{"_id":"5d510eca8ebc3e6c935d00e7","slug":"neurosurgeon-dr-rajesh-chhabra-success-story","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"हुनरः डॉ. राजेश छाबड़ा से सीखें मरीज और डॉक्टर के बीच रिश्ते बनाना, न्यूरोसर्जरी में जाना-माना नाम","category":{"title":"Bashindey","title_hn":"बाशिंदे ","slug":"bashindey"}}
हुनरः डॉ. राजेश छाबड़ा से सीखें मरीज और डॉक्टर के बीच रिश्ते बनाना, न्यूरोसर्जरी में जाना-माना नाम
Mon, 12 Aug 2019 12:32 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 12 Aug 2019 12:32 PM IST
विज्ञापन
डॉ. राजेश छाबड़ा
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में पीजीआई के प्रोफेसर राजेश छाबड़ा का नाम जाना-पहचाना है। ब्रेन ट्यूमर व स्पाइन सर्जरी में उनका कोई सानी नहीं। सौम्य स्वभाव के धनी डा. छाबड़ा के बारे में पेशेंट कहते हैं कि मरीजों के लिए वह भगवान से कम नहीं है। मरीजों का दर्द वह बखूबी समझते हैं। इलाज करने से पहले वह मरीज से ऐसा रिश्ता बनाते हैं कि मरीज का तनाव अपने आप चला जाता है। शख्सियत में आज डा. छाबड़ा से बातचीत।
डॉक्टर बनने की इच्छा कैसे हुई
पहले ज्यादा विकल्प नहीं होते थे। डॉक्टर बन जाओ या इंजीनियर। शहर में डा. जोशी नाम के एक एमडी डॉक्टर हुआ करते थे। उनका काफी रुतबा था। उपचार के लिए लंबी लाइन लगती थी। उनके प्रिस्क्रप्शन से ठीक होने के बाद मरीज उनकी तारीफ भी करते थे। उन्हें देखकर एक जिज्ञासा जागी। जब पीजीआई पहुंचे तो अहसास हुआ कि ये रास्ता मानवता की ओर जाता है। फिर इसी दिशा में काम करते चले गए।
विज्ञापन
डॉक्टर बनने की इच्छा कैसे हुई
पहले ज्यादा विकल्प नहीं होते थे। डॉक्टर बन जाओ या इंजीनियर। शहर में डा. जोशी नाम के एक एमडी डॉक्टर हुआ करते थे। उनका काफी रुतबा था। उपचार के लिए लंबी लाइन लगती थी। उनके प्रिस्क्रप्शन से ठीक होने के बाद मरीज उनकी तारीफ भी करते थे। उन्हें देखकर एक जिज्ञासा जागी। जब पीजीआई पहुंचे तो अहसास हुआ कि ये रास्ता मानवता की ओर जाता है। फिर इसी दिशा में काम करते चले गए।
विज्ञापन
आपकी नजर में हेल्थ केयर सेक्टर का सबसे बड़ा चैलेंज क्या है
डॉक्टरों का वितरण ठीक ढंग से नहीं है। एक शहर में तो अच्छे डॉक्टर हैं तो दूसरी जगह बिल्कुल नहीं हैं। जब सब जगह क्वालिटी के डॉक्टर होंगे तो नीचे से लेकर सभी को एक क्वालिटी केयर मिल पाएगी। इसके लिए यह भी देखना होगा कि डॉक्टर जब किसी शहर में जाता है तो उसके लिए वहां पर फेसल्टीज भी होनी चाहिए। तभी डॉक्टर टिकेगा। हालांकि पिछले कुछ सालों से इस पर काम हुआ है, लेकिन अब भी काफी बाकी है।
चंडीगढ़ के बारे में क्या राय है?
यह एक ऐसा शहर है कि जहां रहने के बाद जब किसी दूसरे शहर में जाते हैं तो ऐसा लगता है कि उस शहर में दिक्कते ही दिक्कतें हैं। यह एक मॉडल सिटी है। यहां पर हेल्थ, एजुकेशन का हब है। प्रदूषण मुक्त शहर है। हालांकि कुछ परेशानियां बढ़ी हैं। पिछले दिनों एक युवती की एक्सीडेंट में मौत हो गई। इस खबर से काफी दुखी हुआ। ट्रैफिक सेंस पर अब काम करने की जरूरत है।
चंडीगढ़ के बारे में क्या राय है?
यह एक ऐसा शहर है कि जहां रहने के बाद जब किसी दूसरे शहर में जाते हैं तो ऐसा लगता है कि उस शहर में दिक्कते ही दिक्कतें हैं। यह एक मॉडल सिटी है। यहां पर हेल्थ, एजुकेशन का हब है। प्रदूषण मुक्त शहर है। हालांकि कुछ परेशानियां बढ़ी हैं। पिछले दिनों एक युवती की एक्सीडेंट में मौत हो गई। इस खबर से काफी दुखी हुआ। ट्रैफिक सेंस पर अब काम करने की जरूरत है।
आपकी फिटनेस का क्या राज है
डाइट और वॉक। बैलेंस डाइट लेता हूं। अच्छी डाइट की आदत बचपन से पड़ी है। मेरा मानना है कि बच्चे को बचपन से अच्छी डाइट आफर करनी चाहिए। यह आदत धीरे-धीरे आपकी सोच में बैठ जाती है। आप जब भी कहीं बाहर खाना खाने जाएंगे तो आपकी सबसे पहली नजर हेल्दी डाइट पर पड़ेगी। मैं रोजाना 40 मिनट की वॉक भी करता हूं।
कभी किसी बात को लेकर दिल उदास होता हो
उदासी की ओर से बहुत कम जाता हूं। जो मिला है,उसी में खुश रहता हूं। सुख-दुख आपके नजरिए से आते हैं। छोटी-छोटी खुशियां मिलकर बड़ी बन सकती है, जबकि छोटे दुख पहाड़ बन जाते हैं। जो व्यक्ति पर्सनल बेनाफिट के बारे में कम सोचता है और काम को इंज्वाय करता है। वही सबसे सुखी रहता है। नकारात्मक बातों से बचना चाहिए।
कभी किसी बात को लेकर दिल उदास होता हो
उदासी की ओर से बहुत कम जाता हूं। जो मिला है,उसी में खुश रहता हूं। सुख-दुख आपके नजरिए से आते हैं। छोटी-छोटी खुशियां मिलकर बड़ी बन सकती है, जबकि छोटे दुख पहाड़ बन जाते हैं। जो व्यक्ति पर्सनल बेनाफिट के बारे में कम सोचता है और काम को इंज्वाय करता है। वही सबसे सुखी रहता है। नकारात्मक बातों से बचना चाहिए।