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कोरोना वायरस के खौफ से सहमा आगरा का जूता कारोबार, चीन से कच्चे माल का आयात ठप
Fri, 07 Feb 2020 12:16 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 07 Feb 2020 12:16 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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कोरोना वायरस के खौफ से आगरा का जूता कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। चीन से आगरा में आने वाला जूता बनाने का कच्चा माल फिलहाल नहीं आ रहा है। इसकी वजह कोरोना वायरस का डर है। आयात ठप होने का असर अगले महीने से उत्पादन पर पड़ सकता है, अभी तो निर्यात के ऑर्डर पूरा करने के लिए रखे गए स्टॉक से काम चलाया जा रहा है।
हालात जल्द नहीं सुधरे तो नए आर्डर को पूरा कर पाना मुश्किल होगा। दरअसल, आगरा जूता निर्यात का बड़ा सेंटर है लेकिन उत्पादन काफी हद तक चीन पर निर्भर है क्योंकि वहां से लगभग 60 फीसदी कच्चा माल आता है। इनमें रेगजीन, शाइनिंग बोर्ड, बक्कल आदि शामिल हैं। छोटे उद्यमी टॉप ऑफ द शू ( जूते का ऊपर का पूरा हिस्सा ) मंगाते हैं।
सोल के साथ इसे जोड़कर जूता आगरा में तैयार किया जाता है। दो सालों से कुछ लोगों ने ताइवान से कच्चा माल मंगाना शुरू किया है। हालांकि ताइवान में चीन से आता है, इसलिए वहां से भी फिलहाल दिक्कत है। आगरा शू फैक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष गागनदास रमानी ने बताया कि फिलहाल स्टॉक से काम चल रहा है लेकिन कोरोना का असर जारी रहा तो आगे दिक्कत आ सकती है।
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हालात जल्द नहीं सुधरे तो नए आर्डर को पूरा कर पाना मुश्किल होगा। दरअसल, आगरा जूता निर्यात का बड़ा सेंटर है लेकिन उत्पादन काफी हद तक चीन पर निर्भर है क्योंकि वहां से लगभग 60 फीसदी कच्चा माल आता है। इनमें रेगजीन, शाइनिंग बोर्ड, बक्कल आदि शामिल हैं। छोटे उद्यमी टॉप ऑफ द शू ( जूते का ऊपर का पूरा हिस्सा ) मंगाते हैं।
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सोल के साथ इसे जोड़कर जूता आगरा में तैयार किया जाता है। दो सालों से कुछ लोगों ने ताइवान से कच्चा माल मंगाना शुरू किया है। हालांकि ताइवान में चीन से आता है, इसलिए वहां से भी फिलहाल दिक्कत है। आगरा शू फैक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष गागनदास रमानी ने बताया कि फिलहाल स्टॉक से काम चल रहा है लेकिन कोरोना का असर जारी रहा तो आगे दिक्कत आ सकती है।
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दिल्ली के जूता कारोबार पर भी असर
गागन दास रमानी ने बताया कि दिल्ली में जो सस्ता जूता बिकता है, वह दिल्ली से आता है। यह आयात किया जाता है। बाद में इसे अलग अलग ब्रांड से बेचा जाता है। इसका भी आयात बंद हो गया है।
गुजरात, महाराष्ट्र, दक्षिण है विकल्प
गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण के राज्यों से माल लिया जा सकता है लेकिन यह चीन के कच्चे माल के मुकाबले 30 फीसदी महंगा है। नए आम बजट में कच्चे माल पर आयात शुल्क 25 से बढ़ाकर 35 फीसदी किया गया है। इससे रेट का अंतर कुछ कम हुआ है।
गुजरात, महाराष्ट्र, दक्षिण है विकल्प
गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण के राज्यों से माल लिया जा सकता है लेकिन यह चीन के कच्चे माल के मुकाबले 30 फीसदी महंगा है। नए आम बजट में कच्चे माल पर आयात शुल्क 25 से बढ़ाकर 35 फीसदी किया गया है। इससे रेट का अंतर कुछ कम हुआ है।