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घरेलू विमानों में मनपसंद सीट चाहिए तो करनी होगी जेब ढीली

Sun, 25 Dec 2016 07:37 PM IST
एजेंसी
एजेंसी Updated Sun, 25 Dec 2016 07:37 PM IST
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Pay to choose seats in domestic airlines, even for middle seat
फाइल फोटो
यदि आप अब समूह में भी किसी घरेलू विमान सेवा की पसंदीदा सीटें चाहते हैं, तो आपको अलग से इसकी कीमत चुकानी होगी। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच विमानन कंपनियों ने अधिक से अधिक राजस्व कमाने के लिए बीच वाली सीट चुनने पर भी यात्रियों से अधिक वसूली की योजना बनाई है। 
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घरेलू विमानन कंपनियों द्वारा विभिन्न सेवाओं के एवज में अतिरिक्त शुल्क वसूलने की मंजूरी मिल गई है। इन सेवाओं में खिड़की वाली सीट, पैर फैलाने के लिए अधिक जगह वाली सीट और यहां तक कि बीच वाली सीट चुनने पर भी यात्रियों को अतिरिक्त शुल्क चुकाना पड़ेगा। 
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अमूमन इस तरह की पसंदीदा सीटों के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में अतिरिक्त वसूली कोई नई बात नहीं है। विमानन उद्योग के अधिकारियों ने बताया कि इससे कंपनियों को अतिरिक्त राजस्व जुटाने में मदद मिलती है। यात्री खिड़की वाली और गलियारे वाली सीटें तथा अतिरिक्त लेगरूम वाली सीटें ज्यादा पसंद करते हैं।
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जेट एयरवेज के एक प्रवक्ता ने बताया कि पूर्व आरक्षित सीटों के लिए यात्रियों से शुल्क वसूली सभी जगह स्वीकार्य है और विश्व की तकरीबन सभी बड़ी कंपनियां संपूर्ण सेवा और सस्ती सेवा के साथ ही पसंदीदा सेवा वाली योजना भी चलाती रहती हैं। 

 

प्रतिस्पर्धा के बावजूद यात्री किराया कम होने की दलील

Pay to choose seats in domestic airlines, even for middle seat
पसंदीदा सीटों और बीच वाली सीटों के लिए कितने अनुरोध आते हैं और कितना अतिरिक्त शुल्क लिया जाता, इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि भारत में डीजीसीए के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही घरेलू विमान सेवाओं में यह योजना अपनाई जाती है और इससे अतिरिक्त राजस्व जुटाया जाता है।

उन्होंने बताया कि जहां तक बीच वाली सीटों की पसंद का सवाल है, तो घरेलू विमानों की इकोनॉमी क्लास में अगली सात लाइनें ही अतिरिक्त शुल्क देकर पूर्व आरक्षित की जाती हैं जबकि बाकी 19 लाइनों वाली यही सीटें बिना अतिरिक्त शुल्क के आरक्षित होती हैं। 

पिछले दो वर्षों के दौरान 20 प्रतिशत से अधिक घरेलू यात्री बढ़े हैं, लेकिन भारतीय विमान सेवा में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बावजूद यात्री किराया बहुत कम है। इसी की भरपाई के लिए विमानन कंपनियां अतिरिक्त राजस्व जुटाने का प्रयास करती हैं और पसंदीदा सीटों के लिए अतिरिक्त शुल्क वसूलती हैं।
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