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Women's Day Special: विकसित भारत के लिए श्रमबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना जरूरी; पढ़ें खास रिपोर्ट

Thu, 06 Mar 2025 12:43 PM IST
अभिषेक दीक्षित द बोनस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
द बोनस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 06 Mar 2025 12:43 PM IST
सार

केंद्रीय श्रम सचिव सुमिता डावरा ने कहा कि महिला उद्यमियों के लिए उद्यम पूंजी सहायता बहुत महत्वपूर्ण है। महिलाओं को नेतृत्व और निर्णय लेने वाली भूमिकाओं के लिए मार्गदर्शन दिया जाना चाहिए, जहां आवश्यकता है, वहां महिलाओं के लिए मार्गदर्शन भी प्रदान करना चाहिए।

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Women's Day Special: Increasing women participation in labour force is necessary for a developed India
Women's Day Special - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है। केंद्रीय श्रम सचिव सुमिता डावरा का कहना है कि 2047 तक कार्यबल में 70 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है। भविष्य में ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें महिलाओं की भागीदारी की काफी संभावनाएं हैं। डावरा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत महिलाओं के लिए शिक्षा की पहुंच को आसान और व्यापक बनाने का भी सुझाव दिया।

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उद्यम पूंजी सहायता में हो विस्तार
केंद्रीय श्रम सचिव सुमिता डावरा ने कहा कि महिला उद्यमियों के लिए उद्यम पूंजी सहायता बहुत महत्वपूर्ण है। महिलाओं को नेतृत्व और निर्णय लेने वाली भूमिकाओं के लिए मार्गदर्शन दिया जाना चाहिए, जहां आवश्यकता है, वहां महिलाओं के लिए मार्गदर्शन भी प्रदान करना चाहिए।
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महिलाओं के आगे हैं चुनौतियां
डावरा ने सेवा क्षेत्र में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे पूर्वाग्रह हो सकते हैं, जो उन्हें कार्यबल में प्रवेश करने से रोकते हैं। नेतृत्व की भूमिकाओं में भी वेतन असमानताएं हो सकती हैं, नौकरी की सुरक्षा संबंधी चिंताएं और घरेलू और पेशेवर जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने जैसे मुद्दे हो सकते हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि लगभग 45 प्रतिशत महिलाएं बच्चों की देखभाल और घरेलू प्रतिबद्धताओं को कार्यबल में भाग न लेने का कारण बताती हैं, लेकिन पिछले छह साल में आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी हैं।
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महिलाओं की आय में वृद्धि
शिक्षित महिलाओं के कार्यबल में शामिल होने की प्रवृत्ति बढ़ रही है और वेतन असमानता को लेकर कुछ चुनौतियों के बावजूद उनकी आय में भी लगातार वृद्धि हो रही है। आज हम महिलाओं को सेवा क्षेत्र, टेक्नोलॉजी, वित्त और विनिर्माण क्षेत्र में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देख रहे हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले छह वर्षों में महिलाओं के लिए श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) दोगुना हो गया है।


श्रमिक जनसंख्या अनुपात में सुधार
श्रमिक जनसंख्या अनुपात 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं के लिए 2017-18 में 22 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 40.3 प्रतिशत हो गया। महिलाओं के लिए श्रमबल भागीदारी दर (एलएफपीआर) में भी इस दौरान वृद्धि हुई है। महिलाओं के लिए श्रमबल भागीदारी दर 23 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 42 प्रतिशत हो गई है। यह आर्थिक परिदृश्य में एक उल्लेखनीय बदलाव है। साथ ही, अधिक स्वरोजगार वाली महिलाएं कार्यबल में शामिल हो रही हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि स्नातकोत्तर स्तर और उससे ऊपर की शिक्षा प्राप्त कुल महिलाओं में से 40 प्रतिशत 2023-24 में काम कर रही थीं, जबकि छह साल पहले यह आंकड़ा लगभग 35 प्रतिशत था।

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