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WTO: 'डब्ल्यूटीओ की विवाद समाधान प्रणाली निष्क्रिय, कार्यशील बनाने की जरूरत', संगठन के सदस्यों से भारत की अपील

Thu, 26 Mar 2026 10:33 PM IST
Nirmal Kant बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, याउंडे (कैमरून)
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, याउंडे (कैमरून) Published by: Nirmal Kant Updated Thu, 26 Mar 2026 10:33 PM IST
सार

WTO: भारत ने डब्ल्यूटीओ से आग्रह किया कि वह अपनी विवाद समाधान प्रणाली को पूरी तरह कार्यशील बनाए, क्योंकि वर्तमान प्रणाली निष्क्रिय होने से देशों को प्रभावी राहत नहीं मिल पा रही है। गोयल ने कहा कि डब्ल्यूटीओ में सुधार पारदर्शी, समावेशी और विकास-केंद्रित प्रक्रिया के माध्यम से होने चाहिए। पढ़िए रिपोर्ट-

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WTO's dysfunctional dispute settlement system deprives countries of effective redressal: Goyal
पीयूष गोयल, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

भारत ने गुरुवार को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्यों से आह्वान किया कि वे संगठन की विवाद समाधान प्रणाली को पूरी तरह कार्यशील बनाने की दिशा में काम करें, क्योंकि वर्तमान में यह प्रणाली निष्क्रिय होने के कारण देशों को प्रभावी राहत नहीं मिल पा रही है। 
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कैमरून की राजधानी याउंडे में डब्ल्यूटीओ की 14वीं मंत्री स्तरीय कांफ्रेंस के पहले दिन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ई-कॉमर्स व्यापार पर सीमा शुल्क पर रोक की अवधि को और बढ़ाने के संबंध में सावधानीपूर्व पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, एक दोषपूर्ण विवाद समाधान प्रणाली ने सदस्यों को प्रभावी निवारण से वंचित कर दिया है। हमें स्वचालित और बाध्यकारी विवाद समाधान प्रणाली को बहाल करना होगा। 
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डब्ल्यूटीओ की विवाद निपटान व्यवस्था 2009 से ठीक से काम नहीं कर रही है क्योंकि अमेरिका ने अपीलीय निकाय में सदस्य देशों की नियुक्तियों में बाधा डाली है।
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विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्य देशों ने 1998 से ‘इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन’ पर सीमा शुल्क नहीं लगाने पर सहमति व्यक्त की है। इस रोक को समय-समय पर मंत्रिस्तरीय सम्मेलनों (एमसी) में बढ़ाया गया है। डब्ल्यूटीओ का मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 166 सदस्यों का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है।

भारत ने सीमा शुल्क स्थगन के दायरे पर चर्चा करने की आवश्यकता पर बार-बार बल दिया है, क्योंकि इससे राजस्व पर प्रभाव पड़ता है। चार दिवसीय मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 29 मार्च को समाप्त होगा।

उन्होंने कहा, इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन को लेकर सीमा शुल्क पर स्थगन के दायरे के मामले में सदस्यों के बीच आम सहमति के अभाव में और इसके संभावित महत्वपूर्ण प्रभावों को देखते हुए, इस स्थगन के निरंतर विस्तार पर सावधानीपूर्वक पुनर्विचार की आवश्यकता है।

डब्ल्यूटीओ सुधारों पर मंत्री ने कहा कि आवश्यक सुधार एक पारदर्शी, समावेशी और सदस्य-संचालित प्रक्रिया के माध्यम से किए जाने चाहिए। इसमें विकास को केंद्र में रखा जाए और गैर-भेदभाव, आम सहमति आधारित निर्णय लेने और समानता जैसे मूलभूत सिद्धांतों को बनाए रखा जाए।

गोयल ने कृषि पर कहा कि खाद्य सुरक्षा उद्देश्यों के लिए सार्वजनिक भंडारण, विशेष सुरक्षा उपाय और कपास पर स्थायी समाधान काफी समय से लंबित मुद्दे हैं और सदस्य देशों को ‘प्राथमिकता के आधार पर इन पर निर्णय करना चाहिए।

उन्होंने कहा, भारत एक व्यापक मत्स्य पालन सब्सिडी समझौते पर बातचीत करने के लिए प्रतिबद्ध है जो वर्तमान और भविष्य की मछली पकड़ने की जरूरतों को संतुलित करे, गरीब मछुआरों की आजीविका की रक्षा करे और उचित एवं प्रभावी नियंत्रण एवं परिवर्तन उपायों को लागू करे।


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गोयल ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) रूपरेखा में बहुपक्षीय परिणामों को शामिल करना आम सहमति पर आधारित होना चाहिए।

मंत्री ने कहा, हम रचनात्मक रूप से इस बात के लिए प्रयासरत रहेंगे कि डब्ल्यूटीओ वैश्विक व्यापार का केंद्र बना रहे। हम इसमें सुधार करने का प्रयास करेंगे ताकि यह जवाबदेह बना रहे, विकास, समानता और समावेश के लक्ष्यों को पूरा करने में सक्षम हो और आम सहमति और बहुपक्षवाद पर आधारित होकर गरीब, कमजोर और हाशिए पर रहने वाले लोगों के हितों की बेहतर सेवा कर सके।

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