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आम बजट 2020: छोटे और मध्यम उद्यमों का निर्यात बढ़ाने को 1,000 करोड़ रुपये की योजना
Sun, 02 Feb 2020 03:55 AM IST
संजीव कुमार झा
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sun, 02 Feb 2020 03:55 AM IST
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Union Budget 2020: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
- फोटो : LokSabha
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12 करोड़ के वर्क फोर्स वाली एमएसएमई को कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने और निर्यात में उनकी उपस्थिति को बढ़ाने का प्रयास बजट में किया गया। एमएसएमई को निर्यात बाजार में सफल बनाने के लिए वित्तमंत्री ने एक्जिम बैंक और सिडबी के जरिए 1,000 करोड़ रुपये के नए कोष की घोषणा की।
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इस कोष के लिए 50 करोड़ रुपये एक्जिम और 50 करोड़ रुपये सिडबी देगा। इसके अलावा, 900 करोड़ रुपये बैंकों से लिए जाएंगे। एमएसएमई को निर्यात में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए फुटवियर सहित अन्य उत्पादों की कस्टम ड्यूटी में भी इजाफा किया गया।
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मध्यम एवं सूक्षम उद्योगों के लिए सबसे अधिक राहत कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) के रूप में मिली। कार्यशील पूंजी के लिए कर्ज एमएसएमई की सबसे बड़ी समस्या बनी हुई थी। अब कार्यशील पूंजी के लिए इन उद्योगों को भटकना नहीं होगा।
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इनके लिए अधीनस्थ ऋण की नई योजना शुरू की गई है। इस योजना में कर्ज की गणना अर्द्ध इक्विटी के रूप में की जाएगी। सरकार ने कहा है कि क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट फंड में भी इजाफा किया जाएगा। इस योजना को क्रेडिट गारंटी के तहत सरकार पूरी गारंटी देगी।
पांच करोड़ तक का कारोबार करने वाले एमएसएमई को ऑडिट नहीं करवाना होगा। अभी तक एक करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले एमएसएमई को ऑडिट नहीं कराना होता था। नई व्यवस्था उन कारोबारियों के लिए लागू होगी जो अपने व्यवसाय के लेनदेन में पांच फीसदी से कम नकद का प्रयोग करते हैं।
इसी तरह से एनबीएफसी अब इनवायस पर टीआरईडीएएस पोर्टल के माध्यम से एमएसएमई को ऋण प्रदान कर सकेंगे। इसके लिए फेक्टर रेग्यूलेशन एक्ट 2011 में संशोधन करने का प्रस्ताव बजट में किया गया है।
ऋण पुनर्संरचना में राहत
एमएसएमई के लिए बड़ी राहत ऋण संरचना (डेब रिस्ट्रक्चरिंग) के रूप में भी सामने आई है। बजट में कर्ज के पुनर्गठन की सीमा 31 मार्च 2020 से बढ़ाकर 31 मार्च 2021 तक करने का इरादा जताया गया है। सरकार इसके लिए रिजर्व बैंक से बात कर भी चुकी है।