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बैंकिंग नियामक का बड़ा एक्शन: आरबीआई ने किया एक लाख करोड़ रुपये की ओएमओ बिक्री का एलान; जानिए क्या होगा असर?

Fri, 11 Sep 2026 08:29 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 11 Sep 2026 08:29 PM IST
सार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकिंग प्रणाली में मौजूद 10.43 लाख करोड़ रुपये के लिक्विडिटी सरप्लस को नियंत्रित करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की ओएमओ बिक्री की घोषणा की है।

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RBI Announces ₹1 Lakh Crore OMO Sales in Three Tranches to Absorb Banking System Liquidity Surplus
भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : amarujala.com

विस्तार

बैंकिंग प्रणाली में नकदी (लिक्विडिटी) के भारी सरप्लस को संतुलित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने तीन अलग-अलग किस्तों में ,d लाख करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियों की ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) बिक्री नीलामी आयोजित करने की घोषणा की है। आरबीआई की इस कार्रवाई का पहला चरण 17 सितंबर 2026 से शुरू होने जा रहा है। एफसीएनआर बी) जमाओं में भारी बढ़ोतरी और सरकारी खर्चों के चलते बैंकिंग तंत्र में तरलता का स्तर 10.43 लाख करोड़ रुपये के विशाल आंकड़े तक पहुंच चुका है। ऐसे में वित्तीय बाजार में स्थिरता बनाए रखने और अतिरिक्त तरलता को सोखने के लिए रिजर्व बैंक की यह पहल बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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आरबीआई ने एक लाख करोड़ रुपये की ओएमओ बिक्री की घोषणा क्यों की?

रिजर्व बैंक ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि वर्तमान और भविष्य की लिक्विडिटी स्थितियों की गहन समीक्षा के बाद ही 1,00,000 करोड़ रुपये की भारत सरकार की प्रतिभूतियों की ओएमओ बिक्री करने का निर्णय लिया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, 10 सितंबर तक बैंकिंग प्रणाली में लिक्विडिटी का अधिशेष लगभग 10.43 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। 

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इस अतिरिक्त नकदी को सोखने के लिए केंद्रीय बैंक अब तक लगातार वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) नीलामियों का आयोजन कर रहा था। हालांकि, बैंकिंग सिस्टम में तरलता का प्रवाह अत्यधिक रहने के कारण अब आरबीआई ने ओएमओ के माध्यम से सरकारी कागजों की सीधी बिक्री का रास्ता चुना है।

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ओएमओ नीलामी का शेड्यूल और कौन-सी प्रतिभूतियां बेची जाएंगी?

आरबीआई के नोटिफिकेशन के अनुसार, 1 लाख करोड़ रुपये की यह ओएमओ बिक्री तीन किस्तों में चरणबद्ध तरीके से संपन्न होगी:

  • पहला चरण (17 सितंबर): 50,000 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियों की पहली नीलामी होगी। यह नीलामी 17 सितंबर को सुबह 9:30 बजे से 10:30 बजे के बीच आयोजित की जाएगी।
  • दूसरा चरण (21 सितंबर): 25,000 करोड़ रुपये मूल्य की ओएमओ बिक्री होगी।
  • तीसरा चरण (28 सितंबर): 25,000 करोड़ रुपये की अंतिम किस्त की नीलामी की जाएगी।

17 सितंबर की पहली नीलामी में केंद्रीय बैंक जिन मुख्य सरकारी बॉन्ड्स और प्रतिभूतियों की बिक्री करेगा, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • 7.59% जीएस 2029 
  • 6.79% जीएस 2029 
  • 7.61% जीएस 2030
  • 5.77% जीएस 2030
  • 6.68% जीएस 2031
  • 8.28% जीएस 2032

बैंकिंग प्रणाली में अचानक लिक्विडिटी का यह भारी सरप्लस कैसे बना?

बैंकिंग तंत्र में तरलता में आए इस अचानक उछाल के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारक जिम्मेदार रहे हैं:

  • 1. FCNR(B) डिपॉजिट्स का भारी प्रवाह: बैंकों द्वारा बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा गैर-निवासी [FCNR(B)] जमा जुटाए गए। इससे देश में विदेशी मुद्रा का आगमन हुआ, जिसके बाद रिज़र्व बैंक के साथ हुए करेंसी स्वैप के माध्यम से बैंकों को भारी मात्रा में रुपये की लिक्विडिटी प्राप्त हुई।
  • 2. सरकारी व्यय में बढ़ोतरी: महीने के अंत में सरकार द्वारा वेतन, पेंशन और अन्य भुगतानों के लिए किए गए खर्चों ने भी बैंकिंग सिस्टम में नकदी के प्रवाह को और बढ़ा दिया।

अब आगे का दृष्टिकोण क्या और वित्तीय प्रणाली पर इसका असर होगा?

सितंबर महीने के दौरान तीन चरणों में आयोजित होने वाली यह ओएमओ बिक्री बैंकिंग प्रणाली में मौजूद अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करने में प्रभावी साबित होगी। 17, 21 और 28 सितंबर की नीलामियों के माध्यम से आरबीआई बाजार में नकदी के प्रवाह को संतुलित करेगा। रिज़र्व बैंक की यह त्वरित कार्रवाई दर्शाती है कि वह वित्तीय स्थिरता बनाए रखने और बैंकिंग प्रणाली में अत्यधिक लिक्विडिटी के कारण बनने वाली असमानताओं को समय रहते साधने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

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