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फ्रांसीसी गर्ल बन गई क्लासिकल डांसर देवयानी कुमारी, पद्मश्री भी मिला
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 18 Jul 2016 07:29 PM IST
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क्लासिकल डांसर देवयानी कुमारी
- फोटो : फाइल फोटो
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फ्रांसीसी मूल की लड़की अनिक चेमोट्टी को भारत नाट्यम से इतना प्यार हुआ कि वह देवयानी कुमारी बन गई और दिल्ली में बस गई। देवयानी कहती हैं कि भरत नाट्यम ने उनको भारत से जोड़ा। भरत नाट्यम ने उनकी जिंदगी और सर्जनात्मकता को नई दिशा दी। अब वह बच्चों को यह क्लासिकल डांस सिखा रही हैं। फ्रांस में पैदा हुई देवयानी का वास्तविक नाम अनिक चेमोट्टी है।
नृत्य क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उनको 2009 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया। भारत को अपना घर कहने वाली देवयानी वर्तमान में दिल्ली में रह रही हैं। एक कार्यक्रम के सिलसिले में वे रविवार को सिटी ब्यूटीफुल आईं थीं, जहां उन्होंने अपनी जिंदगी की कुछ बातें साझा कीं। देवियानी ने बताया कि मैं शुरू से ही कला से जुड़ना चाहती थी। 10 साल की उम्र में मैंने पहली बार भारतीय शास्त्रीय संगीतज्ञ रवि शंकर को सुना था।
यह मुझे इतना अच्छा लगा कि फ्रांस में भरत नाट्यम सीखना शुरू कर दिया। 1973 में मुझे इंडो फ्रेंच कल्चरल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस की स्कॉलरशिप मिल गई। इस स्कॉलरशिप के तहत मुझे भारत आकर भरत नाट्यम सीखने का अवसर मिला। चेन्नई आकर मैंने कांचीपुरम एल्लपा मुडलियार, कलयममानी वीएस मुथुस्वामी पिल्लई से भरत नाट्यम की बारीकियां जानीं।
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इसके बाद मुझे देवयानी कुमारी के नाम से पुकारा जाने लगा। 1978 में देवयानी वापस पेरिस चली गईं। वहां उन्होंने बच्चों को भरत नाट्यम सिखाना शुरू कर दिया। चार साल बाद आईसीसीआर ने देवयानी को अपनी ऑफिशियल रिपरसटिव बनाया। 1983 में स्विट्जरलैंड में आयोजित इंटरनेशनल कॉन्टेस्ट में देवयानी को भारत नाट्यम की कोरियोग्राफी करने पर विशेष अवॉर्ड दिया गया था।
इन जगहों पर कर चुकी हैं परफॉर्म
देवयानी कुमारी भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा यूके, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली, ग्रीस, पुर्तगाल और कोरिया जैसे देशों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुकी हैं। इसके अलावा वे कई वर्कशॉप भी आयोजित कर चुकी हैं।
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नृत्य क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उनको 2009 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया। भारत को अपना घर कहने वाली देवयानी वर्तमान में दिल्ली में रह रही हैं। एक कार्यक्रम के सिलसिले में वे रविवार को सिटी ब्यूटीफुल आईं थीं, जहां उन्होंने अपनी जिंदगी की कुछ बातें साझा कीं। देवियानी ने बताया कि मैं शुरू से ही कला से जुड़ना चाहती थी। 10 साल की उम्र में मैंने पहली बार भारतीय शास्त्रीय संगीतज्ञ रवि शंकर को सुना था।
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यह मुझे इतना अच्छा लगा कि फ्रांस में भरत नाट्यम सीखना शुरू कर दिया। 1973 में मुझे इंडो फ्रेंच कल्चरल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस की स्कॉलरशिप मिल गई। इस स्कॉलरशिप के तहत मुझे भारत आकर भरत नाट्यम सीखने का अवसर मिला। चेन्नई आकर मैंने कांचीपुरम एल्लपा मुडलियार, कलयममानी वीएस मुथुस्वामी पिल्लई से भरत नाट्यम की बारीकियां जानीं।
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इसके बाद मुझे देवयानी कुमारी के नाम से पुकारा जाने लगा। 1978 में देवयानी वापस पेरिस चली गईं। वहां उन्होंने बच्चों को भरत नाट्यम सिखाना शुरू कर दिया। चार साल बाद आईसीसीआर ने देवयानी को अपनी ऑफिशियल रिपरसटिव बनाया। 1983 में स्विट्जरलैंड में आयोजित इंटरनेशनल कॉन्टेस्ट में देवयानी को भारत नाट्यम की कोरियोग्राफी करने पर विशेष अवॉर्ड दिया गया था।
इन जगहों पर कर चुकी हैं परफॉर्म
देवयानी कुमारी भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा यूके, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली, ग्रीस, पुर्तगाल और कोरिया जैसे देशों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुकी हैं। इसके अलावा वे कई वर्कशॉप भी आयोजित कर चुकी हैं।