{"_id":"662f0292d87dfd603f079b33","slug":"if-you-convert-challenges-into-opportunities-you-will-definitely-get-success-kent-ro-cmd-mahesh-gupta-2024-04-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahesh Gupta: केंट आरओ सिस्टम्स के CMD महेश गुप्ता बोले- चुनौतियों को अवसर बनाएं तो जरूर मिलेगी सफलता","category":{"title":"Business","title_hn":"कारोबार","slug":"business"}}
Mahesh Gupta: केंट आरओ सिस्टम्स के CMD महेश गुप्ता बोले- चुनौतियों को अवसर बनाएं तो जरूर मिलेगी सफलता
Mon, 29 Apr 2024 05:11 PM IST
निर्मल कांत
कालीचरण, अमर उजाला।
कालीचरण, अमर उजाला।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 29 Apr 2024 05:11 PM IST
सार
केंट आरओ के संस्थापक महेश गुप्ता ने कहा कि देश एक ऐसे स्तर पर पहुंच गया है, जहां से हमें ऊपर ही जाना है। उन्होंने कहा, हमारी अंतरराष्ट्रीय स्थिति बहुत अच्छी है। हमारे पास बड़ा श्रमबल है, जो तकनीकी रूप से काफी सशक्त हैं। उधर, चीन की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। चीन प्लस वन की पॉलिसी से भी हमें लाभ मिलेगा।
विज्ञापन
केंट आरओ सिस्टम्स के सीएमडी महेश गुप्ता।
- फोटो : एएनआई (फाइल)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
वॉटर प्यूरीफायर बनाने वाली कंपनी केंट आरओ सिस्टम्स एक जाना-पहचाना नाम है। आज इसके पोर्टफोलियो में वॉटर सॉफ्टनर, किचन अप्लायंसेस, एयर प्यूरीफायर, वैक्यूम क्लीनर, हेल्दी कुकवेयर और होम एंड हाइजीन समेत कई उत्पाद हैं। करीब 1,200 करोड़ रुपये की कंपनी देश के साथ विदेश में भी अपने उत्पाद बेचती है। कंपनी के संस्थापक एवं सीएमडी डॉ. महेश गुप्ता से कालीचरण की बातचीत...
विज्ञापन
20,000 रुपये से शुरू हुई केंट आज करीब 1,200 करोड़ की कंपनी हो गई है। इस पड़ाव तक पहुंचने में चुनौतियां क्या आईं?
इस सफर में मुश्किलें तो आईं, लेकिन हमने उन्हें अवसर के रूप में देखा। पानी खराब था, यह मेरे लिए सबसे बड़ा अवसर था। अगर पानी खराब ही नहीं होता तो मैं इस बिजनेस में नहीं होता। दूसरा...पानी को शुद्ध बनाकर लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए, इस पर अध्ययन ही नहीं हुआ। यह हमारे लिए एक और अवसर था। अगर मार्केट बहुत प्रतिस्पर्धी होता है, जहां चार-पांच कंपनियां पहले से हों तो वहां जगह बनाने में काफी समय लगता है। लेकिन, इस बिजनेस में ऐसा नहीं था और हमें खाली मैदान मिला। एक वातावरण मिला, जिसमें हम रिसर्च कर पाए। नई चीजें लेकर आए। इससे लोगों में कंपनी के प्रति भरोसा पैदा हुआ, जो कायम है।
विज्ञापन
कंपनी पहले वॉटर प्यूरीफायर बनाती थी। अब पोर्टफोलियो में कई उत्पाद हैं। आगे विस्तार की क्या योजनाएं हैं?
हमने जो भी उत्पाद बनाए, उसमें इनोवेशन व गुणवत्ता का ध्यान रखा गया। हार्ड पानी की समस्या थी, हम सॉफ्टनर लेकर आए। किचन अप्लायंसेस लेकर आए। वेजिटेबल क्लीनर लाए। हमारा मकसद लोगों को स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर उत्पाद मुहैया कराना था न कि सिर्फ लाभ कमाना। जहां तक विस्तार की बात है तो मेरा मानना है कि लोगों को वो सुविधाएं दी जाए, जो उन्हें नहीं मिलती है। हम अपने उत्पाद उनके सामने पेश करते रहेंगे। उन्हें पसंद आया तो हम भी विस्तार करते रहेंगे।
विज्ञापन
पंखे के कारोबार में कैसे आए और आगे क्या संभावनाएं हैं?
पहले यह समझना होगा कि हम पंखे के कारोबार में क्यों आए। हम कोई बिजनेस लेने नहीं आए। आज पूरे देश में 100 करोड़ पंखे हैं, जो पुरानी तकनीक पर आधारित हैं। इसमें प्रति पंखा 70 वॉट की बिजली खपत होती है। हमारा पंखा 28 वॉट की बिजली से चलता है। अगर पूरे देश के सभी पंखे बदल दिए जाएं तो 500 मेगावॉट के 50 प्लांट जितनी बिजली बचेगी। हमने एक फैसला किया कि हम जो पंखे बनाएंगे, वो बिजली बचाएंगे। इसी मुहिम को लेकर हम इसके अंदर आए। जहां तक संभावनाओं की बात है तो आसमान खुला है। लोगों को जब समझ में आ जाएगा तो वे पुराने पंखे बदलेंगे। जब ये हो जाएगा तो समझूंगा कि महायज्ञ में मैंने भी छोटी सी आहूति डाली है।
हमारा देश एक ऐसे स्तर पर पहुंच गया है, जहां से हमें ऊपर ही जाना है। हमारी अंतरराष्ट्रीय स्थिति बहुत अच्छी है। हमारे पास बड़ा श्रमबल है, जो तकनीकी रूप से काफी सशक्त हैं। उधर, चीन की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। चीन प्लस वन की पॉलिसी से भी हमें लाभ मिलेगा।
आप अमेरिकी बाजार में भी कदम रखने जा रहे हैं। ब्लैक एंड डेकर से किस तरह का करार हुआ है?
हमने ब्लैक एंड डेकर का ब्रांड लाइसेंसिंग लिया है। अच्छे उत्पादों के बावजूद अमेरिका में घुसना मुश्किल है क्योंकि वह सबसे कठिन और मेच्योर मार्केट है। वहां के नियम-कायदे काफी सख्त हैं। अमेरिकी लोगों में काफी जागरूकता है। इसलिए, हमने वहां के सबसे पॉपुलर ब्रांड को साथ लिया। अमेरिकी बाजार में उत्पाद हमारा होगा और ब्रांड ब्लैक एंड डेकर का। अमेरिका के बाद कनाडा और फिर यूरोप में पंखे लेकर जाएंगे। यूरोप में ग्लोबल वॉर्मिंग शुरू हो गई है। वहां एसी लगाने की जगह नहीं है। इसलिए, नई तकनीक से लैस हमारे पंखे की मांग तो बढ़ेगी ही।