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बेमिसालः जगजीत सिंह हों या जाकिर हुसैन, सभी को इनके हारमोनियम ने दिलाई पहचान

Wed, 20 Jun 2018 11:03 AM IST
रूबी सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़
रूबी सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 20 Jun 2018 11:03 AM IST
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shimla music house owner mohinder singh profile story
मोहिंदर सिंह
मिलिए एक ऐसे शख्स से, जिनके कायल जगजीत सिंह से लेकर जाकिर हुसैन तक हैं। क्योंकि इनके बनाए हारमोनियम ने ही उनके सुरों में जान डाली। बात 2011 की है, गजल सम्राट जगजीत सिंह चंडीगढ़ में कार्यक्रम के लिए आए थे। कार्यक्रम टैगोर थियेटर में होना था। वे हमेशा अपने ही हारमोनियम से लाइव परफार्मेंस देते थे। लेकिन अचानक परफार्मेंस से कुछ घंटे पहले ही उनका हारमोनियम खराब हो गया। जिसके बिना वे परफार्म करने को राजी नहीं हो रहे थे।
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ऐसे में उनके करीबी दोस्त एवं सीनियर पत्रकार एसडी शर्मा ने मोहिंदर सिंह के पास जाना बेहतर समझा। क्योंकि मोहिंदर सिंह के हाथों में मानों वाद्य यंत्र ठीक करने का जादू था। वे तुरंत हारमोनियम को लेकर उनकी शॉप शिमला म्यूजिक हाउस सेक्टर-17 पहुंचे। दोस्ती थी तो मोहिंदर सिंह ने एसडी शर्मा को मना नहीं किया। हंसते हुए उन्होंने गजल गायक के हारमोनियम को एक शर्त पर ठीक करने को कहा। वह शर्त थी गजल गायक जगजीत सिंह के साथ एक फोटो खिंचवाने की।
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दो घंटे में उन्होंने हारमोनियम ठीक करके वापस कर दिया और इस हारमोनियम से ही गायक ने टैगोर थियेटर सेक्टर-18 में अपनी लाइव परफार्मेंस से हमेशा की तरह श्रोताओं का दिल जीता था। सिटी में गायक की यह आखिरी लाइव परफार्मेंस थीं। हारमोनियम के ठीक होने पर गायक इतने खुश हुए कि उन्होंने मोहिंदर सिंह को चाय पर आमंत्रित किया। साथ ही ऐसे माहिर हारमोनियम टूनर को मुंबई चलने का तक ऑफर दे दिया। कुछ इस तरह के किस्से मोहिंदर सिंह के नाम थे।
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वे नार्थ इंडिया के बेस्ट हारमोनियम टूनर के नाम से मशहूर थे। मोहिंदर सिंह सिटी की पहली एवं शिमला से ही मशहूर वाद्य यंत्र सुधारने एवं बेचने वाली शॉप शिमला म्यूजिक हाउस के मालिक थे। उन्होंने वाद्य यंत्र को सुधारने की कला अपने पिता ज्वाला सिंह से शिमला में सीखीं। लेकिन वे 1960 में अपने परिवार के साथ चंडीगढ़ आ गए। वे गायक भी थे। 21 जून को होने वाले वर्ल्ड म्यूजिक डे पर शिमला म्यूजिक हाउस सेक्टर-27 के कई रोचक किस्से उनके बेटे हैरी गिल ने साझा किए। मोहिंदर सिंह का निधन 2013 में हो गया।

जाकिर हुसैन से लेकर गुलाम अली सब थे इनके कायल
पिछले 80 सालों से इनकी तीन पीढ़ियां नार्थ इंडिया के म्यूजिशियन के वाद्य यंत्र को चंद मिनटों में ठीक करने के लिए मशहूर थे। वे हर वाद्य यंत्र को बजाने में भी माहिर थे। इनकी सिटी की पहली म्यूजिक शॉप 1964 से है, जहां इनकी कला के मशहूर संगीतकार जाकिर हुसैन से लेकर गुलाम अली, गुरदास मान दारा सिंह, हंसराज हंस, सुखशिंदर शिंदा, सतिंदर सरताज से लेकर नार्थ इंडिया के मशहूर गायक गायिका, म्यूजिशियन इनके कायल हैं।

शॉप में हर किस्म के हैं वाद्य यंत्र
उनके बेटे हैरी गिल ने बताया कि इन शॉप में बांसुरी, वेणु, बीन, मशक , संतूर, सरोद, सुरबहार, तूंबी, मोहन वीणा, नकुल वीणा, दोतार, सरस्वती वीणा, लोक सारंगी, तार शहनाई, मंजीरा, घुंगरू, चिमटा, शंकरजंग, डमरू, ढोलक, डुग्गी, मृदंगम

पखावज, पंचमुख वाद्यम, पुंग, तबला तरंग, ढोल, ढोली और उदुकै शामिल हैं।

इनके बनाए हारमोनियम की है नार्थ इंडिया में सप्लाई
शिमला म्यूजिक हाउस अपने हारमोनियम के लिए मशहूर है। वे इनको बनाते हैं, जो नार्थ इंडिया में स्कूल से लेकर कालेज, यूनिवर्सिटी एवं पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री से लेकर बॉलीवुड तक सप्लाई किए जाते हैं। इनके पास 150 रुपये की बांसुरी से लेकर 35 हजार का हारमोनियम उपलब्ध है।
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