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इंजीनियर की नौकरी छोड़ शुरू की ड्रैगन फ्रूट की बागवानी, हो रही लाखों की कमाई

Thu, 19 Nov 2020 10:18 AM IST
दुष्यंत शर्मा नवदीप शर्मा, पठानकोट
नवदीप शर्मा, पठानकोट Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 19 Nov 2020 10:18 AM IST
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Earning millions by gardening of Dragon fruit in punjab
‘ड्रैगन फ्रूट’ के बाग में खड़े रमन सलारिया... - फोटो : amar ujala

10 लाख रुपये प्रति वर्ष की नौकरी छोड़ पठानकोट के गांव जंगला निवासी सीनियर इंजीनियर ने गेहूं, धान के फसली चक्र से निकलकर ‘ड्रैगन फ्रूट’ की बागवानी शुरू की है, जिससे वह प्रति वर्ष लाखों रुपये मुनाफा कमा रहे हैं। जंगला निवासी रमन सलारिया ने चार कनाल में नॉर्थ अमेरिका के प्रसिद्ध फल ‘ड्रैगन फ्रूट’ का बाग तैयार किया है।

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ड्रैगन फ्रूट स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होने के चलते काफी प्रसिद्ध है और इसकी देश-विदेश में भारी मांग है। इसकी कीमत की बात करें तो यह आम लोगों की पहुंचे से बाहर रहा है, क्योंकि भारत में इसकी पैदावार काफी कम होती है।
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अब इसकी पैदावार माझा क्षेत्र के पठानकोट में शुरू हो चुकी है, जहां पहली बार में पैदावार कई क्विंटल हुई है। रमन ने बताया कि वह 15 वर्षों से जेके सीआरटी नामक मुंबई-चीन आधारित संयुक्त उपक्रम में बतौर सीनियर इंजीनियर (सिविल) कार्यरत थे। दिल्ली मेट्रो के निर्माण में लगी कंपनी उन्हें प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये वेतन देती थी।
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दोस्त ने किया प्रेरित, परिवार ने दिया सहयोग
रमन सलारिया ने बताया कि वह नौकरी तो इंजीनियरिंग की करते थे पर रुझान किसानी में था। इस दौरान उनकी मुलाकात दिल्ली पूसा कृषि विश्वविद्यालय में कार्यरत दोस्त से हुई और ड्रैगन फ्रूट की पैदावार के बारे में जानने के लिए गुजरात जाकर जानकारी हासिल की।

 

दोस्त विजय शर्मा ने ड्रैगन फ्रूट के बारे बताया तो इंटरनेट से इसके बारे में जानकारी ली। फिर दोस्त के साथ दो बार गुजरात जाकर ‘ड्रैगन फ्रूट’ के फार्म पर विजिट किया। परिवार सहित किसान पिता भारत सिंह ने भी उनका सहयोग दिया। गांव जंगला में उनकी 10 एकड़ जमीन है।

पानी की बेहद कम जरूरत होती है
बागवान रमन सलारिया बताते हैं कि उन्होंने गुजरात से पौधे की कटिंग खरीदी। पठानकोट आकर चार कनाल में इसे रोपा। एक साल में डेढ़ लाख का मुनाफा भी कमाया। सलारिया ने बताया कि ‘ड्रैगन फ्रूट’ का बीज या पौधा नहीं लगाया जा सकता।

 

मार्च में इसकी रोपाई होती है। जुलाई में फूल फूटकर फलों में बदलते हैं और सितंबर के पहले सप्ताह से अक्तूबर अंत तक इसके फल पक जाते हैं। यानी लगाने के आठ माह में ही यह फल देता है लेकिन पूरी तरह से तैयार होने में इसे तीन साल लगते हैं।

रमन के मुताबिक इस पौधे को पानी की बेहद कम जरूरत होती है। पंजाब के माझा जोन का वातावरण इसके लिए अनुकूल है। ज्यादा पानी से पौधा गल जाता है। अच्छी पैदावार के लिए ‘ड्रिप इरिगेशन’ बढ़िया विकल्प है। तीन साल बाद पौधा अपनी पूरी क्षमता के साथ फल देता है। फिर उसकी कलम काटकर नया पौधा रोपित किया जा सकता है या फिर इसे बेचकर कमाई भी की जा सकती है।

400 से 500 में बिकता है एक फल

रमन सलारिया ने बताया कि आम दुकानों पर यह फल नहीं मिलता। बड़े स्टोर पर ही यह उपलब्ध है। प्रति फल की कीमत 400 से 500 रुपये है। जिसके चलते यह आम आदमी की पहुंच से बाहर है। वह पठानकोट में लोगों को 200 से 300 रुपये में बेच रहे हैं। इसकी अच्छी पैदावार होने पर और कम दाम में इसे बेचा जाएगा। 

थोक में फ्रूट नहीं बेचेंगे, खुदरा बेचने के लिए लगाएंगे दुकान
सलारिया बताते हैं, जब वह गुजरात से इसका प्रशिक्षण लेकर लौटे और अपने खेत में इसे लगाया तो लोग मजाक उड़ाने लगे और फब्तियां कसने लगे। पहली बार फल देरी से आता है, इसलिए लोगों ने मजाक बनाया। अब वही लोग युवाओं को उदाहरण देकर कुछ अलग करने की सलाह देते हैं।

रमन का कहना है कि वह थोक में फल नहीं बेचेंगे और खुद खुदरा दुकान लगाएंगे। वहीं से इसकी बिक्री करेंगे। पूछने पर बताया कि विदेशी फल होने की बात कहकर बिचौलिए इसका रेट दोगुना कर देते हैं, लेकिन वह अपने शहर और जिले में इसे सस्ते दाम में लोगों तक पहुंचाएंगे।

उत्तरी अमेरिका से शुरू हुई ‘ड्रैगन फ्रूट’ की पैदावार
रमन सलारिया ने बताया कि ‘ड्रैगन फ्रूट’ की सबसे पहले पैदावार उत्तरी अमेरिका से शुरू हुई। उसके बाद थाईलैंड, फिलीपींस, ताइवान, इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर में इसकी बड़े स्तर पर बागवानी हो रही है। पंजाब समेत कई राज्यों में उत्तरी अमेरिका और थाईलैंड से इसको मंगवाया जा रहा है। देश में गुजरात और महाराष्ट्र के किसान इसकी पैदावार कर रहे हैं। इसके बावजूद इसे विदेश से आयात करना पड़ रहा है।   

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