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बेमिसालः डिप्टी डायरेक्टर अमिताभ ने किया पीजीआई के 'मर्ज' का इलाज, क्राइसिस मैनेजमेंट में माहिर
Mon, 19 Aug 2019 11:37 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Mon, 19 Aug 2019 11:37 AM IST
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डिप्टी डायरेक्टर अमिताभ अवस्थी
- फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल कैडर के आईएएस ऑफिसर अमिताभ अवस्थी ने जब पीजीआई के डिप्टी डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन (डीडीए) का पद संभाला तो उस वक्त पीजीआई कई मुश्किलों से घिरा हुआ था। कई विवाद मीडिया में छाए थे। न तो कोई भर्ती हो रही थी और न ही पीजीआई के पास मरीजों के बढ़ते बोझ को संभालने के लिए कोई ठोस प्लानिंग थी।
अमिताभ ने नियुक्ति के बाद पीजीआई को एम्स के बराबर खड़ा करने का खाका खींच दिया। अगले पांच सालों में पीजीआई के पास इतना कुछ होगा, जो शायद दिल्ली के एम्स में भी न हो। क्राइसिस मैनेजमेंट में माहिर अमिताभ अवस्थी के बारे में कहा जाता है कि वे यारों के यार हैं। जब कड़ा फैसला लेने की बारी आती है तो वे पीछे भी नहीं हटते। आज शख्सियत में पीजीआई के डीडीए अमिताभ अवस्थी से बातचीत।
सवाल : अब तक का पीजीआई का सफर कैसा रहा?
जवाब : बहुत अच्छा। जब मैं आया तो सबसे पहले उन क्षेत्रों का आकलन किया, जहां काम करने की गुंजाइश थी। पता चला कि चार साल से कोई भर्ती ही नहीं हुई थी। 554 फैकल्टी की पोस्ट थी, उनमें सिर्फ 286 पद भरे थे। बडे़ प्रोजेक्ट के नाम पर पीजीआई के पास कुछ नहीं था। 250 बेड का हास्पिटल सफेद हाथी बनकर खड़ा था। इन चुनौतियों से निपटना आसान नहीं था। सबसे पहले भर्तियां शुरू की। आज कुल 635 फैकल्टी की भर्ती हो चुकी है।
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टेक्निशियन, ओटी टेक्निशियन, पैरामेडिकल व नर्सिंग स्टाफ की भर्ती हुई। 250 बेड के हास्पिटल को शुरू कराया। एडवांस न्यूरोसाइंस सेंटर, एडवांस मदर एंड चाइल्ड सेंटर, पीजीआई मास्टर प्लान, पीजीआई के एक्सपेंशन के लिए सारंगपुर में जगह, जीरिएटिक सेंटर भी अब पास हो चुके हैं।
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अमिताभ ने नियुक्ति के बाद पीजीआई को एम्स के बराबर खड़ा करने का खाका खींच दिया। अगले पांच सालों में पीजीआई के पास इतना कुछ होगा, जो शायद दिल्ली के एम्स में भी न हो। क्राइसिस मैनेजमेंट में माहिर अमिताभ अवस्थी के बारे में कहा जाता है कि वे यारों के यार हैं। जब कड़ा फैसला लेने की बारी आती है तो वे पीछे भी नहीं हटते। आज शख्सियत में पीजीआई के डीडीए अमिताभ अवस्थी से बातचीत।
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सवाल : अब तक का पीजीआई का सफर कैसा रहा?
जवाब : बहुत अच्छा। जब मैं आया तो सबसे पहले उन क्षेत्रों का आकलन किया, जहां काम करने की गुंजाइश थी। पता चला कि चार साल से कोई भर्ती ही नहीं हुई थी। 554 फैकल्टी की पोस्ट थी, उनमें सिर्फ 286 पद भरे थे। बडे़ प्रोजेक्ट के नाम पर पीजीआई के पास कुछ नहीं था। 250 बेड का हास्पिटल सफेद हाथी बनकर खड़ा था। इन चुनौतियों से निपटना आसान नहीं था। सबसे पहले भर्तियां शुरू की। आज कुल 635 फैकल्टी की भर्ती हो चुकी है।
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टेक्निशियन, ओटी टेक्निशियन, पैरामेडिकल व नर्सिंग स्टाफ की भर्ती हुई। 250 बेड के हास्पिटल को शुरू कराया। एडवांस न्यूरोसाइंस सेंटर, एडवांस मदर एंड चाइल्ड सेंटर, पीजीआई मास्टर प्लान, पीजीआई के एक्सपेंशन के लिए सारंगपुर में जगह, जीरिएटिक सेंटर भी अब पास हो चुके हैं।
सवाल : यह सब कैसे संभव हो सका
जवाब : एक कहावत है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता। यह पूरा टीम वर्क है। इन सभी कामों में पीजीआई डायरेक्टर, फैकल्टी, इंजीनियर, स्टाफ और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का भरपूर सहयोग रहा है। इनके बिना यह सब काम संभव नहीं होते।
सवाल : चंडीगढ़ के बारे में क्या राय रखते हैं?
