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राजीव सिंगलाः चंडीगढ़ से इतना प्यार ठुकरा दी दिल्ली की सरकारी नौकरी, अब हैं चीफ इंजीनियर
Mon, 10 Feb 2020 02:16 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 10 Feb 2020 02:16 PM IST
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राजीव सिंगला
- फोटो : अमर उजाला
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पत्थरों का शहर कहते हैं लोग इसे, मैं हूं तैयार इसमें फूल उगाने को/ स्वच्छता का पाठ पढ़ाने को, कर्मठ हूं सुंदरता में चार चांद लगाने को... यह कहना है चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के चीफ इंजीनियर राजीव सिंगला का, जिन्हें चंडीगढ़ से खास लगाव है। शहर में हो रहे अवैध निर्माण से वह काफी चिंतित है। उनका कहना है कि ऐसे लोगों पर सख्त होने की जरूरत है, तभी शहर के पास सिटी ब्यूटीफुल का तमगा रहेगा।
राजीव सिंगला चंडीगढ़ के जीएमएसएसएस-16 से पढ़े हैं। इसके बाद उन्होंने पेक से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री ली। पढ़ाई के तुरंत बाद उन्हें दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (डीडीए) में सरकारी नौकरी का ऑफर मिला लेकिन चंडीगढ़ से इतना प्यार था कि उन्होंने वह सरकारी नौकरी छोड़ दी और चंडीगढ़ में ही प्राइवेट नौकरी ज्वाइन कर ली। पेश है उनसे बातचीत के कुछ अंश...
सवाल: सरकारी स्कूल से चीफ इंजीनियर तक का सफर कैसा रहा?
जवाब: यह सफर आसान नहीं था। सेक्टर-16 के गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल से दसवीं की। उस समय 11वीं व 12वीं कॉलेज से होता था। डीएवी कालेज से प्री-इंजीनियरिंग की। पेक में दाखिला मिल गया। वहां से सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की। शुरुआत के कुछ साल प्राइवेट नौकरी करनी पड़ी। इसके बाद वर्ष 1989 में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ज्वाइन किया। यहां आने के बाद कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम किया है। इनमें से धनास में बने 8848 फ्लैट्स, मलोया, सेक्टर-38 वेस्ट, विकास नगर और राम दरबार के फ्लैट्स हैं।
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राजीव सिंगला चंडीगढ़ के जीएमएसएसएस-16 से पढ़े हैं। इसके बाद उन्होंने पेक से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री ली। पढ़ाई के तुरंत बाद उन्हें दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (डीडीए) में सरकारी नौकरी का ऑफर मिला लेकिन चंडीगढ़ से इतना प्यार था कि उन्होंने वह सरकारी नौकरी छोड़ दी और चंडीगढ़ में ही प्राइवेट नौकरी ज्वाइन कर ली। पेश है उनसे बातचीत के कुछ अंश...
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सवाल: सरकारी स्कूल से चीफ इंजीनियर तक का सफर कैसा रहा?
जवाब: यह सफर आसान नहीं था। सेक्टर-16 के गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल से दसवीं की। उस समय 11वीं व 12वीं कॉलेज से होता था। डीएवी कालेज से प्री-इंजीनियरिंग की। पेक में दाखिला मिल गया। वहां से सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की। शुरुआत के कुछ साल प्राइवेट नौकरी करनी पड़ी। इसके बाद वर्ष 1989 में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ज्वाइन किया। यहां आने के बाद कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम किया है। इनमें से धनास में बने 8848 फ्लैट्स, मलोया, सेक्टर-38 वेस्ट, विकास नगर और राम दरबार के फ्लैट्स हैं।
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सवाल: शहर के बदलते स्वरूप को किस तरह से देखते हैं?
जवाब: चंडीगढ़ बहुत तेजी से बदल रहा है। शहर में हो रहे अवैध निर्माण शहर की सूरत को खराब कर रहे हैं। इन्हें रोकना बहुत जरूरी है। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त है और जरूरत पड़ने पर और सख्ती बरती जा सकती है। क्योंकि अगर समय रहते इन अवैध निर्माणों को नहीं रोका गया तो वह दिन दूर नहीं जब चंडीगढ़ से ‘सिटी ब्यूटीफुल’ का तमगा छिन जाएगा। हालांकि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में कई तरह के काम हो रहे हैं, जो शहर के भविष्य को बचाने में यकीनन मदद करेगा।
सवाल: वर्तमान की कौन सी समस्या भविष्य में लिए चुनौती बन सकती है?
