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ब्रेव गर्ल: एक हाथ नहीं, पर जज्बा इतना है कि दिल चाहेगा सेल्यूट करना

Sat, 11 Feb 2017 06:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 11 Feb 2017 06:03 PM IST
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amazing story of disable girl prerna gupta visited to punjab university rose festival
प्रेरणा गुप्ता
इस लड़की को देखिए। एक हाथ नहीं है, पर जज्बा इतना है कि आप इसे सेल्यूट किए बिना नहीं रहेंगे। पढ़िए इस नौजवान लड़की की दिलचस्प कहानी। मंजिल पाने के लिए दोनों हाथ नहीं, बल्कि मजबूत इरादे होने चाहिए। पंजाब यूनिवर्सिटी में शुक्रवार से शुरू हुए 8वें रोज फेस्टिवल में सेक्टर-10 स्थित गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट की आर्टिस्ट प्रेरणा गुप्ता में भी कुछ ऐसा ही इरादा है।
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पीयू रोज फेस्टिवल में पहली बार नार्थ रीजन के नामी आर्टिस्ट के साथ आर्ट कॉलेज के स्टूडेंट्स को भी टैटू और स्कैच बनाने के लिए आमंत्रित किया है। बैचलर ऑफ फाइन आर्ट (बीएफए) प्रथम वर्ष की छात्रा प्रेरणा गुप्ता का एक हाथ बचपन से ही नहीं है। लेकिन इनकी शानदार पेंटिंग और टैटू बनाने की कला ने इन्हें खास बना दिया है। जिंदगी को अलग नजरिए से देखने वाली प्रेरणा कहती हैं कि एक हाथ नहीं होना उनके सपनों को पूरा करने में बाधा नहीं बनेगा।
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वह बताती हैं कि अभिभावकों ने भी उनका नाम ऐसा रखा कि वह शारीरिक तौर पर बेशक कुछ कमजोर है, लेकिन उसके काम उसे दूसरों के लिए प्रेरणा बना देते हैं। पंजाब के लुधियाना शहर में सेक्टर-23 निवासी प्रेरणा का सपना एक बेहतरीन आर्टिस्ट बनना है। अपने सपनों को पूरा करने वह घर से दूर चंडीगढ़ में पढ़ाई करने आईं हैं। प्रेरणा बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही पेंटिंग बनाने का शौक था।
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कई प्रतियोगिता में उसे पुरस्कार भी मिल चुके हैं। 12वीं कामर्स संकाय से पास करने के बावजूद आर्ट फील्ड में जाने का फैसला लिया। शुरुआत काफी कठिन थी, लेकिन मेहनत और लगन ने हर मुश्किल को आसान कर दिया। पीजी में रहते हुए भी प्रेरणा अपना काम खुद करती हैं। रोज फेस्टिवल में शुक्रवार को प्रेरणा के टैटू को देख लोग हैरान थे। टैटू बनाने के लिए प्रेरणा ने सिर्फ 50 रुपये फीस रखी है। लेकिन अधिकतर लोग प्रेरणा के जज्बे को देख उससे ही टैटू बनवा रहे हैं। तीन भाई बहनों में सबसे बड़ी प्रेरणा शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रहीं हैं।


10वीं में 9.4 सीजीपीए और 12वीं क्लास में 96.2 फीसदी अंक हासिल किए हैं। लुधियाना के सेक्रेड हार्ट स्कूल से पढ़ाई के बाद सपनों को सच करने के लिए चंडीगढ़ में पढ़ाई करने का फैसला लिया। वह बताती हैं कि परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया और वह अपनी मंजिल पाने के लिए जीतोड़ मेहनत करेंगी। प्रेरणा कहती हैं कि दिव्यांगता मंजिल पाने में कुछ दिक्कत तो पैदा कर सकती है, लेकिन जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है।
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