जवाब : इस शहर की सबसे बड़ी खासियत यही है कि छोटे से क्षेत्र में खुला शहर। यह शहर पूरी तरह से प्लांड तरीके से बसा हुआ है। हर सेक्टर में मार्केट में है। मार्केट की पार्किंग है। चारों तरफ हरियाली है। चौड़ी सड़के हैं। खूबसूरत पार्क हैं। इन खूबियों से शहर का जो इन्वायरमेंट बनता है, उससे मन को एक पॉजिटिव फीलिंग आती है।
सवाल : किसी बात को लेकर कभी मन दुखी होता हो?
जवाब : आजकल लोगों में संवेदनशीलता व भावकुता कम होती जा रही है। इसे देखकर पीड़ा होती है। हमारी कोशिश होनी चाहिए जब हम सब मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं तो उनके प्रति संवेदनशीलता भी रखें। मरीज को अपनेपन का अहसास दें। वह भी आपको दिल से सम्मान देगा।
सवाल : हिमाचल की कौन से ऐसी जगह हैं, जहां लोगों को जरूर घूमने जाना चाहिए?
जवाब : कुल्लू, मनाली और शिमला में तो पूरा देश का टूरिस्ट उमड़ पड़ता। जगह कम पड़ जाती है। लेकिन ऐसी कई जगह हैं, जो बहुत ही खूबसूरत हैं और शांत है। इनमें किनौर वैली, लाहौल स्पीति, शिकारी देवी, बिलासपुर के समीप कोल डैम के आसपास के एरिया पर जरूर जाना चाहिए। यहां पर नेचुरल ब्यूटी है और कुदरत का अनोखा प्रयोग देखने का मिलेगा।
जवाब : एक कहावत है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता। यह पूरा टीम वर्क है। इन सभी कामों में पीजीआई डायरेक्टर, फैकल्टी, इंजीनियर, स्टाफ और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का भरपूर सहयोग रहा है। इनके बिना यह सब काम संभव नहीं होते।
सवाल : चंडीगढ़ के बारे में क्या राय रखते हैं?
जवाब : इस शहर की सबसे बड़ी खासियत यही है कि छोटे से क्षेत्र में खुला शहर। यह शहर पूरी तरह से प्लांड तरीके से बसा हुआ है। हर सेक्टर में मार्केट में है। मार्केट की पार्किंग है। चारों तरफ हरियाली है। चौड़ी सड़के हैं। खूबसूरत पार्क हैं। इन खूबियों से शहर का जो इन्वायरमेंट बनता है, उससे मन को एक पॉजिटिव फीलिंग आती है।
सवाल : किसी बात को लेकर कभी मन दुखी होता हो?
जवाब : आजकल लोगों में संवेदनशीलता व भावकुता कम होती जा रही है। इसे देखकर पीड़ा होती है। हमारी कोशिश होनी चाहिए जब हम सब मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं तो उनके प्रति संवेदनशीलता भी रखें। मरीज को अपनेपन का अहसास दें। वह भी आपको दिल से सम्मान देगा।
सवाल : हिमाचल की कौन से ऐसी जगह हैं, जहां लोगों को जरूर घूमने जाना चाहिए?
जवाब : कुल्लू, मनाली और शिमला में तो पूरा देश का टूरिस्ट उमड़ पड़ता। जगह कम पड़ जाती है। लेकिन ऐसी कई जगह हैं, जो बहुत ही खूबसूरत हैं और शांत है। इनमें किनौर वैली, लाहौल स्पीति, शिकारी देवी, बिलासपुर के समीप कोल डैम के आसपास के एरिया पर जरूर जाना चाहिए। यहां पर नेचुरल ब्यूटी है और कुदरत का अनोखा प्रयोग देखने का मिलेगा।