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कोरोना कमांडोः नाजो से पली ‘पंखुड़ी’ को महामारी ने बनाया खतरों का खिलाड़ी, फ्रंटलाइन पर डटी

Tue, 19 May 2020 12:53 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Tue, 19 May 2020 12:53 PM IST
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Corona made strong to chetna rana, corona commando, corona warriors
कोरोना वॉरियर चेतना राणा - फोटो : अमर उजाला
मां मुझे हमेशा पंखुड़ी बुलाती है। पूछने पर उसका एक ही जवाब होता है कि बेटा तू इतनी नाजुक है कि तुझे पंखुड़ी नाम ही सूट करता है। कोरोना वार्ड में ड्यूटी के दौरान जब पीपीई किट पहनने के कारण मेरे चेहरे पर घाव के निशान बन जाते थे तब मां की वह बातें याद आती थी।
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आंखों से आंसू छलक जाते थे, लेकिन वो आंसू दुख और कष्ट के नहीं बल्कि आत्म संतुष्टि, प्यार और देशभक्ति से ओतप्रोत होते थे। यह कहना है कि पीजीआई नर्सिंग ऑफिसर चेतना राणा का, जो कोरोना डेडीकेटेड हॉस्पिटल में ड्यूटी करने के बाद इन दिनों क्वारंटाइन का समय पूरा कर रही हैं।
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उन्होंने कहा, ‘कोरोना महामारी के इस दौर में मैंने पूरी निष्ठा के साथ अपने कर्तव्य को पूरा किया है। आगे भी ड्यूटी लगी तो जरूर कोरोना के मरीजों के इलाज में अपना सहयोग दूंगी। मेरे इस कार्य में मेरे माता-पिता और मेरा भाई हर पल मुझे सहयोग दे रहे हैं। यह सच है कि ढाई महीने से मैं उनसे दूर हूं, लेकिन उनकी दुआएं और प्यार हर पल मेरे साथ है। उसी की बदौलत कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी से बचाव के इस जंग में बहादुरी से डटी हुई हूं ।
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पीपीई किट पहनने से होती है शारीरिक परेशानी
चेतना ने बताया कि आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी के दौरान लगातार छह से सात घंटे पीपीई किट पहनना होता है। इस दौरान न तो हम पानी पी सकते हैं ना अपना कोई और कार्य कर सकते है। इतना ही नहीं चेहरे पर पहने गए गॉगल्स और मास्क के कारण भयंकर जलन और खुजली होती है। लेकिन हम कुछ भी नहीं कर सकते।

प्यास लगे तो एक घूंट पानी पीना भी संभव नहीं होता। ऐसे में ड्यूटी करने के दौरान 6 घंटे लगातार खड़े रहना पड़ता था। लेकिन मुझे अपनी ड्यूटी से कभी कोई परेशानी नहीं हुई। पीपीई किट पहनने के कारण थोड़ी शारीरिक परेशानियां तो होती थी, लेकिन मरीजों की ठीक होती तबीयत देखकर वह सारी समस्या मानो दूर हो जाती थी।

हमारी देशभक्ति भी लोग याद रखेंगे
चेतना का कहना है कि बचपन से ही सीमा पर जवानों को शहीद होते और देश की रक्षा में 12 महीने डटे हुए देखा है। उन्हें देखकर दिल में देशभक्ति का जज्बा हमेशा कायम रहता था। आज जब देश के प्रति अपने कर्तव्य के निर्वाह का समय आया है तो हम पीछे कैसे हट सकते हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र से जुड़ी होने के कारण मेरा फर्ज बनता है कि मैं अपनी आखिरी सांस तक कोरोना से जंग जारी रखूं।


जब कभी मन में किसी भी प्रकार का डर आता है तो अपने पापा प्रताप सिंह को फोन लगा लेती हूं। उनकी बातें सुनकर देशभक्ति का जज्बा 100 गुना ज्यादा और बढ़ जाता है। वह हमेशा बस यही कहते हैं कि अगर कोरोना को हरा दिया तो पूरी उम्र फक्र से जियोगी और अगर उससे लड़ते हुए शहीद हो गई तो तुम्हारी देशभक्ती हमेशा याद की जाएगी।
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