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विकास: 7वीं में सुने थे हरियाणवी गीत, आज गायकी के 4 अवार्ड नाम पर
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
Updated Wed, 29 Jun 2016 12:54 PM IST
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हरियाणवी रागनी सिंगर विकास
- फोटो : अमर उजाला
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7वीं कक्षा में पहली बार हरियाणवी गीत सुनने वाला विकास नहीं जानता था कि एक दिन वह हरियाणवी गायकी में अवार्डों की झड़ी लगा देगा। विकास को वर्ष 2012, 2014, 2015 के लिए जिला स्तर पर बेस्ट हरियाणवी गायक का अवॉर्ड मिल चुका है। वहीं वर्ष 2013 में राज्य स्तर पर बेस्ट लोकल गायकी का अवॉर्ड हासिल कर चुके हैं। इसके अलावा एक निजी चैनल पर उनके कार्यक्रम को लाइव टेलीकॉस्ट किया जा चुका है।
हिसार के गांव छोटी सातरोड़ निवासी विकास हरियाणवी और उनका ग्रुप पिछले तीन वर्षों से हरियाणवी संस्कृति को बचाने में जुटा है। यह ग्रुप हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और मुंबई जैसे महानगरों में स्टेज परफॉरमेंस दे चुका है। ग्रुप का एक ही उद्देश्य है कि लुप्त हो रही हरियाणवी संस्कृति को एक बार फिर से उसकी पहचान दिलाई जाए। इसके लिए विकास हरियाणवी को जिला स्तर और राज्य स्तर पर बेस्ट हरियाणवी गायक के अवॉर्ड भी मिल चुके हैं।
गांव में रागिनी प्रोग्राम देखकर हुए प्रेरित
विकास हरियाणवी ने बताया कि जब वो 7वीं कक्षा में पढ़ते थे तो एक दिन उनके गांव में रागिनी को लेकर एक कार्यक्रम हुआ, जिसमें कलाकारों द्वारा रागिनियों की प्रस्तुति देखकर विकास के मन भी रागिनी गाने की इच्छा हुई। बस तभी से विकास गांव में होने वाले रागिनी कार्यक्रमों के साथ आसपास शहरों में होने वाले कार्यक्रमों में जाने लगा।
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हरियाणवी गायकी सुनकर और रियाज कर बना कलाकार
विकास ने बताया कि वह बचपन से ही हरियाणवी गायकों की कैसेट सुनकार और उनके साथ ताल में ताल मिलाकर रियाज करता था। इससे उसकी गायकी को काफी मजबूती मिली। इसके साथ पढ़ाई के दौरान स्टेज परफॉरमेंस देने के बाद उसे अपनी गायकी पर काफी आत्मविश्वास आया। उसने बताया कि बीटेक की पढ़ाई शांति निकेतन कॉलेज से की। पढ़ाई के दौरान ही वर्ष 2013 में कुछ साथियों को साथ लेकर ग्रुप बनाया और इसके बाद लगातार पिछले तीन साल से वो महानगरों में भी हरियाणवी संस्कृति की छाप छोड़ रहे हैं।
घरवालों के सहयोग से मिली कामयाबी
विकास ने बताया कि उनके परिवार वाले भी उनका पूरा साथ देते हैं। उनके माता-पिता ने उनको गायकी के लिए कभी मना नहीं किया। इसी का परिणाम है कि वह गायकी में निरंतर गतिशील बने हुए हैं। विकास ने बताया कि वह रागिनी के साथ हास्य कविताओं, हरियाणवी गीतों आदि में भी निरंतर रुचि ले रहे हैं। और काफी गीत लिख भी चुके हैं। अगस्त माह में उनकी गायकी की एलबम आएगा। इसमें उनकी आवाज में 10 गीतों की रचना की गई है।
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हिसार के गांव छोटी सातरोड़ निवासी विकास हरियाणवी और उनका ग्रुप पिछले तीन वर्षों से हरियाणवी संस्कृति को बचाने में जुटा है। यह ग्रुप हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और मुंबई जैसे महानगरों में स्टेज परफॉरमेंस दे चुका है। ग्रुप का एक ही उद्देश्य है कि लुप्त हो रही हरियाणवी संस्कृति को एक बार फिर से उसकी पहचान दिलाई जाए। इसके लिए विकास हरियाणवी को जिला स्तर और राज्य स्तर पर बेस्ट हरियाणवी गायक के अवॉर्ड भी मिल चुके हैं।
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गांव में रागिनी प्रोग्राम देखकर हुए प्रेरित
विकास हरियाणवी ने बताया कि जब वो 7वीं कक्षा में पढ़ते थे तो एक दिन उनके गांव में रागिनी को लेकर एक कार्यक्रम हुआ, जिसमें कलाकारों द्वारा रागिनियों की प्रस्तुति देखकर विकास के मन भी रागिनी गाने की इच्छा हुई। बस तभी से विकास गांव में होने वाले रागिनी कार्यक्रमों के साथ आसपास शहरों में होने वाले कार्यक्रमों में जाने लगा।
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हरियाणवी गायकी सुनकर और रियाज कर बना कलाकार
विकास ने बताया कि वह बचपन से ही हरियाणवी गायकों की कैसेट सुनकार और उनके साथ ताल में ताल मिलाकर रियाज करता था। इससे उसकी गायकी को काफी मजबूती मिली। इसके साथ पढ़ाई के दौरान स्टेज परफॉरमेंस देने के बाद उसे अपनी गायकी पर काफी आत्मविश्वास आया। उसने बताया कि बीटेक की पढ़ाई शांति निकेतन कॉलेज से की। पढ़ाई के दौरान ही वर्ष 2013 में कुछ साथियों को साथ लेकर ग्रुप बनाया और इसके बाद लगातार पिछले तीन साल से वो महानगरों में भी हरियाणवी संस्कृति की छाप छोड़ रहे हैं।
घरवालों के सहयोग से मिली कामयाबी
विकास ने बताया कि उनके परिवार वाले भी उनका पूरा साथ देते हैं। उनके माता-पिता ने उनको गायकी के लिए कभी मना नहीं किया। इसी का परिणाम है कि वह गायकी में निरंतर गतिशील बने हुए हैं। विकास ने बताया कि वह रागिनी के साथ हास्य कविताओं, हरियाणवी गीतों आदि में भी निरंतर रुचि ले रहे हैं। और काफी गीत लिख भी चुके हैं। अगस्त माह में उनकी गायकी की एलबम आएगा। इसमें उनकी आवाज में 10 गीतों की रचना की गई है।