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बेमिसालः उम्र 60 पार, बीमारी दूर भगाने को शुरू किया दौड़ना, 20 मैराथन में जीत

Thu, 27 Apr 2017 11:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार(हरियाणा) Updated Thu, 27 Apr 2017 11:42 AM IST
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amazing success story of  runner satpal singh of hisar
मैराथन रनर सतपाल सिंह
62 साल की उम्र में लोगों के लिए उम्मीदों की मिसाल बना एक शख्स। बीमारी दूर भगाने के लिए दौड़ना शुरू किया था, आज 20 मैराथन जीत चुके हैं। ये हैं हरियाणा के हिसार जिले के गांव बधावड़ निवासी सतपाल सिंह। बीमारी और परेशानी से निराश लोगों के लिए प्रेरणास्रोत भी हैं। सतपाल को बचपन में ही रक्त संबंधी बीमारी हो गई। डॉक्टरों ने बताया कि पूरे शरीर में रक्त का संचार ठीक से नहीं हो रहा है। इस बीमारी को लेकर डॉक्टरों ने सतपाल को ऑपरेशन करवाने की सलाह दी।
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बाद में एक अन्य डॉक्टर ने इस बीमारी से निजात पाने के लिए सुबह-सुबह दौड़ लगाने की सलाह दी। बीमारी को दूर करने के लिए सतपाल नहर के किनारे दौड़ लगाने लगे। बस इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। बीमारी को दूर करने के प्रयास में वे आज एक सफल धावक बन गए। वर्ष 2010 में पंचकूला में हुए स्टेट लेवल गेम में 19 मिनट 36 सेकेंड में 5000 मीटर की दूरी तय कर गोल्ड अपने नाम किया। इसके बाद चंडीगढ़ मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 1500, 800 और 500 मीटर दौड़ में प्रथम स्थान प्राप्त कर गोल्ड प्राप्त किया। वे रोहतक, हिसार, चंडीगढ़, पंचकूला, बंगलूरू, गोवा, कोयंबटूर आदि स्थानों पर अपना जज्बा दिखा चुके हैं।  
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मैराथन ने बना दिया स्पोंसर       
बंगलूरू में 42 किलोमीटर मैराथन में प्रथम और इसके बाद मुंबई मैराथन में भी प्रथम स्थान प्राप्त किया। उनके इस हुनर को देखते हुए जेएसडब्ल्यू ने स्पोंसर बना दिया। जेएसडब्ल्यू के सहयोग से सतपाल ने अनेक प्रतियोगिताओं में भाग लिया।       
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संघर्षों में बीता बचपन       
सतपाल का बचपन संघर्षों में बीता। गांव में शिक्षा के अभाव के कारण 10 किलोमीटर की दूरी तय करके पास के गांव गुराना पढ़ने जाते थे। बचपन में ही मां-बाप के देहांत हो गया। कठिन परिस्थितियों में भी सतपाल ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार मेहनत करते रहे। इसी बीच स्कूली खेलों में भाग लेने लगे। वर्ष 1974-1975 में पहली बार उमरा गांव 1500 मीटर में प्रथम स्थान प्राप्त किया। 1988-1989 में हिसार पंचायत टूर्नामेंट महाबीर स्टेडियम में 1500 मीटर, 800 मीटर में प्रथम स्थान प्राप्त किया।


मास्को में नवंबर में होगी मैराथन
सतपाल मास्को में नवंबर में होने वाली मैराथन की तैयारियों में जुट गए हैं। इसके लिए वे प्रतिदिन कड़ी मेहनत कर रहे हैं। प्रतिदिन पांच से छह किलोमीटर दौड़ लगा रहे हैं। वहीं शाम को भी हल्की-फुल्की दौड़ और कसरत करते हैं। आधा लीटर दूध, बादाम और चना उनकी डाइट में शामिल है। 2 मार्च 2017 को घोघड़िया में हुए बूरा खाप सम्मेलन में बूरा सम्मान रत्न से नवाजे गए सतपाल सिंह गांव के युवाओं को खेल अभ्यास भी करवाते हैं। गांव में खेल स्टेडियम न होने के कारण सतपाल को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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