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कर्मापुरी: 450 पौधे लगाकर बने मिसाल, शमशान घाट में भी हरियाली
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Mon, 25 Jul 2016 09:45 AM IST
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करमापुरी
- फोटो : अमर उजाला
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एक आम धारणा है कि इंसान का सबसे पवित्र मन शमशान घाट होता है। मगर ऐसी जगहों से भी किसी अभियान के गति मिल सकती है, यह कर्मापुरी गोस्वामी ने कर दिखाया।
चंद दोस्तों की टोली को जोड़कर कर्मापुरी ने सैंकड़ों पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में जो काम किया वो एक उदाहरण है। दसवीं के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी से ज्ञानी की। इसके बाद उन्होंने आईटीआई करने के बाद मेकेनिकल डिप्लोमा किया,जिसके आधार पर उन्हें पंजाब जन स्वास्थ्य विभाग में बतौर ट्यूबवेल आपरेटर के पद पर नंवबर 1985 में सरकारी नौकरी मिली।
सूबे के इस विभाग में कर्मापुरी जैसे हजारों कर्मचारी होंगे, लेकिन पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा की ललक ने कर्मापुरी को एक सख्शियत के रुप से खड़ा कर दिया। अमर उजाला ने इस सख्शियत से उनके कार्यों पर चर्चा की। उन्होंने बताया वर्ष 2002 के दौरान उसके जीवन में एक नया मोड़ आया। यह जगह कोई शिक्षण केंद्र, धर्मस्थल, सेमिनार कक्ष नहीं, बल्कि मोहाली जिला के गांव गोबिंदगढ़ का शमशान घाट था। बकौल कर्मापुरी, तब मैं किसी की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए गया था। उस दौरान भीषण गर्मी का मौसम था।
शमशान घाट में धूप से बचने के लिए कोई प्रबंध भी नहीं था। तब अंतिम संस्कार के समय शमशान में मौजूद सब दुख और पीड़ा के साथ- साथ वहां खड़े गर्मी में झुलस रहे थे। इससे पहले भी ऐसे मौसम के दौरान यहां यही हालात रहते थे। उस दिन वहां खड़े-खड़े यह ख्याल आया की क्यों यहां पौधे लगाए जाएं, ताकि आने वाले समय में घने वृक्षों की छाया और हवा मिल सके। इसी के साथ उस दिन अचानक पेड़ों का महत्व भी समझ आया। उस दिन के बाद कर्मापुरी अपने गांव में सैंकडों पौधे लगा चुकें हैं। कर्मापुरी ने गांव के शमशान घाट के अलावा गांव के सरकारी स्कूल में भी पौधे लगाए।
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चंद दोस्तों की टोली को जोड़कर कर्मापुरी ने सैंकड़ों पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में जो काम किया वो एक उदाहरण है। दसवीं के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी से ज्ञानी की। इसके बाद उन्होंने आईटीआई करने के बाद मेकेनिकल डिप्लोमा किया,जिसके आधार पर उन्हें पंजाब जन स्वास्थ्य विभाग में बतौर ट्यूबवेल आपरेटर के पद पर नंवबर 1985 में सरकारी नौकरी मिली।
सूबे के इस विभाग में कर्मापुरी जैसे हजारों कर्मचारी होंगे, लेकिन पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा की ललक ने कर्मापुरी को एक सख्शियत के रुप से खड़ा कर दिया। अमर उजाला ने इस सख्शियत से उनके कार्यों पर चर्चा की। उन्होंने बताया वर्ष 2002 के दौरान उसके जीवन में एक नया मोड़ आया। यह जगह कोई शिक्षण केंद्र, धर्मस्थल, सेमिनार कक्ष नहीं, बल्कि मोहाली जिला के गांव गोबिंदगढ़ का शमशान घाट था। बकौल कर्मापुरी, तब मैं किसी की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए गया था। उस दौरान भीषण गर्मी का मौसम था।
