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Corona Commando: पत्नी और बच्चे को घर छोड़कर आईसीयू में ड्यूटी कर रहे नर्सिंग ऑफिसर अशोक
Fri, 24 Apr 2020 04:55 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 24 Apr 2020 04:55 PM IST
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कोरोना कमांडो अशोक
- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना के मरीजों के बीच रहकर ड्यूटी करना जोखिम भरा काम तो है लेकिन यही तो असल समय है, अपने फर्ज को अदा करने का। आखिर इस समय हम अपनी ड्यूटी से कैसे मुंह मोड़ लें। यह कहना है पीजीआई के नर्सिंग ऑफिसर अशोक बेनीवाल का, जो परिवार को गांव भेजकर यहां कोरोना आईसीयू में ड्यूटी कर रहे हैं। अशोक का कहना है कि इस संकट की घड़ी में अब तो पीजीआई ही घर और साथ में काम करनेवाले सहयोगी परिवार के सदस्य हो गए हैं।
ऐसे में अपनों को अकेला छोड़कर पीछे हटने के बारे में सोचना भी गलत होगा। अशोक ने बताया कि कोरोना के मरीजों के बीच जाकर ड्यूटी करने से पहले हम अपनी सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था करते हैं। पीपीई किट पहनने के बाद सात घंटे तक लगातार उसमें ही रहना होता है। किट इतनी भारी है कि उसे पहनने में बाद सर में भयंकर दर्द होता है।
ठीक वैसे ही किट को उतारते वक्त भी विशेष एहतियात बरतना पड़ता है। हमें सीसी टीवी कैमरे के सामने कंट्रोल रूम की मॉनिटरिंग के बीच किट को हटाना होता है। अगर उस दौरान जरा सी भी चूक हुई तो संक्रमण होने का खतरा रहता है। किट के एक एक भाग को स्टेप बाई स्टेप हटाया जाता है। ड्यूटी जोखिम भरी तो है लेकिन एक अलग तरह का संतोष मिल रहा है।
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बेटा और पत्नी 18 मार्च से हैं दूर
कोरोना के कारण अशोक ने 18 मार्च को ही अपनी पत्नी सुनीता और 4 साल के बेटे रौनिक को हरियाणा स्थित अपने गांव भेज दिया था। तब से वो दोनों वहीं हैं। अशोक का कहना है कि प्रतिदिन बेटे से कई बार बात होती है, लेकिन वो मुझे बहुत याद करता है। मां से लिपटकर रोता है। कहता है पापा को बुला दो। अशोक का कहना है कि अब तो इस कोरोना के खत्म होने का इंतजार है।
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ऐसे में अपनों को अकेला छोड़कर पीछे हटने के बारे में सोचना भी गलत होगा। अशोक ने बताया कि कोरोना के मरीजों के बीच जाकर ड्यूटी करने से पहले हम अपनी सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था करते हैं। पीपीई किट पहनने के बाद सात घंटे तक लगातार उसमें ही रहना होता है। किट इतनी भारी है कि उसे पहनने में बाद सर में भयंकर दर्द होता है।
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ठीक वैसे ही किट को उतारते वक्त भी विशेष एहतियात बरतना पड़ता है। हमें सीसी टीवी कैमरे के सामने कंट्रोल रूम की मॉनिटरिंग के बीच किट को हटाना होता है। अगर उस दौरान जरा सी भी चूक हुई तो संक्रमण होने का खतरा रहता है। किट के एक एक भाग को स्टेप बाई स्टेप हटाया जाता है। ड्यूटी जोखिम भरी तो है लेकिन एक अलग तरह का संतोष मिल रहा है।
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बेटा और पत्नी 18 मार्च से हैं दूर
कोरोना के कारण अशोक ने 18 मार्च को ही अपनी पत्नी सुनीता और 4 साल के बेटे रौनिक को हरियाणा स्थित अपने गांव भेज दिया था। तब से वो दोनों वहीं हैं। अशोक का कहना है कि प्रतिदिन बेटे से कई बार बात होती है, लेकिन वो मुझे बहुत याद करता है। मां से लिपटकर रोता है। कहता है पापा को बुला दो। अशोक का कहना है कि अब तो इस कोरोना के खत्म होने का इंतजार है।