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मुंबई: 'फिनटेक सेक्टर के लिए एक फेडरेटेड इंडस्ट्री प्लेफॉर्म बनाने की जरूरत', बोलीं वित्त मंत्री सीतारमण

Fri, 11 Sep 2026 07:53 PM IST
Navita R Asthana बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Navita R Asthana Updated Fri, 11 Sep 2026 07:53 PM IST
सार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 के अपने समापन भाषण में फिनटेक सेक्टर के लिए एक 'फेडरेटेड इंडस्ट्री प्लेटफ़ॉर्म' बनाने का प्रस्ताव दिया है।

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There is a need to create a 'federated industry platform' for the fintech sector: Finance Minister
फिनटेक फेस्ट - फोटो : amarujala.com

विस्तार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 के अपने समापन भाषण में फिनटेक सेक्टर के लिए एक 'फेडरेटेड इंडस्ट्री प्लेटफ़ॉर्म' बनाने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने फिनटेक सेक्टर की जबरदस्त ग्रोथ के बारे में बोलते हुए कहा, यह सेक्टर अभी तक बहुत अधिक संगठित नहीं रहा है, जैसे-जैसे इस सेक्टर की कंपनियां बड़ी और ज्यादा इंटरनेशनल होती जा रही हैं, वैसे-वैसे इस सेक्टर को एक भरोसेमंद और सामूहिक आवाज़ देने के लिए ऐसे प्लेटफॉर्म की जरूरत भी बढ़ रही है। अपने संबोधन में वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच सरकारों और नियामकों के लिए चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं।

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उन्होंने कहा, "मैं मानती हूं कि यह एक ऐसा उद्योग है जो पारंपरिक रूप से इसलिए फला-फूला है क्योंकि यह बहुत अधिक संगठित नहीं रहा है। लेकिन जैसे-जैसे कंपनियां बड़ी और ज्यादा इंटरनेशनल होती जा रही हैं, सामूहिक जुड़ाव से उस आजादी को कम करने की जरूरत नहीं है। इसलिए, एक ऐसे फेडरेटेड इंडस्ट्री प्लेटफ़ॉर्म पर विचार करना फायदेमंद हो सकता है जो व्यापक भारतीय टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को एक साथ लाए। इसका उद्देश्य अलग-अलग कंपनियों की जगह बोलना नहीं, बल्कि सेक्टर को एक भरोसेमंद सामूहिक आवाज देना है।

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क्या होता है फेडरेटेड इंडस्ट्री प्लेटफॉर्म?

वित्त मंत्री ने कहा कि फेडरेटेड प्लेटफॉर्म दुनिया भर की विदेशी सरकारों और रेगुलेटर्स के साथ जुड़ेगा। यह ऐसा मंच होगा जो एक सामूहिक अंतरराष्ट्रीय आवाज दे सके और नियामक स्थितियों के बाजार पहुंच में बाधा बनने से पहले विदेशी सरकारों और नियामकों के साथ बातचीत कर सके। फेडरेटेड इंडस्ट्री प्लेटफॉर्म एक ऐसा डिजिटल या तकनीकी ढांचा होता है, जहां कई स्वतंत्र कंपनियां, संस्थान या संगठन एक केंद्रीय नेटवर्क से जुड़े होते हैं, लेकिन अपने डेटा और सिस्टम पर उनका पूरा स्वायत्त नियंत्रण रहता है।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण ने भारत का जनसांख्यिक लाभ अब कोई सपना नहीं रह गया है, बल्कि यह युवा आबादी द्वारा बनाए जा रहे व्यवसायों, प्रौद्योगिकी और प्लेटफॉर्म्स से स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि भारत की जनसांख्यिकीय लाभ का वास्तविक रूप से अनुभव कर रहा है, जिसमें युवा भारतीय अपनी क्षमता को आर्थिक गति के रूप में बदल रहा है। भारत की फिनटेक क्षमताएं डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और यूपीआई में प्रगति कर रही हैं। देश सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में उभरते हुए अंतरिक्ष अन्वेषण में भी लगातार प्रगति कर रहा है।

निराशावादी आकलन की आलोचना करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि कुछ लोग अभी देश की युवा आबादी को आर्थिक विकास में परिवर्तित करने की क्षमता का आकलन पुराने मापदंडो के आधार पर करते हैं। जबकि भारती युवा अपनी उत्पादकता को प्रमाणित करने के लिए पारंपरिक तरीकों का इंतजार किए बिना कोड लिख रहे हैं, कारोबार स्थापित कर रहे हैं और नए प्लेटफार्म का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने ने जनसांख्यिकीय शक्ति को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की भारत की महत्वाकांक्षा से जोड़ा और कहा कि युवा आबादी उपलब्धियां पहले से ही जनसांख्यिकीय का आर्थिक लाभ और तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित कर रही हैं।

एआई से जुड़ी नई चुनौतियां क्या हैं?

