सायरस मिस्त्री के ऑफिस की सफाई: टाटा ग्रुप के खिलाफ नहीं गए SC
टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री के दफ्तर ने टाटा ग्रुप के खिलाफ कैविएट दाखिल करने की बात को नकारा है। दफ्तर की ओर से कहा गया है कि ऐसा कुछ नहीं किया गया है।
इससे पूर्व कहा गया था कि टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद सायरस मिस्त्री ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल किया। कंपनी से जुड़े सूत्रों ने बताया गया था कि सायरस ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में रतन टाटा, टाटा ग्रुप और टाटा ट्रस्ट के खिलाफ कैविएट दाखिल किया। इसके अलावा टाटा की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट, बॉम्बे हाईकोर्ट और NCLT में सायरस मिस्त्री को अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ कोई कदम उठाने से रोकने के लिए कैविएट दायर किया है।
ये भी जानकारी सामने आयी थी कि चार कैविएट में से तीन कैविएट मिस्त्री ने रतन टाटा, टाटा सन्स और सर दोराबजी ट्रस्ट के खिलाफ दायर की है। वहीं एक कैविएट साइरस इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से रतन टाटा और टाटा सन्स के खिलाफ दाखिल की गई है।
गौरतलब है कि चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा था कि कंपनी कानून का पालन न करते हुए उन्हें 15 दिन का भी नोटिस नहीं दिया गया। इससे पूर्व टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के सबसे बड़े शेयरधारक शपूरजी पालोंजी ने कहा था कि मिस्त्री को पद से हटाए जाने से संबंधित परिस्थितियों का वह अभी अध्ययन कर रहे हैं। गौरतलब है कि सायरस कंपनी में शपूरजी के नॉमिनी हैं और शपूरजी की टाटा संस में सर्वाधिक 18.4 फीसदी हिस्सेदारी है।
शपूरजी ने कहा कि जब जरूरी होगा तब वह अपनी योजना के बारे में बयान जारी करेंगे। शपूरजी समूह ने ईमेल से भेजे गए अपने एक बयान में कहा कि न तो एसपी समूह ने और न ही सायरस मिस्त्री ने अभी तक कोई बयान दिया है।
Cyrus Mistry files a caveat in SC against Ratan tata, Tata sons and Sir Dorabji trust against his sacking order.
— ANI (@ANI_news) October 25, 2016
टाटा में हुए फैसले ने सबको चौंकाया
नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक बनाने वाली 100 अरब डॉलर की कंपनी टाटा ग्रुप ने अपने अध्यक्ष सायरस मिस्त्री को बर्खास्त कर कॉर्पोरेट जगत को चौंका दिया। कंपनी के बोर्ड ने चार साल से अध्यक्ष का पद संभाल रहे 48 वर्षीय मिस्त्री की छुट्टी कर इसकी अंतरिम कमान एक बार फिर से रतन टाटा को सौंप दी है।
इसके साथ ही मिस्त्री द्वारा 2013 में गठित समूह कार्यकारी परिषद (जीईसी) को भी भंग कर दिया गया है।
बोर्ड के फैसले से नाराज ग्रुप की सबसे बड़ी हिस्सेदार कंपनी शापूरजी पलोनजी ने अवैध करार देते हुए हाईकोर्ट जाने की धमकी दी थी। लेकिन सायरस हाईकोर्ट के बजाय सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए।