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हरेंद्र गुप्ताः पॉकेट मनी से खेलते हैं, कैडी से प्रोफेशनल गोल्फर बनने का सफर

Fri, 04 Nov 2016 04:47 PM IST
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 04 Nov 2016 04:47 PM IST
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professional golfer harendra gupta of chandigarh, life profile and secrets
कैडी से प्रोफेशनल गोल्फर बने हरेंद्र गुप्ता
मिलिए एक ऐसे शख्स से, जो कभी कैडी बनकर खिलाड़ियों की किट कंधे पर उठाकर चलता था और आज प्रोफेशन गोल्फ चैम्पियन है। ये हैं चंडीगढ़ के हरेंद्र गुप्ता, जिनका कैडी से चैंपियन बनने तक का सफर आसान नही रहा। इसके लिए वर्षों मेहनत की, तब जाकर यह मुकाम हासिल किया। हरेंद्र चंडीगढ़ गोल्फ क्लब में 1990 में कैडी का काम करता था।
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इस दौरान उसे गोल्फ की बारीकियां समझ आने लगीं। कभी कभी तो वह खेलने वालों को यह भी बता देता कि शॉट किस एंगल से लगाया जाएगा। हरेंद्र खुद भी समय निकालकर खिलाड़ियों की स्टिक लेकर शॉट्स लगाने का अभ्यास करता था। हरेंद्र को कैडी के काम में एक दिन के 50 रूपये मिलते थे। गरीब परिवार से संबध रखने वाले हरेंद्र ने रोजाना मिलने वाले 50 रूपये से जोड़ने शुरू कर दिए और एक दिन उसने सात हजार की गोल्फ किट खरीद ली।
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क्लब में खेलने वाले नितीन मित्तल ने उसकी मदद की और वह क्लब में ही खेलने लगा। यहां उसने घंटों मेहनत की। उसकी मेहनत रंग लाई, जब उसने जूनियर एमेच्योर गोल्फ टूर्नामेंट जीता। इसके बाद इसने कभी पीछे मुड़कर नही देखा। पहली बार जब वह पीजीआईटी चैंपयन बने तो उन कैडियों के सामने उसे सम्मनित किया गया, जिनके साथ कभी उसने काम किया था।
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जीव मिल्खा सिंह प्ररेणा के स्त्रोत- हरेंद्र ने बताया कि शहर के गोल्फर जीव मिल्खा सिंह उनकी प्ररेणा के स्त्रोत है। हरेंद्र ने बताया कि जीव जब गोल्फ क्लब में खेलने आते तो वह मुझे अपने साथ खिलाते। मुझे उनके खेल से काफी कुछ सीखने को मिला।


स्पॉन्सर की कमी- हरेंद्र ने बताया कि मेरे पास कोई स्पॉन्सर नही हैं। इसलिए कई बार बेहतर टूर्नामेंट में खेलने से चूक जाता हूं। मैं जब भी किसी गोल्फ टूर्नामेंट में पोजीशन या फिर जीतता हूं तो उससे मिलनी वाली धनराशि को अगले आने वाले टूर्नामेंट के खर्चे में लगा देता हूं।
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