सीतारमण ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का तेजी से विकास सरकारों, नियामकों और समाज के लिए नई चुनौतियां भी पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा, एजेंटिक एआई सिस्टम और बड़े भाषा मॉडल लोगों की जानकारी के बिना उन्हें प्रभावित कर सकते हैं और इनका इस्तेमाल छोटे समूह किसी देश के सिस्टम पर हमला करने या जनमत को प्रभावित करने के लिए कर सकते हैं। जिसमें चुनावी परिणम भी शामिल है। उन्होंने हाल ही में हुई एक घटना का हवाला देते हुए बताया, जिसमें एक देश को कई एजेंटिंक समूहों द्वारा निशाना बनाया गया था, जो कुछ धोखेबाजा ऑपरेटरों के साथ मिलकर काम करते थे। जिसमें वजह से पूरे सिस्टम पर बड़ा हमला हुआ।

एआई सुरक्षा के लिए क्या तैयारी है?

वित्त मंत्री, वैश्विक एआई उद्योग से इस बात पर स्पष्टता की मांग की और सुरक्षा उपाय तकनीक प्रगति के साथ तालमेल बिठा रहे हैं और पूछा है कि विश्वसनीय और पारदर्शी जवाब देने के लिए कौन सामूहिक तंत्र मौजूद  है। उन्होंने कहा कि, प्रौद्योगिकी स्वयं उत्पन्न कमजोरियों को दूर करने में मदद कर सकती है, लेकिन सुरक्षा उपायों को लगातार विकसित करने और उन्हें जल्द से जल्द से लागू करने की जरूरत होगी। उन्होंने ने एआई, फिनटेक और डिजिटल प्लेटफॉर्म की सीमाहीन प्रकृति पर बोलते हुए कहा, एक उत्पाद बेंगलुरू में विकसित होता है और किसी अन्य देश के बुनियादी ढांचे में संचालित हो सकता है। प्रौद्योगिकी पल भर में सीमा को पार कर सकती है, जबकि नियम काफी हद तक राष्ट्रीय बने रहते हैं। इसलिए कंपनियों को डेटा, लाइसेंसिंग, साइबर सुरक्षा, उपभोक्ता संरक्षण, कराधान और वित्तीय विनियमन से जुड़े विभिन्न जरूरतों का सामना करना पड़ता है।

टोकनाइजेशन पर वित्त मंत्री ने क्या कहा?

टोकनाइजेशन पर बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा, टोकनाइजेशन के साथ वैश्विक प्रयोगों ने ऐसे लेनदेन के मूलभूत तरीकों पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने आबीआई से अपने थोक और खुदरा सीबीडीसी पायलट प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने और डिजिटल रुपये के बारे में अपनी क्षमताओं को मजबूत करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा, टोकनाइजेशन बिचौलियों को कम कर सकता है और संपत्ति ट्रांस्फर को लगभग आसान बना सकता है। एजेंटिक एआई अनुशांसन से प्रत्यक्ष कार्रवाई की ओर बढ़ सकता है, जिससे उन प्रक्रियाओं में तेजी आएगी जिनमें कई दिन लगते थे। क्वांट कंप्यूटिंग और सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाएगा साथ ही एआई धोखाधड़ी को पता लगाने में सुधार कर सकता है। लेकिन अधिक गति त्रुटियों, धोखाधड़ी और बाजार में आने वाले झटकों के प्रसार को भी तेज कर सकती है, जिसके लिए हमें सावधान रहना चाहिए।  

उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा, वित्तीय नियामकों, प्रतिस्पर्धा प्राधिकरणों, डेटा संरक्षण संस्थाओं और साइबर सुरक्षा वस्तुओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता होगी, जिसमें सुधारों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाना चाहिए। उद्योग की सफलता को केवल उपयोगकर्ताओं, बेंचमार्क की मात्रा या मूल्यांकन के आधार पर ही नहीं, बल्कि इसके द्वारा अर्जित विश्वास, हल की गई समस्याओं और निर्मित प्रौद्योगिकियों के आधार पर भी समेकित जाना चाहिए।



भारत ने यह साबित कर दिया है कि वह बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकी का उपयोग कर सकता है और विचारों को जमीनी स्तर पर समाधान में बदल सकता है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारतीय प्रतिभा और प्रौद्योगिकी वैश्विक बाजारों तक पहुंचेगी, यह क्षमता वैश्विक स्तर तक बढ़ सकती है। लेकिन नवाचार से प्रश्न आधारभूत, सुधार करने, संयम उद्योगों और जिम्मेदारी लेने की मानवीय क्षमता का संरक्षण नहीं होना चाहिए। भारत को अपने प्रौद्योगिकी क्षेत्र की गतिविधियों के साथ-साथ ऐसी उद्यमिता और मानकों की आवश्यकता है जो नवाचार को वैश्विक स्तर पर ले जाने की जरूरत है।

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