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राकेश संगरः एक कॉल पर पहुंचा देते हैं ब्लड, 21 साल में ढाई हजार कैंप
शबनम कौर/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 21 Nov 2016 02:31 PM IST
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राकेश संगर
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मिलिए एक ऐसे शख्स से, जो बस एक कॉल पर जरूरतमंद तक ब्लड पहुंचा देते हैं और पिछले 21 साल में ढाई हजार कैंप लगा चुके हैं। रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं होता, लेकिन रक्तदान के लिए लोगों को जागरूक करना और कैंप लगवाना भी किसी महान कार्य से कम नहीं है।
राकेश संगर ऐसे ही एक शख्स हैं, जिन्होंने न सिर्फ लोगों को जागरूक किया बल्कि हर उस जरूरतमंद की मदद की, जिसे रक्त की जरूरत थी। राकेश कहते हैं कि इस सामाजिक कार्य में वे सिर्फ अकेले नहीं है बल्कि उनके साथ एक पूरी टीम है। टीम का हर सदस्य जुनूनी और मेहनती है। इसी के बल पर ट्राइसिटी में सबसे ज्यादा कैंप लगाए जाते हैं।
संगर ने बताया कि वह और उनकी टीम पिछले 21 सालों से ट्राइसिटी में रक्तदान कैंपों का आयोजन कर रही है। वह अब तक ढाई हजार कैंप लगा चुके हैं। लोगों की मदद से अब तक 30 हजार यूनिट ब्लड इकट्ठा कर चुके हैं। जब भी कही कोई दुर्घटना होती है, या किसी अस्पताल को ब्लड की जरूरत पड़ती है तो लोग श्री शिव कांवड़ महासंघ को याद करते हैं। राकेश संगर इसी संस्था से जुड़े हैं।
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राकेश संगर ऐसे ही एक शख्स हैं, जिन्होंने न सिर्फ लोगों को जागरूक किया बल्कि हर उस जरूरतमंद की मदद की, जिसे रक्त की जरूरत थी। राकेश कहते हैं कि इस सामाजिक कार्य में वे सिर्फ अकेले नहीं है बल्कि उनके साथ एक पूरी टीम है। टीम का हर सदस्य जुनूनी और मेहनती है। इसी के बल पर ट्राइसिटी में सबसे ज्यादा कैंप लगाए जाते हैं।
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संगर ने बताया कि वह और उनकी टीम पिछले 21 सालों से ट्राइसिटी में रक्तदान कैंपों का आयोजन कर रही है। वह अब तक ढाई हजार कैंप लगा चुके हैं। लोगों की मदद से अब तक 30 हजार यूनिट ब्लड इकट्ठा कर चुके हैं। जब भी कही कोई दुर्घटना होती है, या किसी अस्पताल को ब्लड की जरूरत पड़ती है तो लोग श्री शिव कांवड़ महासंघ को याद करते हैं। राकेश संगर इसी संस्था से जुड़े हैं।
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ये रही इस नेक कार्य से जुड़ने के पीछे की कहानी
रक्तदान शिविर
- फोटो : demo pic
इस नेक कार्य से जुड़ने के पीछे की कहानी के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि तब वह पीजीआई में ही काम करते थे। वहां पर एक औरत गुमसुम और उदास बैठी थी।
उन्होंने पास जाकर दुखी होने का कारण पूछा तो महिला ने बताया कि उसके पति को ब्रेन ट्यूमर है, पिछले कई दिनों से लाइनों में लगने के बाद अस्पताल में एडमिट होने के लिए डॉक्टर से मिल पाई, फिर पता चला कि ऑपरेशन के लिए ब्लड की जरूरत है। लेकिन हमें इस बारे में पता नहीं था।
वह महिला फिरोजपुर से थी। उस महिला को इस हालात में देखकर उन्होंने जरूरतमंद लोगों की मदद करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि इस नेक सफर में उनके साथी सुभाष गुप्ता, जोगिंदर सेतिया, प्रवीण सिंगला, गुलशन कटियाल, अवतार सिंह, राजेश कुमार और मनोज वर्मा का अहम सहयोग है।
उन्होंने पास जाकर दुखी होने का कारण पूछा तो महिला ने बताया कि उसके पति को ब्रेन ट्यूमर है, पिछले कई दिनों से लाइनों में लगने के बाद अस्पताल में एडमिट होने के लिए डॉक्टर से मिल पाई, फिर पता चला कि ऑपरेशन के लिए ब्लड की जरूरत है। लेकिन हमें इस बारे में पता नहीं था।
वह महिला फिरोजपुर से थी। उस महिला को इस हालात में देखकर उन्होंने जरूरतमंद लोगों की मदद करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि इस नेक सफर में उनके साथी सुभाष गुप्ता, जोगिंदर सेतिया, प्रवीण सिंगला, गुलशन कटियाल, अवतार सिंह, राजेश कुमार और मनोज वर्मा का अहम सहयोग है।
रक्तदान करने की लोगों में पहले से बढ़ी जागरूकता
रक्तदान शिविर
- फोटो : फाइल फोटो
संगर ने बताया कि पहले लोगों में रक्तदान करने की जागरुक्ता नहीं थी। सबसे बड़ी मुश्किल लोगों को रक्तदान करने के लिए मनाने में आई। मैं लोगों से मिलता और रक्तदान करने के उन्हें फायदे बताता और प्रेरित करता।
इसके लिए मैंने युवाओं को युवा शक्ति संगठन के जरिए रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया। मानव कल्याण समिति और युवा शक्ति संगठन दोनों एनजीओ के अब रक्तदान कैंप लगाती हैं। राकेश बताते हैं कि जो भी जरूरतमंद आता है, उसकी मदद के लिए टीम तत्पर जुट जाती है। लेकिन हमारी कोशिश होती है कि उनसे भी रक्तदान करने की शपथ लें। इससे एक चेन बनती जा रही है।
लोगों में जागरूकता भी बढ़ रही है। उनके साथ 24 से ज्यादा साथी हैं। जो एक साथ जरूरतमंद की मदद करते हैं। रक्तदान कैंपों के साथ-साथ हमारी यह भी कोशिश रहती है कि डोनर के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाए। इसके अलावा डोनरों को प्रेरित करने के लिए हर साल पहली जनवरी को उन्हें सम्मानित भी किया जाता है।
इसके लिए मैंने युवाओं को युवा शक्ति संगठन के जरिए रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया। मानव कल्याण समिति और युवा शक्ति संगठन दोनों एनजीओ के अब रक्तदान कैंप लगाती हैं। राकेश बताते हैं कि जो भी जरूरतमंद आता है, उसकी मदद के लिए टीम तत्पर जुट जाती है। लेकिन हमारी कोशिश होती है कि उनसे भी रक्तदान करने की शपथ लें। इससे एक चेन बनती जा रही है।
लोगों में जागरूकता भी बढ़ रही है। उनके साथ 24 से ज्यादा साथी हैं। जो एक साथ जरूरतमंद की मदद करते हैं। रक्तदान कैंपों के साथ-साथ हमारी यह भी कोशिश रहती है कि डोनर के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाए। इसके अलावा डोनरों को प्रेरित करने के लिए हर साल पहली जनवरी को उन्हें सम्मानित भी किया जाता है।