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एचसी अरोड़ा: सामाजिक-कानूनी लड़ाई के लिए तैयार रहते हैं हमेशा, अब तक 400 पीआईएल

Fri, 29 Jun 2018 01:48 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 29 Jun 2018 01:48 PM IST
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punjab haryana highcourt advocate hc arora success story
एडवोकेट एचसी अरोड़ा
मिलिए एक ऐसी शख्सियत से, जो सामाजिक और कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए हमेशा तैयार रहती है। वे अब तक 400 से ज्यादा पीआईएल दायर कर चुके हैं। एसिड अटैक के मामलों में पीड़िताओं को न्याय और मुआवजा दिलाने का मामला हो या ऐसे केसों के लिए पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में विशेष नीति बनाने का मुद्दा, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट एचसी अरोड़ा हमेशा सामाजिक और कानूनी लड़ाई के लिए तत्पर रहे हैं।
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उनके प्रयास का ही परिणाम रहा है कि पंजाब-हरियाणा और यूटी में एसिड अटैक पीड़िताओं के लिए मुआवजा और उनके पुनर्वास के लिए सरकारों को विशेष नीति बनानी पड़ी। उनकी बदौलत ही आज हजारों एसिड अटैक पीड़िताओं को सरकार की ओर से मुआवजा मिल रहा है और समाज में एक पहचान। ऐसे अनगिनत सामाजिक मुद्दे हैं, जिनमें एचसी अरोड़ा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर उठाया और सरकारों को उन पर कानून बनाना पड़ा और उसे राज्यभर में लागू करवाना पड़ा। अरोड़ा अब तक सामाजिक और जनहित से जुड़े मामलों में 400 से ज्यादा पीआईएल (जनहित याचिकाएं) दायर कर चुके हैं।
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जन्म और शिक्षा
एचसी अरोड़ा का जन्म पंजाब के अबोहर में हुआ। स्कूली शिक्षा उन्होंने श्री मुक्तसर साहिब से की। इसके बाद बीएससी फाजिल्का से। 20 साल तक न्यू बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी की। नौकरी के दौरान ही 1989 में श्रीगंगानगर, राजस्थान से लॉ की पढ़ाई की। समाज के लिए कुछ न कर पाने की कसक कई वर्षों तक मन में दबी रही। यहीं सोच कर 1992 में नौकरी छोड़ दी और 1993 में चंडीगढ़ आ गए।
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कैरियर
मार्च 1993 में एचसी अरोड़ा ने चंडीगढ़ आने के बाद पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में आकर प्रैक्टिस शुरू की। जनहित मुद्दे और समाज से जुड़े मामलों में पीआईएल दायर की। समाज के लिए कुछ करने की कसक यहां आकर पूरी होने लगी और इसे एक लक्ष्य बना लिया। एसिड हमले की पीड़िताओं के सामाजिक तिरस्कार को देखकर 2012 में उनके हक और न्याय के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। इस पर हाईकोर्ट ने दोनों राज्यों और चंडीगढ़ को विशेष नीति बनाकर पीड़िताओं को मुआवजा और अन्य हक देने के आदेश दिए। इस पर हजारों एसिड हमले की पीड़िताओं को राहत मिली।

इन कामों के लिए रहे चर्चा में
- रेप और हत्या के दोषियों को जेल में ‘ए’, ‘बी’ क्लास सुविधाएं मिलने पर सवाल उठाते हुए जनहित याचिका दायर की। दुराचार और हत्या के दोषियों को जेल में आम कैदियों की तरह रखने के आदेश हुए।

- पंजाब-हरियाणा, यूटी के स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग से टॉयलेट, सेफ रूम, पीने के लिए फिल्टर का पानी जैसी सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए जनहित याचिका दायर की।
- पंजाब में शहीदों के स्मारक बनाने और उनकी सही देखभाल के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी।
- शहीद करतार सिंह सराभा की मेमोरियल बनवाया।
- शहीद सुखदेव के पैतृक घर पर कब्जा करके बैठे किराएदार से कब्जा हटवाया और वहां शहीद स्मारक बनवाया।
- 1984 के दंगों में जान गंवाने वाले लोगों के परिवार को ट्रस्ट बनाकर उस वक्त 10-10 हजार रुपये मुआवजा दिया।
- भ्रष्टाचार, अन्याय और सरकारों की लापरवाही या अनदेखी के खिलाफ हाईकोर्ट में कई जनहित याचिकाएं दायर कीं।
- ज्वलंत मुद्दों और उनके समाधान, न्यायपालिका में मौलिक सुधार समेत शहीदों पर कई किताबें लिख चुके हैं।
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