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जज्बे को सलामः कभी साढ़े चार सौ रुपये की नौकरी करते थे, आज 400 को दे रहे हैं रोजगार

Wed, 17 Jun 2020 01:11 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 17 Jun 2020 01:11 PM IST
सार

  • दस साल के संघर्ष के बाद मिली सफलता, समाजसेवा में भी तत्पर हैं रूबी
  • सन 1993 में शुरू की थी दवा बनाने वाली रेमेड फार्मास्युटिकल्स कंपनी

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Success Story of Enterprenure Tarsem Kumar Ruby
तरसेम कुमार रूबी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कभी साढ़े चार सौ रुपये की नौकरी करने वाले प्रसिद्ध उद्योगपति तरसेम कुमार रूबी आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। कड़ी मेहनत और लगन ने उन्हें फर्श से अर्श तक पहुंचा दिया। उनके इस लंबे सफर की कहानी काफी दर्द भरी है। जिस समाज ने उन्हें मान-सम्मान दिया उसके लिए वे कुछ कर गुजरने को हमेशा तत्पर रहते हैं।
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पंजाब के जिला श्री मुक्तसर साहिब से तरसेम कुमार रूबी परिवार के साथ 1984 में यहां आ गए। इसके बाद सन् 1990 में उन्होंने सफलता के लिए अपने कदम को आगे बढ़ाया। सबसे पहले उन्होंने साढ़े चार सौ रुपये की नौकरी की। लेकिन जब खर्चा पूरा नहीं हुआ तो उसे छोड़ दिया। इसके बाद तरसेम कुमार रूबी ने एक इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्री में काम शुरू किया।
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किस्मत ने साथ नहीं दिया और वह इस कार्य में असफल साबित हो गए। लेकिन उन्होंने अपना हौसला नहीं छोड़ा। परिवार के सदस्यों ने भी पूरा साथ दिया। सन 1993 में उन्होंने रेमेड फार्मास्युटिकल्स कंपनी शुरू की, जो आज देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी अपना अलग पहचान बना चुकी है। उनकी इस कंपनी में करीब 100 लोग नौकरी कर रहे हैं। उनके मुताबिक कोट बिल्ला में उनका फार्म हाउस है, जहां से खेतीबाड़ी भी करते हैं।
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ओजस जैसा दूसरा कोई अस्पताल नहीं

प्रसिद्ध उद्योगपति तरसेम कुमार रूबी ने बुलंदी को तो छू लिया लेकिन वह समाजसेवा में भी सक्रिय रहे। इसी को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने सन 2015 में ओजस अस्पताल की नींव रखा, जिसके वह फाउंडर डायरेक्टर हैं। रूबी का दावा है कि ओजस जैसा दूसरा कोई अस्पताल नहीं है। इसमें माहिर डॉक्टरों की टीम के अलावा करीब तीन सौ लोगों का स्टाफ तैनात है। जो लोगों की सेवा में जुटा हुआ है।

300 बच्चों की जरूरतों को पूरा कर रहे
समाजसेवी तरसेम कुमार रूबी ने बताया कि वह वर्तमान में करीब तीन सौ बच्चों की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि चाहे करियर बनाने की बात हो या फिर शिक्षा की। वह बच्चों की पूरी मदद कर रहे हैं। इसके अलावा वह हमारी कक्षा नामक संस्था के प्रधान हैं और सात साल से सेवा कर रहे हैं। वह रोटरी क्लब के गवर्नर भी रह चुके हैं।
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