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'व्हील चेयर' वाला एक शख्स, जिसने हाइवे किनारे कराई शराबबंदी, दिलचस्प है इनकी कहानी

Mon, 17 Feb 2020 03:08 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Mon, 17 Feb 2020 03:08 PM IST
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Harman Singh Sidhu's battle against open liquor contracts on highway
हरमन सिद्धू
सिस्टम से लड़ना कोई हरमन सिंह सिद्धू से सीखे। वर्ष 1996 में वह एक हादसे का शिकार हो गए थे और इसके बाद से व्हीलचेयर पर आ गए। चाहते तो इस अवस्था को अपनी कमजोरी बना सकते थे, लेकिन उन्होंने बैठने के बजाय लड़ना सीखा। सड़क हादसों को रोकने के लिए वह लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। सड़क हादसों के पीछे सबसे बड़ी वजह शराब है।
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हाईवे पर शराब के ठेके न खुलें, इसलिए पहले हाईकोर्ट में लड़ाई जीती। फिर सुप्रीम कोर्ट में। सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश दिए हैं, उससे वह संतुष्ट नहीं थे, ऐसे में वह दूसरी बेंच में गए हैं। लड़ाई अब भी जारी है। उनका कहना है कि जब तक संघर्ष की गुंजाइश रहेगी, तब तक लड़ता रहूंगा। इस पूरी लड़ाई में उन्हें देश के कई जगहों से धमकियां मिलीं लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। पेश है हरमन सिद्धू से बातचीत के प्रमुख अंश।
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नियम सख्त होने के बावजूद सड़क हादसे क्यों नहीं रुक रहे?
दरअसल, नियम सिर्फ उन लोगों पर लागू हो रहे हैं, जो ड्राइविंग सीट पर बैठते हैं जबकि सड़क हादसों के लिए इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट, सड़क बनाने के ठेकेदार, सड़क की मेंटीनेंस के लिए जिम्मेदार, व्हीकल कंपनी भी जिम्मेदार होती हैं। उनके लिए नियम बने हैं, लेकिन लागू नहीं हो रहे हैं।
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संगरूर में हुए हादसे (स्कूल वैन में आग लगने से चार स्कूली बच्चों की मौत) में शायद ड्राइवर की इतनी गलती नहीं थी। कबाड़ तक पहुंच चुकी वैन दोबारा से सड़क पर कैसे दौड़ने लगी। इसके लिए जो जिम्मेदार लोग हैं, उन पर कार्रवाई नहीं होगी।

चंडीगढ़ में हादसे रोकने के लिए क्या करने होंगे?

यहां रात के वक्त ज्यादा हादसे होते हैं। खासकर ओवरस्पीड की वजह से। हालांकि ट्रैफिक पुलिस ने रात के लिए इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं। स्पीड रडार खरीदे जा चुके हैं। उम्मीद है कि इससे हादसे रुकेंगे। दूसरा महत्वपूर्ण काम इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट का है। यह पहली बार देखा जा रहा है कि चंडीगढ़ की सड़कों की हालत इतनी खराब है। इनकी वजह से दोपहिया वाहनों के बहुत हादसे हो रहे हैं। तीसरी बात सबसे महत्वपूर्ण है।

चंडीगढ़ में ट्रैफिक पुलिस जागरूकता अभियान लगातार चला रही है। इससे लोगों में ट्रैफिक सेंस बढ़ भी रहा है, लेकिन चंडीगढ़ में आसपास के प्रदेशों के बहुत से वाहन आते हैं। वहां पर चंडीगढ़ जैसे जागरुकता अभियान नहीं चलाए जाते। यदि हरियाणा, पंजाब, हिमाचल में भी इस तरह के जागरूकता और सख्ती बरती जाए तो इसका इंपेक्ट चंडीगढ़ के ट्रैफिक पर जरूर पड़ेगा।

आप किन चीजों से निराश होते हैं?
जो लोग निर्णय लेने वाले हैं, उनके उदासीन रवैये से मैं बहुत परेशान होता हूं। उन्हें भारी-भरकम तनख्वाह भी मिलती है। उनकी जिम्मेदारी भी है लेकिन वे अपने काम को सही ढंग से नहीं करते हैं। इससे निराशा होती है।

भविष्य में चंडीगढ़ को कहां देखते हैं?
30 सालों में यह पहली बार हुआ कि शहर के सड़कों की हालत इतनी ज्यादा खराब हुई है। हालत बद से बदतर हो गई है। यदि यही हालात रहे तो शहर बहुत ही बुरी स्थितियों में चला जाएगा। प्रशासन व जिम्मेदार लोगों को चाहिए कि वे इन हालात को यहीं रोक दें। वरना आने वाले दिनों में चंडीगढ़ की गिनती भी बदहाल शहरों में होने लगेगी।
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