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अंकल मुझे पढ़ा दो...और बच्ची के मुंह से यह सुनकर हाईकोर्ट के वकालत छोड़कर ये बन गए टीचर

Mon, 09 Mar 2020 02:41 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला नेटवर्क, मोहाली
अमर उजाला नेटवर्क, मोहाली Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 09 Mar 2020 02:41 PM IST
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Success Story of Tarsem Singh, Who Left High Court Lawyership for Teaching
तरसेम सिंह - फोटो : अमर उजाला
पांच साल की उस बच्ची का नाम था रवीना। वो पार्क में बैठे एक बुजुर्ग के पास आई और मासूमियत से बोली... अंकल मुझे पढ़ा दो। यह अंकल पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के वकील तरसेम सिंह थे, जो उस दौरान एक रोड एक्सीडेंट के बाद हुई सर्जरी से उबर रहे थे। पांच साल की बच्ची रवीना ने हाईकोर्ट के वकील तरसेम सिंह के जीवन की धारा ही बदल दी। आज तरसेम सिंह एक एडवोकेट नहीं, बल्कि एक टीचर हैं। जो स्लम एरिया के जरूरतमंद बच्चों को फ्री ट्यूशन देकर उन्हें पढ़ा रहे हैं।
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पांच साल पहले रवीना ने सात बच्चों के साथ जो कारवां शुरू करवाया था, उससे आज करीब 150 बच्चे जुड़े हुए हैं। जिसमें प्री-नर्सरी से लेकर 10वीं तक के स्टूडेंट शामिल हैं। मोहाली के सेक्टर-69 में रहने वाले एडवोकेट तरसेम सिंह ने वर्ष-2015 में ‘फ्री फ्रैग्नेंस ट्यूशन-69’ के नाम से अकेले ही संस्था की शुरूआत की। परेशानियां तो बहुत आईं पर उन्होंने हार कतई नहीं मानी। उन्होंने शुरूआत की सेक्टर-69 के पार्क नंबर-15 में बच्चों को पढ़ाने से। जब पार्क में बच्चों को पढ़ाना शुरू किया तो पहले सब ठीक रहा और स्लम एरिया के बच्चे भी पढ़ने के लिए आने लगे।
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कुछ समय बीता तो लोगों ने पार्क में बच्चों को पढ़ाने पर आपत्ति जतानी शुरू कर दी। आखिरकार करीब एक साल के बाद ही उन्हें पार्क से हटना पड़ा। इसके बाद इस फ्री ट्यूशन का ठिकाना बनी सेक्टर-69 में गमाडा की ओर से अलाट की गई स्कूल की खाली जगह। धीरे-धीरे यहां भी उन्हें वहीं समस्या पेश आई। लोगों ने बच्चों के शोर को मुद्दा बनाकर तरसेम सिंह को वहां से भी हटने के लिए मजबूर कर दिया। इस पर तरसेम अपनी ‘फ्री फ्रैग्नेंस ट्यूशन-69’ को लेकर पहुंचे ग्रेशियन अस्पताल के पास वाले पार्क में। लेकिन समस्या यहां भी जस की तस रही, बल्कि थोड़ी ज्यादा ही समस्या आई।
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बकौल तरसेम सिंह यहां तो लोगों ने उन्हें धमकी भरी चेतावनी ही दे डाली। इस सबसे तंग आकर तरसेम सिंह पंजाब शिक्षा सचिव कृष्ण कुमार से मिले और अपनी दास्तां उन्हें सुनाई। कृष्ण कुमार ने ‘फ्री फ्रैग्नेंस ट्यूशन-69’ के लिए कुंभड़ा के सरकारी स्कूल के ओपन कंपाउंड में बच्चों को पढ़ाने की अनुमति दे दी। इसके बाद 10 दिसंबर, 2018 से ‘फ्री फ्रैग्नेंस ट्यूशन-69’ की क्लास शाम 4 से 5 बजे तक कुंभड़ा के सरकारी स्कूल में आज भी चल रही है।

पेक के प्रोफेसर और आइसर के स्टूडेंट्स कर रहे मदद

पांच साल पहले एडवोकेट तरसेम सिंह ने अकेले ही बच्चों को फ्री में पढ़ाने की शुरूआत की थी। पार्क में जब वह पढ़ाते थे तो एक तरफ जहां लोगों के विरोध का उन्हें सामना करना पड़ा, वहीं, उन्हें यह करते देख कुछ हाउस वाइफज आगे आईं। धीरे-धीरे उनके साथ अमृतपाल कौर सिद्घू, जगमिंदर कौर, सुमन चावला और निशा शर्मा भी जुड़ गईं।

जो अपने घरेलू कामों से समय निकाल कर बच्चों को पढ़ा रही हैं। एक साल पहले आए एक वालंटियर टीचर ने बच्चों को फ्रैंच भी सिखाई। इस ‘फ्री फ्रैग्नेंस ट्यूशन-69’ में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के कुछ प्रोफैसर भी सुविधानुसार बच्चों को पढ़ाने आते हैं। वहीं आईसर के स्टूडेंट्स का एक ग्रुप भी इन बच्चों को पढ़ाने में मदद करता है।

2014 में हाईकोर्ट से लौटते वक्त हुआ था एक्सीडेंट
सितंबर, 2014 में हाईकोर्ट से वापिस घर आते वक्त एक रोड एक्सीडेंट में तरसेम सिंह बुरी तरह जख्मी हो गए थे। सर्जरी के बाद उनकी जान तो बच गई, लेकिन ठीक से चलने फिरने में उन्हें अभी भी दिक्कत होती है। सर्जरी के बाद जब घर आए तो वॉकर के सहारे पार्क में जा बैठते थे। वहीं उनकी मुलाकात बच्ची रवीना से हुई।

पहली मुलाकात में रवीना ने एक स्ट्रीट पपी का बर्थ-डे मनाने के लिए उनसे मदद मांगी। बिस्कुट लाकर अपने जैसे गरीब बच्चों को बांटे और तरसेम सिंह को भी दिए। दो दिन बाद हुई दूसरी मुलाकात में रवीना ने उनसे पूछा, अंकल मुझे पढ़ा दोगे क्या... तो फिर इसके बाद से यह सफर शुरू हो गया था।
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