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पैराडाइज पेपर्सः टैक्स चोरी के 1.34 करोड़ दस्तावेज रिलीज, इन भारतीयों ने छुपाया पैसा

Mon, 06 Nov 2017 01:09 PM IST
amarujala.com- Presented By: अनंत पालीवाल
amarujala.com- Presented By: अनंत पालीवाल Updated Mon, 06 Nov 2017 01:09 PM IST
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these indians names also figure in paradise papers, shown directors in various shell firms
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पैराडाइज पेपर्स में टैक्सचोरी करके विदेश में कालाधन छुपाने के मामलों से जुड़ी फाइलें सामने आई हैं, इसमें भारत समेत कई अन्य देशों की प्रभावशाली हस्तियों के नाम शामिल हैं। 'पैराडाइज पेपर्स' नाम के इस खुलासे में कुल 1.34 करोड़ फाइलें सामने आई हैं। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इस खुलासे में रानी एलिजाबेथ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कैबिनेट के मंत्री और कई सेलेब्रिटी के नाम भी शामिल हैं।

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ये जानकारियां कुल 19 टैक्स हेवन (ऐसे देश जहां टैक्स काफी मामूली होता है) माने जाने वाली जगहों से आई हैं। इस जानकारी को सबसे पहले जर्मन के एक अखबार ने एकत्रित किया, जिसके बाद  इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट (ICIJ) ने उसकी जांच शुरू की। इस संगठन में देशभर के 90 मीडिया संस्थानों के पत्रकार शामिल थे।
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पनामा पेपर मामले की तरह पैराडाइज में भी कई नामी-गिरामी भारतीयों के अलावा कुछ ऐसे नाम सामने आए हैं जो छोटे शहरों में रहते हैं और उन्होंने विदेश में स्थित फर्जी कंपनियों में पैसा डायवर्ट किया है।
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जिन कंपनियों के जरिए ऐसा किया गया उनका रजिस्टर्ड पता इन शहरों का दिया गया है। इन शहरों में गाजियाबाद, कोटा, जालंधर, पटना और मुजफ्फरपुर शामिल हैं।   

पढ़ें- पैराडाइज पेपर्स: टैक्स चोरी से जुड़े 1.34 करोड़ दस्तावेज रिलीज, 714 भारतीयों के नाम शामिल

जालंधर के रियल एस्टेट डेवलपर का नाम 
इंडियन एक्सप्रेस द्वारा लीक किए दस्तावेजों के अनुसार, इस लिस्ट में जालंधर के रियल इस्टेट डेवलपर पवितार सिंह उप्पल का नाम शामिल है। पैराडाइज पेपर के अनुसार, उप्पल ने अगस्त 2016 में सिल्वरलाइन एस्टेट लिमिटेड के नाम से डोमीनिका में एक कंपनी को रजिस्टर्ड किया।

इस कंपनी को प्रॉफिट कंपनी के तौर पर दिखाया गया और केवल उप्पल ही इस कंपनी के डायरेक्टर हैं। उप्पल ने कहा कि यह कंपनी उनके रिश्तेदार की है, जो डोमीनिका में रहता है और उसे हाई रैंकिंग डिप्लोमेट के तौर पर नियुक्त किया गया है।

हालांकि उन्होंने अपने रिश्तेदार का नाम बताने से इंकार कर दिया। 

माल्टा में फर्जी पायलट लाइसेंस स्कैम के आरोपी ने बनाई कंपनी

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डेमो - फोटो : demo pic

सितंबर 2011 में दिल्ली पुलिस द्वारा भंडाफोड़ किए गए फर्जी पायलट लाइसेंस स्कैम के मुख्य आरोपी रविश भड़ाना ने माल्टा में दो कंपनियों का गठन किया। रविश फरार चल रहा है और दिल्ली पुलिस उसे लंबे समय से तलाश रही है।

भड़ाना राजस्थान के कोटा का रहने वाला है। माल्टा में बनाई गई दोनों कंपनियों में भड़ाना को डायरेक्टर, शेयर होल्डर और लीगल प्रतिनिधि बताया गया है। इसके अलावा गाजियाबाद के पते पर डीआईसीआई एक्सपोर्ट नाम से कंपनी का रजिसटर्ड पता भी  दिखाया है। 

गाजियाबाद की दो महिलाओं के बारे में नहीं चला पता
भड़ाना के साथ में माल्टा में बनाई गई एक और कंपनी मोंडो टेसाइल होल्डिंग लिमिटेड में गाजियाबाद की रहने वाली दो महिलाओं का नाम भी शामिल है। इनके नाम नेहा शर्मा और मोना कलवानी है, जिनके बारे में किसी को नहीं पता है कि वो कहां पर हैं।

गाजियाबाद में जिस पते पर कई साल पहले वो रहती थीं, वो किराये का मकान था। भड़ाना की मां के अनुसार वो पहले जयपुर और बाद में दिल्ली में रहता है, लेकिन उनको भी उसका पता या फोन नंबर नहीं मालूम है। रविश का भाई नवीन भडाना भीलवाड़ा में डॉक्टर है, जिसने इंडियन एक्सप्रेस को कहा कि लंबे समय से उसका रविश से किसी प्रकार का कोई संबंध नहीं है।

पैराडाइज पेपर्स में कुल 180 देशों के लोगों के नाम शामिल हैं जिसमें से भारत 19वें नंबर पर है। कुल 714 भारतीयों के नाम इसमें शामिल बताए जा रहे हैं। अभी इस खुलासे से जुड़ी 40 और रिपोर्ट्स आनी बाकी हैं। पैराडाइज पेपर्स से 18 महीने पहले पनामा पेपर के जरिए ऐसा ही खुलासा हुआ था। उसमें भी कई बड़े नेताओं के नाम सामने आए थे।

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