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एक ही पांव से पहिये को दी ऐसी रफ्तार कि बन गया चैम्पियन, रिकॉर्ड भी नाम किया

Mon, 10 Apr 2017 09:14 AM IST
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 10 Apr 2017 09:14 AM IST
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india's first para cyclist abhishek of chandigarh wins asian championsip
देश का पहला पैरा साइक्लिस्ट अभिषेक
जिंदगी की रफ्तार से कदम से कदम मिलाकर चलने में मुश्किल का सामना करने वाले ने पहियों को ऐसी रफ्तार दी कि एशियन साइकिलिंग चैंपियन बन गए। चंडीगढ़ के अभिषेक ने देश के पहले पैरा साइकिलिस्ट होने का रिकार्ड भी अपने नाम कर लिया। अभिषेक ने बहरीन में आयोजित साइकिलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने 12.8 किलोमीटर की दूरी 21 मिनट और 8 सेकेंड में पूरी कर यह खिताब जीता।
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इस चैंपियनशिप में कजाकिस्तान, ईरान, इराक, चीन, जापान, मलेशिया, इंडोनेशिया, बहरीन, बंगलादेश, पाकिस्तान, हांगकांग के  खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। सिटी ब्यूटीफुल के अभिषेक सिंह शेखू कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएट है। बचपन से ही दाहिने पांव में दिक्कत होने के कारण वह बिना स्टिक के चल नही पाता। दाएं पाव पर पूरी तरह से भार डालने में असमर्थ है। इसके बावजूद उसने हार नहीं मानी। साइकिलिंग को उसने अपना जुनून बना लिया। आज इसी शेखू  ने बहरीन में होने वाली एशियन साइकिल चैंपियनशिप में देश का नाम रोशन किया।
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एक पांव से चलाता है साइकिल
अभिषेक ने जब साइकिल चलानी शुरू कि तो उसने महसूस किया कि उसके पांव की मूवमेंट बढ़ने लगी। पहले पहले दिक्कत आई लेकिन हार नही मानी और लगातार अभ्यास करता चला गया। स्टेट लेवल चैंपियनशिप में हिस्सा लेना शुरू करते हुए मेडल जीतने में कामयाबी पाई। शेखू एक पैर से ही साइकिल चलाते है। दूसरा खराब पांव केवल पैडल को सपोर्ट देने के लिए रखते हैं।
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कंपीटीशन लायक साइकिल खरीदने में असमर्थ
अभिषेक ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर में हिस्सा लेने के लिए प्रोफेशनल साइकिल की जरूरत होती है। इसकी कीमत 7 लाख के करीब है। लेकिन वह इसे खरीदने में असमर्थ था। उनके अनुसार एशिया चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाले सभी प्रोफेशनल के पास 5-7 लाख वाली साइकिल थी, लेकिन मेरे पास 50 हजार रुपये वाली साइकिल से ही एशिया चैंपियनशिप में उतरे और विजेता बने। अभिषेक के अनुसार इस कंपीटीशन में हिस्सा लेने के लिए  हैदराबाद के आदित्य मेहता उनकी मदद करते है। इन्होंने ही आने जाने का खर्च भी उठाया।


बिना कोच के बना चैंपियन
अभिषेक पिछले 10 सालों से साइकिलिंग कर रहे हैं। इनका कोई भी कोच नही है। इंटरनेट के माध्यम से साइकिलिंग की जानकारी जुटा कर उसे फोलो करते है। प्रतियोगिता नजदीक आते ही अभ्यास में पूरी तरह जुट जाते है।
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