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बेमिसालः भारत भ्रमण पर निकले समित पठारे, साइकिल से पूरा करेंगे 32 हजार किलोमीटर का सफर
Thu, 04 Apr 2019 02:01 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जीरकपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जीरकपुर
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 04 Apr 2019 02:01 PM IST
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समित पठारे
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महाराष्ट्र के समित पठारे नामक युवक साइकिल पर भारत भ्रमण पर निकले हैं। उनका उद्देश्य बेघर और अनाथ बच्चों के लिए चैरिटी से पैसा जोड़ना है। जीरकपुर पहुंचे समित ने बताया कि वह भारतीय रेलवे साउथ सेंट्रल डिवीजन में बतौर जूनियर इंजीनियर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि वह 6 महीने की छुट्टी लेकर 2 जनवरी को मुंबई से निकले थे और गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा होते हुए बुधवार को जीरकपुर पहुंचे हैं।
वीरवार को वह चंडीगढ़ से होते हुए शिमला व देहरादून के लिए निकलेंगे। उन्होंने बताया कि उनका लक्ष्य 32 हजार किलोमीटर का सफर तय कर वापस मुंबई पहुंचने का है। उन्होंने बताया कि इस यात्रा के लिए उन्होंने किसी से कोई मदद नहीं ली है और अपनी जमा पूंजी खानपान व समाजसेवियों के मदद से रात को रुकने का बंदोबस्त कर लेते हैं। समित ने बताया कि वो भारत के कई शहरों में घूमे, लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा पसंद पंजाब आया, जहां लोगों ने उनका मनोबल बढ़ाया।
उन्होंने बताया कि वे शिरडी के साईं आश्रम के साथ लंबे समय से जुड़े हुए हैं, जिनमें कई बच्चे बोल नहीं पाते हैं और कोई सुन नहीं पाता, कोई चल नहीं पाता। उनका इस दुनिया में कोई नहीं है। इस आश्रम में रहने वाले अनाथ बच्चों के उत्थान की आवाज उठाने के लिए वह भारत परिक्रमा पर निकल पड़े हैं।
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वीरवार को वह चंडीगढ़ से होते हुए शिमला व देहरादून के लिए निकलेंगे। उन्होंने बताया कि उनका लक्ष्य 32 हजार किलोमीटर का सफर तय कर वापस मुंबई पहुंचने का है। उन्होंने बताया कि इस यात्रा के लिए उन्होंने किसी से कोई मदद नहीं ली है और अपनी जमा पूंजी खानपान व समाजसेवियों के मदद से रात को रुकने का बंदोबस्त कर लेते हैं। समित ने बताया कि वो भारत के कई शहरों में घूमे, लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा पसंद पंजाब आया, जहां लोगों ने उनका मनोबल बढ़ाया।
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उन्होंने बताया कि वे शिरडी के साईं आश्रम के साथ लंबे समय से जुड़े हुए हैं, जिनमें कई बच्चे बोल नहीं पाते हैं और कोई सुन नहीं पाता, कोई चल नहीं पाता। उनका इस दुनिया में कोई नहीं है। इस आश्रम में रहने वाले अनाथ बच्चों के उत्थान की आवाज उठाने के लिए वह भारत परिक्रमा पर निकल पड़े हैं।
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