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इस शख्स को 12 साल से बेहद अनोखा शौक, इंटरव्यू में बताया कि कैसे लगा ये?
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 30 Jan 2017 04:15 PM IST
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बर्ड वाचर नवतेज सिंह
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इस शख्स से मिलिए, जिन्हें पिछले 12 साल से बेहद अनोखा शौक है। इसके बारे में जानकर आपको अच्छा लगेगा, लेकिन हैरान भी होंगे आप। पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के माइक्रो फिल्म आपरेटर नवतेज सिंह कहते हैं कि जब से बर्ड वाचिंग शुरू की है, तभी से उन्हें सच्चे दोस्त मिलने लगे हैं। शुभचिंतकों की लिस्ट बढ़ गई है। दोस्तों में देश के अलग-अगल कोनों में रहने वाले लोग शामिल हैं।
वे पिछले दस से 12 सालों से बर्ड वाचिंग कर रहे हैं। अब तक पक्षियों की 200 से ज्यादा प्रजातियों के फोटो क्लिक कर चुके हैं। इनमें कुछ फोटो ऐसी हैं, जिसको पहली बार क्लिक करने का रिकार्ड उनको ही जाता है। बर्ड वाचिंग के अलावा वे तितलियों की बारीकियों को जानने के काफी शौकीन हैं। वे अब तक तितलियों की 83 प्रजातियों को अपने कैमरे से कैद कर चुके हैं। कई तितलियों की प्रजातियों को खोजने का श्रेय भी उनको जाता है।
हरिके वेटलैंड गए, तब से दिलचस्पी जागी
नवतेज सिंह बताते हैं कि वे बचपन से ही नेचर प्रेमी थे। शौकिया फोटो भी उतार लेते थे, लेकिन बर्ड वाचिंग में दिलचस्पी फिरोजपुर के हरिके वैटलैंड जाने पर हुई। कुछ साल पहले पीयू के रिसर्च स्कालर डा. ओंकार सिंह पंजाब के पक्षियों पर किताब लिख रहे थे। उन्हें एक फोटोग्राफर चाहिए था। जब ओंकार सिंह ने यह बात नवतेज से शेयर की तो उन्होंने साथ में चलने की हामी भर दी।
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जब वे हरिके पहुंचे तो मेहमान पक्षियों को देखकर हैरान हो गए। खूबसूरत पक्षियों के रंग और उनके हाव-भव नवतेज के दिलो-दिमाग में छा गए। उसके बाद से उनमें बर्ड वाचिंग का झुकाव बढ़ने लगा।
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वे पिछले दस से 12 सालों से बर्ड वाचिंग कर रहे हैं। अब तक पक्षियों की 200 से ज्यादा प्रजातियों के फोटो क्लिक कर चुके हैं। इनमें कुछ फोटो ऐसी हैं, जिसको पहली बार क्लिक करने का रिकार्ड उनको ही जाता है। बर्ड वाचिंग के अलावा वे तितलियों की बारीकियों को जानने के काफी शौकीन हैं। वे अब तक तितलियों की 83 प्रजातियों को अपने कैमरे से कैद कर चुके हैं। कई तितलियों की प्रजातियों को खोजने का श्रेय भी उनको जाता है।
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हरिके वेटलैंड गए, तब से दिलचस्पी जागी
नवतेज सिंह बताते हैं कि वे बचपन से ही नेचर प्रेमी थे। शौकिया फोटो भी उतार लेते थे, लेकिन बर्ड वाचिंग में दिलचस्पी फिरोजपुर के हरिके वैटलैंड जाने पर हुई। कुछ साल पहले पीयू के रिसर्च स्कालर डा. ओंकार सिंह पंजाब के पक्षियों पर किताब लिख रहे थे। उन्हें एक फोटोग्राफर चाहिए था। जब ओंकार सिंह ने यह बात नवतेज से शेयर की तो उन्होंने साथ में चलने की हामी भर दी।
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जब वे हरिके पहुंचे तो मेहमान पक्षियों को देखकर हैरान हो गए। खूबसूरत पक्षियों के रंग और उनके हाव-भव नवतेज के दिलो-दिमाग में छा गए। उसके बाद से उनमें बर्ड वाचिंग का झुकाव बढ़ने लगा।
