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मिलिए ऐसे परिवार से, जिसने खून देने में बना डाले बड़े-बड़े रिकॉर्ड
राजेश शांडिल्य/अमर उजाला, मोहाली
Updated Mon, 07 Nov 2016 09:23 PM IST
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रक्तदान कर रिकॉर्ड बना चुका मोहाली का ये दंपति
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आइए आपको मिलाते हैं एक ऐसे परिवार से, जिसने खून देने में बड़े-बड़े रिकॉड बना डाले हैं। लिम्का बुक तक में इनका नाम दर्ज है। ये है, मोहाली की जसवंत कौर और उनके पति बलवंत सिंह।
रक्तदान महादान होता है और जसवंत कौर एवं उनके पति बलवंत सिंह ने इस संदेश का महत्व समझ कर जो सेवा की उसे सूबे की सरकार, धार्मिक, सामाजिक संगठनों और कार्पोरेट घरानों ने भी सलाम किया।
पिछले 25 साल से लगातार 91 बार रक्तदान कर चुके इस जोड़े का नाम लिम्का बुक आफ रिकार्ड में भी दर्ज है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि दान दिया गया खून का एक एक कतरा संकट की घड़ी में पीड़ित व्यक्ति को नया जीवन देने में अहम भूमिका निभाता है।
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सरकार और एनजीओ समय समय पर लोगों को रक्तदान करने के लिए जागरूकता अभियान और रक्तदान कैंप आयोजित करती है।
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रक्तदान महादान होता है और जसवंत कौर एवं उनके पति बलवंत सिंह ने इस संदेश का महत्व समझ कर जो सेवा की उसे सूबे की सरकार, धार्मिक, सामाजिक संगठनों और कार्पोरेट घरानों ने भी सलाम किया।
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पिछले 25 साल से लगातार 91 बार रक्तदान कर चुके इस जोड़े का नाम लिम्का बुक आफ रिकार्ड में भी दर्ज है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि दान दिया गया खून का एक एक कतरा संकट की घड़ी में पीड़ित व्यक्ति को नया जीवन देने में अहम भूमिका निभाता है।
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सरकार और एनजीओ समय समय पर लोगों को रक्तदान करने के लिए जागरूकता अभियान और रक्तदान कैंप आयोजित करती है।
इस तरह शुरू हुआ रक्तदान करने का दौर
रक्तदान शिविर
- फोटो : demo pic
वर्ष 1986 में ऐसा ही एक कैंप फरीदकोट के बाबा फरीद मेले में भी लगा था। माडल टाउन मुंडी खरड़ वासी पंजाब पशुपालन विभाग में कार्यरत जसवंत कौर ने पहली बार इस कैंप में रक्तदान किया।
तब इस कैंप में जसवंत कौर को पहली बार यह अहसास हुआ कि उनके द्वारा दान किया गया खून किस तरह दूसरे के जीवन में छाये अंधेरे को दूर कर सकता है। इसके बाद उन्होंने अपने पति को भी रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया।
पत्नी की बात सुनकर बलवंत सिंह ने पहली बार 7 अप्रैल 1991 को जसवंत कौर के साथ रक्तदान किया। पति पत्नी के मुताबिक 1991 के बाद ले दोनों अब तक 91 बार रक्तदान कर चुके हैं।
जसवंत कौर और बलवंत सिंह के मुताबिक उनकी बेटी संदीप संधू और बेटा अमनदीप संधू कनाडा के सिटीजन है,वे दोनों भी अब तक 36-36 बार रक्तदान कर चुके हैं।
तब इस कैंप में जसवंत कौर को पहली बार यह अहसास हुआ कि उनके द्वारा दान किया गया खून किस तरह दूसरे के जीवन में छाये अंधेरे को दूर कर सकता है। इसके बाद उन्होंने अपने पति को भी रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया।
पत्नी की बात सुनकर बलवंत सिंह ने पहली बार 7 अप्रैल 1991 को जसवंत कौर के साथ रक्तदान किया। पति पत्नी के मुताबिक 1991 के बाद ले दोनों अब तक 91 बार रक्तदान कर चुके हैं।
जसवंत कौर और बलवंत सिंह के मुताबिक उनकी बेटी संदीप संधू और बेटा अमनदीप संधू कनाडा के सिटीजन है,वे दोनों भी अब तक 36-36 बार रक्तदान कर चुके हैं।
यह अवार्ड मिल चुक हैं अब तक पति-पत्नी को
blood donation camp
- फोटो : File Photo
-पति पत्नी को सरकारी और गैर सरकारी संगठनों की ओर से कई बार सम्मानित किया जा चुका है।
-लगातार हर साल और वर्ष में चार बार एक साथ रक्तदान करने वाले पति-पत्नी के रूप में उनका नाम लिम्का बुक आफ रिकार्ड में दर्ज है
-वर्ष 2004 में पंजाब सरकार जसवंत कौर और उनके पति बलवंत सिंह को स्टेट अवार्ड दे चुकी है
-इसके अलावा उन्हें रेड एंड व्हाइट नेशनल ब्रेवरी अवार्ड भी मिल चुका है।
-लगातार हर साल और वर्ष में चार बार एक साथ रक्तदान करने वाले पति-पत्नी के रूप में उनका नाम लिम्का बुक आफ रिकार्ड में दर्ज है
-वर्ष 2004 में पंजाब सरकार जसवंत कौर और उनके पति बलवंत सिंह को स्टेट अवार्ड दे चुकी है
-इसके अलावा उन्हें रेड एंड व्हाइट नेशनल ब्रेवरी अवार्ड भी मिल चुका है।