जवाब: शहर की सड़कों पर तेजी से बढ़ती कारों की संख्या। भविष्य में चंडीगढ़ के लिए ट्रैफिक कंजेशन एक बहुत बड़ी चुनौती हो सकती है। शहर में चाहे मोनो रेल चले या मेट्रो रेल चले लेकिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट को और सुगम बनाना होगा, ताकि सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों की संख्या में कमी आए। कुछ ऐसे कदम उठाने की जरूरत है, जिनसे लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने में सहज महसूस कर सकें। शहर में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों को प्रमोट करने की जरूरत है। शहर में बने साइकिल ट्रैक काफी अच्छे हैं। लोगों को अब अपनी गाड़ियां छोड़ साइकिल चलाना शुरू कर देना चाहिए।
जवाब: चंडीगढ़ बहुत तेजी से बदल रहा है। शहर में हो रहे अवैध निर्माण शहर की सूरत को खराब कर रहे हैं। इन्हें रोकना बहुत जरूरी है। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त है और जरूरत पड़ने पर और सख्ती बरती जा सकती है। क्योंकि अगर समय रहते इन अवैध निर्माणों को नहीं रोका गया तो वह दिन दूर नहीं जब चंडीगढ़ से ‘सिटी ब्यूटीफुल’ का तमगा छिन जाएगा। हालांकि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में कई तरह के काम हो रहे हैं, जो शहर के भविष्य को बचाने में यकीनन मदद करेगा।
सवाल: वर्तमान की कौन सी समस्या भविष्य में लिए चुनौती बन सकती है?
जवाब: शहर की सड़कों पर तेजी से बढ़ती कारों की संख्या। भविष्य में चंडीगढ़ के लिए ट्रैफिक कंजेशन एक बहुत बड़ी चुनौती हो सकती है। शहर में चाहे मोनो रेल चले या मेट्रो रेल चले लेकिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट को और सुगम बनाना होगा, ताकि सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों की संख्या में कमी आए। कुछ ऐसे कदम उठाने की जरूरत है, जिनसे लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने में सहज महसूस कर सकें। शहर में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों को प्रमोट करने की जरूरत है। शहर में बने साइकिल ट्रैक काफी अच्छे हैं। लोगों को अब अपनी गाड़ियां छोड़ साइकिल चलाना शुरू कर देना चाहिए।
सवाल: खुद को फिट कैसे रखते हैं?
जवाब: खुद को फिट रखने के लिए मैं ज्यादा मेहनत नहीं करता। अच्छा खाना, थोड़ी बहुत कसरत मेरे लिए काफी है। मेरी सलाह है कि रात में खाना कम खाना चाहिए। इसके अलावा एक समय की सैर करने पर व्यक्ति फिट रह सकता है।
सवाल: अगर इंजीनियर नहीं होते तो क्या होते?
जवाब: अगर मैं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नहीं होता तो यकीनन मैं एक स्पोर्ट्समैन होता। कॉलेज के समय साइक्लिंग, स्वीमिंग में कई मेडल जीते हैं क्योंकि उस वक्त दो ही क्षेत्र काफी लोकप्रिय थे, जिनमें से एक डॉक्टर और दूसरा इंजीनियरिंग था। दसवीं के बाद नॉन मेडिकल क्षेत्र को चुना। इस वजह से इंजीनियर में ही आगे की पढ़ाई की।
जवाब: खुद को फिट रखने के लिए मैं ज्यादा मेहनत नहीं करता। अच्छा खाना, थोड़ी बहुत कसरत मेरे लिए काफी है। मेरी सलाह है कि रात में खाना कम खाना चाहिए। इसके अलावा एक समय की सैर करने पर व्यक्ति फिट रह सकता है।
सवाल: अगर इंजीनियर नहीं होते तो क्या होते?
जवाब: अगर मैं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नहीं होता तो यकीनन मैं एक स्पोर्ट्समैन होता। कॉलेज के समय साइक्लिंग, स्वीमिंग में कई मेडल जीते हैं क्योंकि उस वक्त दो ही क्षेत्र काफी लोकप्रिय थे, जिनमें से एक डॉक्टर और दूसरा इंजीनियरिंग था। दसवीं के बाद नॉन मेडिकल क्षेत्र को चुना। इस वजह से इंजीनियर में ही आगे की पढ़ाई की।