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जज्बे को सलामः पहले बचाया बचपन, अब तनावग्रस्त युवाओं को दिखा रहे हैं नई राह

Mon, 18 Nov 2019 11:30 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 18 Nov 2019 11:30 AM IST
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success story of motivational speaker girish anand
गिरीश आनंद - फोटो : अमर उजाला
करीब 27 साल तक कारपोरेट जगत में काम किया। एक मंजिल तक पहुंचा। अच्छा पैकेज व सुविधाएं मिल रही थीं लेकिन महसूस हुआ कि अब समय आ गया है कि कुछ काम समाज के लिए भी किया जाए। शुरुआत कहां से हो, इसे लेकर थोड़ी दुविधा थी। हालांकि शुरू से ही मैं अच्छा वक्ता था। ऐसे में परिवार व दोस्तों से राय ली।
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इसके बाद मैंने मोटिवेशनल स्पीकर, ट्रेनर व मैनेजमेंट गुरु बनने की राह चुनी। यह कहानी है गिरीश आनंद की। जो इस पथ पर चलते हुए उत्तरी भारत में बचपन बचाने से लेकर पढ़े-लिखे डिप्रेशन में डूबे सैकड़ों लोगों को रोजाना राह दिखा रहे हैं। इसके अलावा एक जागरूक नागरिक होने के चलते वह कुछ गलत होता देख तुरंत उसे संबंधित अथारिटी तक पहुंचाते हैं।
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शिक्षकों की कमियां सुधारीं, क्लासरूम का फोबिया किया खत्म
गिरीश आनंद का कहना है कि काफी समय पहले उनके ध्यान में आया कि आज देश का बचपन बिल्कुल सुरक्षित नहीं है। देश में चाइल्ड एब्यूज काफी बढ़ गया है। यह समस्या हर वर्ग के बच्चों को फेस करनी पड़ रही है। इसके लिए उन्होंने काफी रिसर्च के बाद एक प्रोग्राम बनाया जिसमें बच्चों की भावुकता को छेड़े बिना उनकी मासूमियत को बचाया जा सके।
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इसके बाद उन्होंने बच्चों को गुड टच और बैड टच के बारे में जागरूक किया। फिर उन्होंने शिक्षकों की कमियां सुधारने व क्लासरूम को रुचिकर बनाने की दिशा में काम करते हुए क्लासरूम फोबिया भी खत्म किया।

युवा पीढ़ी के मन से इंटरव्यू का डर किया खत्म

गिरीश ने बताया कि देश के युवाओं में टैलेंट की कमी नहीं है लेकिन युवाओं को अभी तक भी सही दिशा नहीं मिल रही है। इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ता है। इस चीज को उन्होंने कारपोरेट जगत में रहते ही समझ लिया था। इसके बाद उन्होंने ‘युवाओं को करियर कैसे चुनें और उनके माता पिता कैसे मददगार बनें’ विषय पर काम किया।

रिज्यूम बनाने और इंटरव्यू फेस करने के लिए प्रोग्राम बनाया। इसके लिए उन्होंने वीडियो और नोट्स बनाए। इन्हें सोशल मीडिया पर अपलोड किया है ताकि युवा इस चीज का फायदा उठा पाए। इतना ही नहीं अपना यू-ट्यूब चैनल तक बनाया हुआ है। रोजाना उन्हें सैकड़ों कॉल और मैसेज आते हैं। इससे उन्हें पता चलता है कि उनके प्रयास रंग ला रहे हैं।

पर्यावरण संभाल के लिए लगा रहे पौधे
गिरीश आनंद ने कहा कि वह समाजसेवी होने के साथ ही एक जागरूक नागरिक हैं। वह पौधे लगाते हीं नहीं, उनकी देखभाल भी करते हैं। वह हमेशा ही उन एरिया में पौधे लगाते हैं, जहां जंगल कम हो रहे हैं। वह कुछ भी गलत देखते है तो तुरंत उसकी फोटो क्लिक करके संबंधित विभाग या मंत्री तक अपनी बात पहुंचाते हैं। नतीजा यह है कि पर्दे के पीछे रहकर वह ऐसे काम कर जाते हैं जो लोग सोच भी नहीं सकते।

आईएएस से लेकर इंजीनियर तक को दे चुके हैं ट्रेनिंग
गिरीश आनंद ने कहा कि वह अब तक कई संस्थानों में विभिन्न भविष्यों पर सेशन कर चुके हैं। वह आईएएस से लेकर इंजीनियरों तक को ट्रेंड कर चुके हैं। जिंदगी में हर रोज व्यक्ति सीखता है। ऐसे में हम दूसरों से सीखने की कोशिश करते हैं। वह अक्सर स्कूलों व कॉलेजों में फ्री में सेशन करते हैं जहां पर जरूरतमंद बच्चे पढ़ाई करते हैं। उन्होंने युवाओं को सीख दी कि समय का पालन करो, तय समय पर काम करो क्योंकि इससे ही जीत संभव है।
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