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कंवलजीत सिंह: रोबोटिक इंजीनियर ने मजदूरों पर न्यौछावर कर दी पूरी जिंदगी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Mon, 02 May 2016 01:05 PM IST
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रोबोटिक इंजीनियर कंवलजीत सिंह
- फोटो : amarujala
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मजदूरों के लिए आज कौन आवाज उठाता है, लेकिन चंडीगढ़ के एक रोबोटिक इंजीनियर कंवलजीत सिंह ने अपनी पूरी जिंदगी मजदूरों के हक की लड़ाई के लिए न्यौछावर कर दी। कंवलजीत ने उस समय रोबोटिक इंजीनियरिंग में महारत हासिल कर ली थी, जब देश में गिनती के इंजीनियर होते थे। वे चाहते तो आराम से अपनी जिंदगी बिता सकते थे, लेकिन उन्होंने मजदूरों के साथ खड़ा होने का फैसला लिया। उनके पिता टीचर थे तो उनकी मां आर्किटेक्चर। डेराबस्सी में उनका घर है, लेकिन घर पर जाने के बजाए कभी हॉस्टल या फिर साथियों के कमरे पर ही ठहरते हैं।
उन्होंने सीएसआईओ चंडीगढ़ से एडवांस्ड डिप्लोमा इन मेक्ट्रानिक्स एंड इंडस्ट्रियल की पढ़ाई पूरी की। उसके बाद वे जनरल इलेक्ट्रिक्ल कंपनी के साथ जुड़ गए। वे थिएटर से भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने गुरशरण सिंह की टीम के साथ भी काम किया है। जब वे थिएटर करते थे, तभी हल्लोमाजरा के पास बने दीप कांप्लेक्स को प्रशासन ने गिराने का फैसला लिया।
वे वहां पर थिएटर करने पहुंचे तो लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोगों को लगा कि थिएटर आर्टिस्ट ही उनकी आवाज उठा सकते हैं। लोगों ने उनसे गुहार लगाई और वे मान गए। उसके बाद वे वहां पर धरने पर बैठ गए। काफी दिन तक धरना प्रदर्शन चला और दीप कांप्लेक्स गिरने से बच गया।
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उन्होंने बताया कि 2006 को जनरल इलेक्ट्रिकल कंपनी से जॉब छोड़ दी और वर्किंग क्लास के आंदोलन से जुड़ गए। तब से वे मजदूरों की आवाज बने हुए हैं। वे सीपीआई (एमएल) से भी जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि वे भले ही सीपीआई से जुड़े हों, लेकिन जब भी उनके पास कोई वर्कर आता है, वे उनके साथ चल पड़ते हैं। वे प्रशासन की कंस्ट्रक्शन वर्कर वेलफेयर बोर्ड की एडवाइजरी कमेटी के सदस्य भी हैं। धनास की कच्ची बस्ती को कुछ दिन पहले प्रशासन ने गिराने का आदेश दिया था। इससे सैकड़ों लोगों के सिर से छत छिनने जा रही थी, लेकिन कंवलजीत सिंह ने मोर्चा संभाला।
सुप्रीमकोर्ट तक मामले को लेकर गए और उस पर स्टे लेकर आए। सरकार की ओर से जो भी योजनाएं आती है, उन योजनाओं को मजदूरों तक पहुंचाने के लिए वे लगातार काम करते रहते हैं। मजदूरों को ग्रांट का रुपया दिलाना, क्लेम दिलवाना, शोषण के शिकार मजदूरों के पक्ष में खड़ा होने जैसे कई मुद्दों पर वे मजदूरों की ओर से नेतृत्व करते हैं।
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उन्होंने सीएसआईओ चंडीगढ़ से एडवांस्ड डिप्लोमा इन मेक्ट्रानिक्स एंड इंडस्ट्रियल की पढ़ाई पूरी की। उसके बाद वे जनरल इलेक्ट्रिक्ल कंपनी के साथ जुड़ गए। वे थिएटर से भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने गुरशरण सिंह की टीम के साथ भी काम किया है। जब वे थिएटर करते थे, तभी हल्लोमाजरा के पास बने दीप कांप्लेक्स को प्रशासन ने गिराने का फैसला लिया।
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वे वहां पर थिएटर करने पहुंचे तो लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोगों को लगा कि थिएटर आर्टिस्ट ही उनकी आवाज उठा सकते हैं। लोगों ने उनसे गुहार लगाई और वे मान गए। उसके बाद वे वहां पर धरने पर बैठ गए। काफी दिन तक धरना प्रदर्शन चला और दीप कांप्लेक्स गिरने से बच गया।
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उन्होंने बताया कि 2006 को जनरल इलेक्ट्रिकल कंपनी से जॉब छोड़ दी और वर्किंग क्लास के आंदोलन से जुड़ गए। तब से वे मजदूरों की आवाज बने हुए हैं। वे सीपीआई (एमएल) से भी जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि वे भले ही सीपीआई से जुड़े हों, लेकिन जब भी उनके पास कोई वर्कर आता है, वे उनके साथ चल पड़ते हैं। वे प्रशासन की कंस्ट्रक्शन वर्कर वेलफेयर बोर्ड की एडवाइजरी कमेटी के सदस्य भी हैं। धनास की कच्ची बस्ती को कुछ दिन पहले प्रशासन ने गिराने का आदेश दिया था। इससे सैकड़ों लोगों के सिर से छत छिनने जा रही थी, लेकिन कंवलजीत सिंह ने मोर्चा संभाला।
सुप्रीमकोर्ट तक मामले को लेकर गए और उस पर स्टे लेकर आए। सरकार की ओर से जो भी योजनाएं आती है, उन योजनाओं को मजदूरों तक पहुंचाने के लिए वे लगातार काम करते रहते हैं। मजदूरों को ग्रांट का रुपया दिलाना, क्लेम दिलवाना, शोषण के शिकार मजदूरों के पक्ष में खड़ा होने जैसे कई मुद्दों पर वे मजदूरों की ओर से नेतृत्व करते हैं।