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तारा सिंह: रेलवे स्टेशन पर 'कुलीगीरी' करने को मजबूर नेशनल हॉकी प्लेयर
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला
Updated Fri, 15 Jul 2016 09:34 AM IST
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'कुलीगीरी' करने को मजबूर नेशनल हॉकी प्लेयर
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किसी समय नेशनल स्तर पर हॉकी खेल चुका खिलाड़ी आज रेलवे स्टेशन पर लोगों का सामान उठाने के लिए मजबूर है। तारा सिंह ने हॉकी खेलते हुए कई मेडल जीते और जिला लैवल से लेकर नैशनल लैवल तक हॉकी में बुलंदियों को छुआ लेकिन सरकारी सिस्टम में फंसकर उनका पूरा जीवन आर्थिक तंगी का मोहताज हो गया है।
सरकार ने उसे सरकारी नौकरी देने का वायदा किया था लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी वह इसी आस में दफ्तरों के चक्कर काट रहा है कि शायद उसकी सुन ली जाए। तारा सिंह के लिए सबसे बड़ी समस्या अपने परिवार का पेट पालने की है और इसके लिए उसने अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करना शुरू कर दिया। तारा हॉकी से इतना स्नेह करता है कि वह अपने बच्चों को भी हॉकी सीखने के लिए स्टेडियम ले जाता है लेकिन बच्चे हॉकी नहीं खेलना चाहते क्योंकि वे कहते हैं कि उन्हें भी ऐसे ही कुली का काम करना पड़ेगा।
तारा कहता है कि जब वह लोगों को हॉकी का खिलाड़ी होने की बात बताता है तो सब लोग उस पर हंसते हैं, कोई भी उस पर विश्वास नहीं करता कि वह भी कभी नैशनल लैवल पर खेल चुका है। मैदान में लोगों की वाहवाही लूट चुका तारा आज अपनी पहचान के लिए जद्दोजहद कर रहा है।
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सरकार ने उसे सरकारी नौकरी देने का वायदा किया था लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी वह इसी आस में दफ्तरों के चक्कर काट रहा है कि शायद उसकी सुन ली जाए। तारा सिंह के लिए सबसे बड़ी समस्या अपने परिवार का पेट पालने की है और इसके लिए उसने अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करना शुरू कर दिया। तारा हॉकी से इतना स्नेह करता है कि वह अपने बच्चों को भी हॉकी सीखने के लिए स्टेडियम ले जाता है लेकिन बच्चे हॉकी नहीं खेलना चाहते क्योंकि वे कहते हैं कि उन्हें भी ऐसे ही कुली का काम करना पड़ेगा।
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तारा कहता है कि जब वह लोगों को हॉकी का खिलाड़ी होने की बात बताता है तो सब लोग उस पर हंसते हैं, कोई भी उस पर विश्वास नहीं करता कि वह भी कभी नैशनल लैवल पर खेल चुका है। मैदान में लोगों की वाहवाही लूट चुका तारा आज अपनी पहचान के लिए जद्दोजहद कर रहा है।
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