पवीला बाली को सलाम.. जॉगिंग करते-करते उठा लिए 400 किलो पॉलिथीन, पढ़ें प्रेरक कहानी
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प्लास्टिक से पर्यावरण को पहुंचने वाले नुकसान को सेक्टर 18 की रहने वाली पवीला बाली ने बखूबी समझा है। उन्हें उस दर्द का भी अहसास है, जो पॉलिथीन की वजह से अगले दस से 15 सालों में धरती को होने वाला है। वे घर से निकलीं और लोगों के बीच पहुंचकर एक अभियान को खड़ा किया। दो साल पहले उन्होंने प्लॉगिंग की शुरुआत की।
प्लॉगिंग का मतलब होता है कि हाथ में एक थैला लिया और जॉगिग के लिए निकल पड़े। जहां कूड़ा दिखा, उसे उठाते हुए आगे बढ़ते गए। पवीला और उनकी टीम ने कूड़े की बजाय पॉलीथिन को चुना। वे जब भी जॉगिंग के लिए घर से निकलतीं तो उनके साथ एक बैग होता और दौड़ के दौरान जहां भी उन्हें पालीथिन मिलता, उसे वे बैग में रख लेतीं।
बाद में उस पॉलिथीन को नगर निगम को सौंप देती, ताकि उसे मिट्टी में मिलने से रोका जाए। यह तरीका अपनाकर वे अब तक करीब 400 किलो पॉलिथीन सड़क से इकट्ठा कर चुकी हैं। उनका कहना है कि वे इस बात से बहुत चिंतित हैं कि प्लास्टिक धरती की उर्वरकता को खत्म कर देगी। यदि पेड़ नहीं होंगे तो पक्षी और जीव-जंतु भी नहीं बचेंगे। इससे धरती का पूरा ईको सिस्टम खत्म हो जाएगा। इसलिए वे जागरूक हैं और अपने स्तर से प्रयास कर रही हैं।
पॉलिथीन दिखने पर कटवाती हैं चालान, दुकानदारों में खौफ
वे इतनी ज्यादा एक्टिव हैं कि उन्हें किसी भी दुकानदार के पास पॉलिथीन दिखता है तो वे मौके पर ही नगर निगम के अधिकारियों को बुलाकर चालान कटवाती हैं। इससे कई दुकानदारों में उनका खूब खौफ है। उन्हें देखते ही दुकानदार बोल उठते हैं कि मैडम आ गई हैं, पॉलिथीन उठाकर निकल लो। वे अब तक सुखना लेक, सेक्टर 17 और सेक्टर नौ में चालान कटवा चुकी हैं। इस दौरान कई लोग उनसे उलझते भी हैं, मगर वे न तो हार मानती हैं और न ही डरती हैं।
कपड़ों के थैले भी बांट रही हैं
पवीला बाली लोगों के बीच जाकर कपड़े का थैला भी बांट रही हैं। अब तक वे 700 से ज्यादा मुफ्त थैला बांट चुकी हैं। जो लोग थैला खरीद सकते हैं, उन्हें पैसा देकर थैला देते हैं। इसके लिए उन्होंने कुछ महिलाओं को मेहनताने पर रखा हुआ है। इससे उन्हें रोजगार भी मिला है। जब भी उन्हें वक्त मिलता है तो घर से निकलकर लोगों के बीच थैला बांटने पहुंच जाती हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि घर वाले भी उनका खूब सपोर्ट करते हैं। खासकर उनके पति पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट पुनीत बाली।
चालान तो कई बार कटवाएं, मगर इससे कोई लगाम नहीं कसी गई। दरअसल, चालान में ही खामियां हैं। चालान के दौरान एमसी के अधिकारी दुकानदारों से आधार कार्ड लेते हैं। आधार कार्ड में लिखे एड्रेस पर ही चालान भेजा जाता है। एड्रेस पर कोई मिला तो ठीक, बाद में कौन पूछने वाला है। इसलिए मौके पर ही चालान कटना चाहिए। पवीला बाली, रन क्लब चंडीगढ़