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Corona Commando: परिवार का मिला साथ और प्यार तो अंजलि उतर गईं कोरोना के खिलाफ जंग में
Tue, 05 May 2020 11:45 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 05 May 2020 11:45 AM IST
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परिवार के साथ स्टाफ नर्स अंजलि
- फोटो : अमर उजाला
आज अगर मैं कोरोना कमांडोज के रूप में कोरोना से जंग के लिए मैदान में उतरी हूं तो बस अपने परिवार के प्यार और सहयोग के बल पर। कोरोना के मरीजों के बीच ड्यूटी करना मुश्किल तो है, लेकिन अपने सहयोगियों को देखकर हिम्मत मिलती है। जब बाकी कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं का जज्बा मेरे लिए सहायक सिद्ध हुआ है।
वास्तव में कोरोना महामारी ने जीने का नजरिया बदल दिया है। कब जिंदगी किस करवट रुख कर ले कोई नहीं जानता। कोरोना ने आज साबित कर दिया कि जरा सी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है। यह कहना है जीएमसीएच 32 में कार्यरत अंजलि कौशिक का, जो पिछले 7 दिनों से कोरोना ओपीडी में ड्यूटी कर रहीं हैं।
ऐसा ससुराल मिले तो हर बेटी बेटों के फर्ज निभाए
अंजलि की तीन साल की बेटी दानी है। उसने अंजलि को 7 दिन से न तो देखा है न ही उससे बात की है। उनका कहना है कि वो मोबाइल में मेरी आवाज सुनकर रोने लगती है। वीडियो कॉल में देखकर पास आने की जिद करती है, इसलिए ड्यूटी के दौरान मैं उससे बात नहीं कर रही। इस समय मेरे सास-ससुर और देवर उसकी देखभाल कर रहे हैं। मुझे उसकी जरा भी चिंता नहीं है।
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जब ड्यूटी लिस्ट में मेरा नाम आया तो मैं यह सोचने लगी कि मैं ड्यूटी नहीं कर पाऊंगी, क्योंकि पति लगातार ड्यूटी पर जा रहे थे। ऐसे में हम दोनों का घर से बाहर रहने संभव नहीं हो पाता। हालांकि सास-ससुर ने मुझे हिम्मत दी और कहा कि निश्चिंत होकर अपनी ड्यूटी करो, बेटी हमारी जिम्मेदारी है। उनकी वजह से ही मैं कोरोना की स्पेशल ड्यूटी को पूरा कर पा रही हूं। मेरा यह कहना है कि अगर सभी बेटियों को ऐसे सास-ससुर मिलें तो वो बहू बनकर भी बेटे का फर्ज निभा सकती हैं।
19 मई के बाद जाऊंगी घर
अंजलि 28 अप्रैल से कोरोना की विशेष ड्यूटी कर रही हैं। अब उन्हें 19 मई को घर जाने का मौका मिलेगा, क्योंकि ड्यूटी के बाद उन्हें 14 दिन तक घर से दूर रहकर क्वारंटीन का समय पूरा करना होगा। अंजलि का कहना है कि अगर इस समय बेटी और परिवार के बारे में सोचूंगी तो अपना फर्ज निभा नहीं पाऊंगी। अभी बस कोरोना को मात देने और मरीजों की देखभाल करने पर पूरा फोकस कर रहीं हूं।
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वास्तव में कोरोना महामारी ने जीने का नजरिया बदल दिया है। कब जिंदगी किस करवट रुख कर ले कोई नहीं जानता। कोरोना ने आज साबित कर दिया कि जरा सी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है। यह कहना है जीएमसीएच 32 में कार्यरत अंजलि कौशिक का, जो पिछले 7 दिनों से कोरोना ओपीडी में ड्यूटी कर रहीं हैं।
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ऐसा ससुराल मिले तो हर बेटी बेटों के फर्ज निभाए
अंजलि की तीन साल की बेटी दानी है। उसने अंजलि को 7 दिन से न तो देखा है न ही उससे बात की है। उनका कहना है कि वो मोबाइल में मेरी आवाज सुनकर रोने लगती है। वीडियो कॉल में देखकर पास आने की जिद करती है, इसलिए ड्यूटी के दौरान मैं उससे बात नहीं कर रही। इस समय मेरे सास-ससुर और देवर उसकी देखभाल कर रहे हैं। मुझे उसकी जरा भी चिंता नहीं है।
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जब ड्यूटी लिस्ट में मेरा नाम आया तो मैं यह सोचने लगी कि मैं ड्यूटी नहीं कर पाऊंगी, क्योंकि पति लगातार ड्यूटी पर जा रहे थे। ऐसे में हम दोनों का घर से बाहर रहने संभव नहीं हो पाता। हालांकि सास-ससुर ने मुझे हिम्मत दी और कहा कि निश्चिंत होकर अपनी ड्यूटी करो, बेटी हमारी जिम्मेदारी है। उनकी वजह से ही मैं कोरोना की स्पेशल ड्यूटी को पूरा कर पा रही हूं। मेरा यह कहना है कि अगर सभी बेटियों को ऐसे सास-ससुर मिलें तो वो बहू बनकर भी बेटे का फर्ज निभा सकती हैं।
19 मई के बाद जाऊंगी घर
अंजलि 28 अप्रैल से कोरोना की विशेष ड्यूटी कर रही हैं। अब उन्हें 19 मई को घर जाने का मौका मिलेगा, क्योंकि ड्यूटी के बाद उन्हें 14 दिन तक घर से दूर रहकर क्वारंटीन का समय पूरा करना होगा। अंजलि का कहना है कि अगर इस समय बेटी और परिवार के बारे में सोचूंगी तो अपना फर्ज निभा नहीं पाऊंगी। अभी बस कोरोना को मात देने और मरीजों की देखभाल करने पर पूरा फोकस कर रहीं हूं।