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Delhi High Court: ऑक्सफैम इंडिया के खिलाफ आयकर पुनर्मूल्यांकन कार्यवाही पर कोर्ट की रोक, विभाग को नोटिस जारी

Sun, 13 Aug 2023 05:48 PM IST
निर्मल कांत बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 13 Aug 2023 05:48 PM IST
सार

Delhi HC: दिल्ली उच्च न्यायालय ने गैर सरकारी संगठन ऑक्सफैम इंडिया के खिलाफ आयकर पुनर्मूल्यांकन की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। अदालत ने आयकर विभाग (आईटी) को नोटिस जारी किया और एनजीओ द्वारा दायर याचिका पर जवाब मांगा है। 

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Delhi High Court stays IT reassessment proceedings against NGO Oxfam India
delhi high court - फोटो : PTI

विस्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने गैर सरकारी संगठन ऑक्सफैम इंडिया के खिलाफ आयकर पुनर्मूल्यांकन की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। अदालत ने आयकर विभाग (आईटी) को नोटिस जारी किया और एनजीओ द्वारा दायर याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें उसके खिलाफ जारी नोटिस और आदेश को चुनौती दी गई थी।

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रिकॉर्ड के मुताबिक, 7 सितंबर, 2022 को एनजीओ पर एक सर्वेक्षण किया गया था, जिसके कारण वर्ष 2016-17 के लिए पुनर्मूल्यांकन कार्यवाही शुरू की गई और इस साल 29 मार्च को ऑक्सफैम को एक नोटिस जारी किया गया।

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पीठ ने कहा,'अगले छह सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दायर किया जाएगा। इस पर यदि कोई प्रत्युत्तर हो तो सुनवाई की अगली तारीख से कम से कम पांच दिन पहले दायर किया जाएगा।' न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया की पीठ ने कहा, 'मामले को 22 नवंबर, 2023 को सूचीबद्ध किया जाए। इस बीच, अदालत के अगले निर्देश तक पुनर्मूल्यांकन की कार्यवाही जारी रखने पर रोक रहेगी।'
 

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एनजीओ को 29 मार्च को आईटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत एक नोटिस जारी किया गया था, जिसने याचिकाकर्ता के खिलाफ इस आधार पर पुनर्मूल्यांकन कार्यवाही शुरू कर दी थी कि याचिकाकर्ता कथित तौर पर मुकदमेबाजी गतिविधियों में शामिल था जो विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) की धारा 8 (1) का उल्लंघन था।  इसके अलावा, इसे कथित तौर पर विदेशी नागरिकों से संदिग्ध योगदान प्राप्त हुआ था और यह भविष्य की परियोजनाओं के लिए एडवांस के रूप में प्राप्त 15.09 करोड़ रुपये के राजस्व के रूप में मान्यता देने में विफल रहा था।
 

एनजीओ के वकील ने दलील दी कि अधिकारियों ने याचिकाकर्ता के साथ सर्वेक्षण रिपोर्ट साझा नहीं की और इसके खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही पर सीमित रोक है। याचिकाकर्ता ने कहा कि उसके खिलाफ लगाया गया यह आरोप कि उसे विदेशी नागरिकों से चंदा मिला है जो संदिग्ध है, गलत है क्योंकि योगदानकर्ताओं का विवरण और नाम मुहैया कराया गया है। पीठ ने कहा कि आकलन अधिकारी (एओ) का यह कहना कि 15.09 करोड़ रुपये को आय के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए थी, पूरी तरह से गलत है, क्योंकि ये ए़डवांस के रूप में था था जिनका उपयोग भविष्य की वस्तुओं के लिए किया जाना था और इसलिए यह वह आय नहीं थी जो विचाराधीन अवधि में उत्पन्न हुई थी।
 

आयकर विभाग के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता एनजीओ का एफसीआरए लाइसेंस खराब चल रहा है और याचिकाकर्ता इस अदालत में एक अन्य पीठ के समक्ष अपने अधिकार के लिए लड़ रहा है।

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