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डॉ. अमित चोपड़ाः सेल्यूट टू मैन, लोगों को काम सिखाकर बनाते हैं आत्मनिर्भर
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
Updated Mon, 18 Jul 2016 10:20 AM IST
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हुनर का हीरो डॉ. अमित चोपड़ा
- फोटो : अमर उजाला
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अंबाला निवासी डॉ. अमित चोपड़ा की कहानी पढ़कर आप भी सेल्यूट करेंगे। ये लोगों को काम सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाते हैं। हरियाणा सरकार तो स्वरोजगार को प्रमोट कर ही रही है, पर कुछ ऐसे भी हीरो हैं जो कि बिना किसी सरकारी मदद के पिछड़े इलाकों में जाकर ग्रामीणों को स्वरोजगार के लिए न सिर्फ ट्रेनिंग की सुविधा मुहैया करवा रहे हैंए बल्कि उनको स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता भी कर रहे हैं। ऐसी ही शख्सियत हैं डाक्टर अमित चोपड़ा।
अंबाला के रहने वाले डाक्टर अमित चोपड़ा ने बताया कि वह युवावस्था से ही उद्यमिता को प्रमोट करने में लगे हैं। वर्ष 2002 में उन्होंने अंबाला के एक गांव से अपने काम की शुरुआत की। उस समय वह अकेले थे। ग्रामीणों से मिले और उनको स्वरोजगार के संबंध में जानकारी दी। कुछ लोग उनके पास आए और कहा कि स्वरोजगार के लिए उनको पैसा चाहिए। ऐसे में चोपड़ा ने उनको दर्जी का काम सिखवाया और काम सीखने के बाद मशीन दिलवाई।
स्वयं सहायता ग्रुप भी बना डाला
डाक्टर अमित चोपड़ा ने कहा कि ग्रामीणों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने में जब टीम कम लगी तो स्वयं सहायता ग्रुप बनाने की शुरुआत कर दी। इसमें ग्रामीणों की मदद ही ली, उनको ट्रेंड किया और ट्रेंड ग्रामीणों ने कई अन्य लोगों को ट्रेंड किया। जिससे चेन बनती चली गई।
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ऐसे करते हैं काम
डाक्टर चोपड़ा ने बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ सेलेक्ट किए गए गांव के चौक पर बैठ जाते हैं और ग्रामीणों से चर्चा करते हैं। फिर ग्रामीणों को ही गांव के अन्य लोगों को इकट्ठा करने के लिए कहते हैं। जब ग्रामीण इकट्ठा हो जाते हैं तो पूछते हैं कि भई पैसा कौन कमाना चाहता है। ऐसे में कई हाथ एकसाथ उठते हैं। जो लोग हाथ उठाते हैं उनसे जानकारी लेते हैं कि वह क्या काम खुद करना जानते हैं। जो कुछ नहीं करना चाहते हैं उनसे उनका पसंदीदा विषय पूछने के बाद उसकी फैक्टरी में ट्रेनिंग करवाते हैं।
ग्रामीण महिलाओं को सिखाई कढ़ाई-बुनाई
चोपड़ा ने बताया कि अंबाला के कई ग्रामीण इलाके ऐसे हैं जहां महिलाएं पढ़ी लिखी नहीं हैं। ऐसी ही महिलाएं उनको गांव रावगढ़ में मिलीं। जिनका नाम सरिता और पिंकी था। इन दोनों महिलाओं को उन्होंने सिलाई कढ़ाई और बुनाई की ट्रेनिंग दिलवाई और अब यह दोनों महिलाएं गांव में अपना बुटीक चला रहीं हैं।
यह काम सिखाते हैं
1-डेयरी एक्टिविटी
2-फैशन डिजाइनिंग (कढ़ाई, बुनाई)
3-सॉफ्ट ट्वाय बनाना
4-मोमबत्ती बनाना
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अंबाला के रहने वाले डाक्टर अमित चोपड़ा ने बताया कि वह युवावस्था से ही उद्यमिता को प्रमोट करने में लगे हैं। वर्ष 2002 में उन्होंने अंबाला के एक गांव से अपने काम की शुरुआत की। उस समय वह अकेले थे। ग्रामीणों से मिले और उनको स्वरोजगार के संबंध में जानकारी दी। कुछ लोग उनके पास आए और कहा कि स्वरोजगार के लिए उनको पैसा चाहिए। ऐसे में चोपड़ा ने उनको दर्जी का काम सिखवाया और काम सीखने के बाद मशीन दिलवाई।
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स्वयं सहायता ग्रुप भी बना डाला
डाक्टर अमित चोपड़ा ने कहा कि ग्रामीणों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने में जब टीम कम लगी तो स्वयं सहायता ग्रुप बनाने की शुरुआत कर दी। इसमें ग्रामीणों की मदद ही ली, उनको ट्रेंड किया और ट्रेंड ग्रामीणों ने कई अन्य लोगों को ट्रेंड किया। जिससे चेन बनती चली गई।
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ऐसे करते हैं काम
डाक्टर चोपड़ा ने बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ सेलेक्ट किए गए गांव के चौक पर बैठ जाते हैं और ग्रामीणों से चर्चा करते हैं। फिर ग्रामीणों को ही गांव के अन्य लोगों को इकट्ठा करने के लिए कहते हैं। जब ग्रामीण इकट्ठा हो जाते हैं तो पूछते हैं कि भई पैसा कौन कमाना चाहता है। ऐसे में कई हाथ एकसाथ उठते हैं। जो लोग हाथ उठाते हैं उनसे जानकारी लेते हैं कि वह क्या काम खुद करना जानते हैं। जो कुछ नहीं करना चाहते हैं उनसे उनका पसंदीदा विषय पूछने के बाद उसकी फैक्टरी में ट्रेनिंग करवाते हैं।
ग्रामीण महिलाओं को सिखाई कढ़ाई-बुनाई
चोपड़ा ने बताया कि अंबाला के कई ग्रामीण इलाके ऐसे हैं जहां महिलाएं पढ़ी लिखी नहीं हैं। ऐसी ही महिलाएं उनको गांव रावगढ़ में मिलीं। जिनका नाम सरिता और पिंकी था। इन दोनों महिलाओं को उन्होंने सिलाई कढ़ाई और बुनाई की ट्रेनिंग दिलवाई और अब यह दोनों महिलाएं गांव में अपना बुटीक चला रहीं हैं।
यह काम सिखाते हैं
1-डेयरी एक्टिविटी
2-फैशन डिजाइनिंग (कढ़ाई, बुनाई)
3-सॉफ्ट ट्वाय बनाना
4-मोमबत्ती बनाना