अब टाटा को ड्राइव करेंगे चंद्रशेखरन, सबसे आगे ले जाने किया वादा
टाटा समूह में चेयरमैन पद को लेकर लंबे समय से चली आ रही उहापोह मंगलवार को खत्म हो गई है। वर्षों से टाटा समूह से जुड़े एन. चंद्रशेखरन ने समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन का कार्यभार संभाल लिया है।
इस चयन के साथ ही इस समूह ने अपनी 150 सालों से चली आ रही परंपरा भी तोड़ी है। चंद्रशेखरन कंपनी के पहले गैर पारसी चेयरमैन बने हैं। सायरस मिस्त्री की विदाई के बाद टाटा संस के बोर्ड में जगह दिए जाने के बाद से ही उनके चेयरमैन बनने के कयास लगाए जा रहे थे।
टीसीएस का शानदार प्रदर्शन उनके चयन की अहम वजह रही है। चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टीसीएस की आय और मुनाफा 3 गुना से ज्यादा बढ़ा। इसके अलावा रतन टाटा से नजदीकी और नेतृत्व क्षमता चंद्रशेखरन के चुनाव की बड़ी वजह रही हैं। टीसीएस में उनकी जगह राजेश गोपीनाथन को नया सीईओ बनाया गया है।
'सभी क्षेत्रों में समूह को रखेंगे आगे'
चंद्रशेखरन आज सुबह सवा नौ बजे टाटा संस के मुख्यालय पहुंचे और कुछ ही मिनटों में रतन टाटा और निदेशक मंडल के अन्य सदस्य भी वहां पहुंच गये। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने कहा कि वह समूह को सभी कारोबारी क्षेत्रों में सबसे आगे रखेंगे।
चंद्रशेखरन ने 79 वर्षीय रतन टाटा का स्थान लिया है। पिछले साल 24 अक्टूबर को समूह के तत्कालीन चेयरमैन सायरस मिस्त्री को अचानक पद से हटाये जाने के बाद रतन टाटा को फिर से टाटा संस की कमान संभालनी पड़ी थी। टाटा समूह के मुख्यालय ''बांबे हाउस'' के बाहर संवाददाताओं से बात करते हुये चंद्रशेखरन ने कहा, ''हम मिलकर अपने कारोबार के सभी क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिये काम करेंगे, हम सबसे आगे होंगे.. किसी का अनुसरण नहीं करेंगे।''
चंद्रशेखर ने नमक से लेकर साफ्टवेयर क्षेत्र में कार्यरत 103 अरब डॉलर के टाटा समूह के चेयरमैन का कार्यभार संभालने के मौके पर उपस्थित संवाददाताओं से कहा, ''यह जिम्मेदारी संभालना मेरे लिये सौभाग्य और सम्मान की बात है.. मैं अपनी इस नई भूमिका में आने वाले वर्षों में समूह की सेवा के लिये तैयार हूं, इसके लिये मैं सभी का समर्थन चाहता हूं ताकि हम सभी मिलकर काम कर सकें।''
सूत्रों ने बताया कि टाटा संस के नये चेयरमैन ने अपना काम शुरू करते हुये बांबे हाउस में टाटा संस निदेशक मंडल की बैठक की अध्यक्षता की। चंद्रशेखरन तीन दशक से टीसीएस से जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने टीसीएस को देश की सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी बनाने में काफी योगदान किया। उनके नेतृत्व में टीसीएस समूह की सबसे बेशकीमती कंपनी बन गई।
जाते-जाते टीसीएस निवेशकों को तोहफा दे गए चंद्रशेखरन
चंद्रशेखरन ने इससे पहले सोमवार को टीसीएस के निदेशक मंडल की अध्यक्षता की जिसमें उन्होंने किसी कंपनी द्वारा अपने शेयरों की 16,000 करोड़ रुपये की सबसे बड़ी पुनखर्रीद योजना की घोषणा की। चंद्रशेखरन की अगुवाई में टीसीएस ने एक शेयर का मूल्य 2850 रुपये तय किया है जिसका मतलब है कि निवेशकों की झोली में एक शेयर पर 14 फीसदी का मुनाफा हो रहा है।
गौरतलब है कि चंद्रशेखरन समूह के ऐसे पहले चेयरमैन हैं जो टाटा-परिवार से नहीं जुड़े हैं। चंद्रशेखरन ने ऐसे समय में टाटा संस के चेयरमैन का कार्यभार संभाला है जब समूह में सायरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से अचानक हटाये जाने के बाद वाद-विवाद का दौर चल रहा है।
मिस्त्री ने समूह की कार्यप्रणाली और रतन टाटा के खिलाफ कई तरह के आरोप लगाये हैं। हालांकि, टाटा ने सभी आरोपों को खारिज किया है। रतन टाटा के अंतरिम चेयरमैन रहते सायरस मिस्त्री को समूह की विभिन्न कंपनियों के निदेशक मंडल से और अंत में समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के निदेशक मंडल से भी हटा दिया गया। उद्योग जगत के पारखी लोगों के मुताबिक टाटा समूह का काफी कुछ दारोमदार टीसीएस और ब्रिटेन की अधिग्रहित वाहन निर्माता कंपनी जेएलआर पर निर्भर है। टाटा समूह की अन्य कंपनियां जैसे कि टाटा स्टील, टाटा मोटर्स और होटल श्रृंखला का कारोबार संबंधित क्षेत्रों में उस स्तर पर नहीं हैं।