिलता प्यार
बोनीफेस केअनुसार टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना और टीम इंडिया के कोच अनिल कुंबले भी उनके अच्छे दोस्तों में हैं। वह हर बार मेरा हौसला बढ़ाते है और इसी तरह अन्य खेलाें केजाने माने चेहरे भी उनके अभियान की तारीफ करते हैं।


अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों पर बयान
हैरी के अनुसार वह दिसंबर के बाद से एक बार फिर से टेनिस कोर्ट का रुख करेंगे। आस्ट्रेलिया, अमेरिका, जर्मनी में होने वाले अंतरराष्ट्रीय मैचाें में उन्हें शिरकत करनी है। 
 
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