पीयू और धनास लेक से तलाशे कई पक्षी
सुखना लेक पर पहुंचे विदेशी परिंदे
पीयू के कई घने पेड़ पक्षियों के पनाहगाह हैं, जो नवतेज की तेज नजर से नहीं बच पाए। उन्होंने पीयू से ही ओरिंटलपाइड हार्न बिल, ब्राउन हाक आउल, शाहीन फैल्कॉन की फोटो क्लिक की, जबकि धनास की लेक से फेरुजीनियस डक की। उनके मुताबिक ओरिएंटल पाइड हार्नबिल लोकल प्रवासी पक्षी है। पहले पीयू में ये सिर्फ दो थी, लेकिन अब इनकी संख्या चार पहुंच गई है। इसका मतलब है कि हार्नबिल ने अब अपना ठिकाना चंडीगढ़ में ही बना लिया है।
स्कूलों में करते हैं नेचर को प्रमोट
नवतेज सिंह के नेचर प्रेम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे रेगुलर स्कूल, कालेज व विभिन्न आर्गनाइजेशन में समय-समय पर एग्जीबिशन और वर्कशॉप लगाते रहते हैं। अपने मित्र अरुण बंसल के साथ मिलकर फेसबुक पर नेचुरल बायोडायवर्सिटी के नाम से पेज बनाया है। इसमें तीन हजार से ज्यादा फालोअर्स हैं। फेसबुक पेज पर लोग उन्हें मैसेज भेजते हैं कि उनके यहां पर वे एग्जिबिशन लगाएं। इस तरह के मैसेज उनके एकाउंट पर देश के अलग-अलग कोनों से आते हैं।
प्रशासन से है नाराजगी
नवतेज सिंह ने बताया कि सारंगपुर के पास एक पौंड था, जिसमें कई पक्षी बैठते थे। लेकिन कंस्ट्रक्शन की वजह से पौंड को बंद कर दिया गया। इससे वहां पर पक्षियों ने आना बंद करक दिया। धनास लेक में भी कई तरह के पक्षी आते हैं। लेक में प्रदूषित पानी डाला जा रहा है। सुखना लेक पर पहले काफी पक्षी आते थे, लेकिन वहां समय कम होता जा रहा है। बहुत सालों बाद इस बार पक्षी आए हैं।
पहले माइग्रेटरी पक्षियों का एरिया छिपा रहता था। इन पक्षियों को शांति पसंद है, लेकिन अब इतना शोर है कि वहां पर पक्षियों का आना कम हो रहा है। इस बारे में प्रशासन को सोचना चाहिए। प्रशासन सिर्फ डेवलपमेंट पर ही सोचता है, लेकिन पक्षियों के बारे में नहीं सोचता।
स्कूलों में करते हैं नेचर को प्रमोट
नवतेज सिंह के नेचर प्रेम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे रेगुलर स्कूल, कालेज व विभिन्न आर्गनाइजेशन में समय-समय पर एग्जीबिशन और वर्कशॉप लगाते रहते हैं। अपने मित्र अरुण बंसल के साथ मिलकर फेसबुक पर नेचुरल बायोडायवर्सिटी के नाम से पेज बनाया है। इसमें तीन हजार से ज्यादा फालोअर्स हैं। फेसबुक पेज पर लोग उन्हें मैसेज भेजते हैं कि उनके यहां पर वे एग्जिबिशन लगाएं। इस तरह के मैसेज उनके एकाउंट पर देश के अलग-अलग कोनों से आते हैं।
प्रशासन से है नाराजगी
नवतेज सिंह ने बताया कि सारंगपुर के पास एक पौंड था, जिसमें कई पक्षी बैठते थे। लेकिन कंस्ट्रक्शन की वजह से पौंड को बंद कर दिया गया। इससे वहां पर पक्षियों ने आना बंद करक दिया। धनास लेक में भी कई तरह के पक्षी आते हैं। लेक में प्रदूषित पानी डाला जा रहा है। सुखना लेक पर पहले काफी पक्षी आते थे, लेकिन वहां समय कम होता जा रहा है। बहुत सालों बाद इस बार पक्षी आए हैं।
पहले माइग्रेटरी पक्षियों का एरिया छिपा रहता था। इन पक्षियों को शांति पसंद है, लेकिन अब इतना शोर है कि वहां पर पक्षियों का आना कम हो रहा है। इस बारे में प्रशासन को सोचना चाहिए। प्रशासन सिर्फ डेवलपमेंट पर ही सोचता है, लेकिन पक्षियों के बारे में नहीं सोचता।