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शमशान घाट में धूप से बचने के लिए कोई प्रबंध भी नहीं था। तब अंतिम संस्कार के समय शमशान में मौजूद सब दुख और पीड़ा के साथ- साथ वहां खड़े गर्मी में झुलस रहे थे। इससे पहले भी ऐसे मौसम के दौरान यहां यही हालात रहते थे। उस दिन वहां खड़े-खड़े यह ख्याल आया की क्यों यहां पौधे लगाए जाएं, ताकि आने वाले समय में घने वृक्षों की छाया और हवा मिल सके। इसी के साथ उस दिन अचानक पेड़ों का महत्व भी समझ आया। उस दिन के बाद कर्मापुरी अपने गांव में सैंकडों पौधे लगा चुकें हैं। कर्मापुरी ने गांव के शमशान घाट के अलावा गांव के सरकारी स्कूल में भी पौधे लगाए।
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वर्ष 2003 से शुरु हुई पौधे लगाने की मुहिम
पौधारोपण
- फोटो : डेमो फोटो
वर्ष 2003 से शुरु हुई पौधे लगाने की मुहिम के बाद उनके लगाए 450 से अधिक पेड़ अब घने और छायादार हो चुके हैं इनमें शमशान घाट,स्कूल व अन्य जगहों के पौधे शामिल हैं। इनमें स्कूल में लगे कई पेड़ों को करीब दो लाख रुपये में नीलाम कराकर पंचायत द्वारा कटवाया जा चुका है। यह कर्मापुरी के प्रयासों का ही नतीजा था। कि उनके द्वारा लगवाए गए पेड़ों को कटवाकर जो आमदनी हुई उससे शिक्षा के मंदिर सरकारी स्कूल के विकास में खर्च किया गया।
इन दोस्तों के सहयोग से चलाई मुहिम
कर्मापुरी के मुताबिक़ डीपीईओ विभाग में कार्यरत साथी कृष्णपुरी, चंडीगढ़ सचिवालय में कार्यरत रतनपुरी व एलआईसी में कार्यरत दीपचंद जैसे साथियों का सहयोग मिलने के कारण वह पर्यावरण के अलावा गांव में साक्षरता, मेडिकल कैंप, रक्तदान कैंप व नशा मुक्ति कैंप गांव में लगवा चुका है।
अगस्त में वाटर सप्लाई कांप्लेक्स में लगाएंगे सौ पौधे
कर्मापुरी के मुताबिक वह अगस्त महीने में मोहाली के फेज एक स्थित वाटर सप्लाई कांप्लेक्स के अलावा गांव और अन्य कई स्कूलों में पौधे लगाएंगे। इनमें 100 पौधे अकेले वाटर सप्लाई कांप्लेक्स में लगाने की तैयारी कर ली गई है। उन्होंने बताया कि उनका मिशन सिर्फ पौधे लगाकर उन्हें भगवान भरोसे छोड़ने का नहीं है, बल्कि पौधे लगाने के बाद उनका बच्चों की तरह पालन-पोषण करने की पूरी तैयारी है।
इन दोस्तों के सहयोग से चलाई मुहिम
कर्मापुरी के मुताबिक़ डीपीईओ विभाग में कार्यरत साथी कृष्णपुरी, चंडीगढ़ सचिवालय में कार्यरत रतनपुरी व एलआईसी में कार्यरत दीपचंद जैसे साथियों का सहयोग मिलने के कारण वह पर्यावरण के अलावा गांव में साक्षरता, मेडिकल कैंप, रक्तदान कैंप व नशा मुक्ति कैंप गांव में लगवा चुका है।
अगस्त में वाटर सप्लाई कांप्लेक्स में लगाएंगे सौ पौधे
कर्मापुरी के मुताबिक वह अगस्त महीने में मोहाली के फेज एक स्थित वाटर सप्लाई कांप्लेक्स के अलावा गांव और अन्य कई स्कूलों में पौधे लगाएंगे। इनमें 100 पौधे अकेले वाटर सप्लाई कांप्लेक्स में लगाने की तैयारी कर ली गई है। उन्होंने बताया कि उनका मिशन सिर्फ पौधे लगाकर उन्हें भगवान भरोसे छोड़ने का नहीं है, बल्कि पौधे लगाने के बाद उनका बच्चों की तरह पालन-पोषण करने की पूरी तैयारी है।