Vivo PMLA Case: लावा के अधिकारी समेत चार आरोपितों की हिरासत अवधि तीन दिन बढ़ी; ईडी ने की थी ये मांग
Vivo PMLA Case: वीवो धन शोधन मामले के चारों आरोपियों- लावा इंटरनेशनल कंपनी के प्रबंध निदेशक हरि ओम राय, चीनी नागरिक गुआंगवेन उर्फ एंड्रयू कुआंग और चार्टर्ड अकाउंटेंट नितिन गर्ग और राजन मलिक को हिरासत की अवधि समाप्त होने पर शुक्रवार को अदालत में पेश किया गया। अभियोजन पक्ष ने उनकी हिरासत बढ़ाने की मांग की ताकि उनसे आगे पूछताछ की जा सके।
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने लावा इंटरनेशनल मोबाइल कंपनी के प्रबंध निदेशक और एक चीनी नागरिक समेत चीनी स्मार्टफोन निर्माता कंपनी वीवो के खिलाफ धनशोधन के एक मामले में गिरफ्तार चार लोगों की हिरासत 10 दिन बढ़ाने की शुक्रवार को मांग की। जिसके बाद कोर्ट ने आरोपियों की ईडी हिरासत तीन दिन बढ़ा दी
#WATCH | Delhi: Chinese nationals accused in Vivo money laundering case were brought to Patiala House Court.
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Enforcement Directorate (ED) has arrested four accused including a Chinese national linked with Chinese mobile company Vivo under the PMLA Act. pic.twitter.com/T6DYPkkHY9विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) October 13, 2023
इससे पहले, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंद्र कुमार जांगला ने 10 अक्टूबर को आरोपियों को तीन दिन के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया था। चारों आरोपियों- लावा इंटरनेशनल कंपनी के प्रबंध निदेशक हरि ओम राय, चीनी नागरिक गुआंगवेन उर्फ एंड्रयू कुआंग और चार्टर्ड अकाउंटेंट नितिन गर्ग और राजन मलिक को हिरासत की अवधि समाप्त होने पर शुक्रवार को अदालत में पेश किया गया।
अभियोजन पक्ष ने उनकी हिरासत बढ़ाने की मांग की ताकि उनसे आगे पूछताछ की जा सके। इसमें कहा गया है कि उनका 13 गवाहों से आमना-सामना कराया गया और कई उपकरणों से डिजिटल डेटा निकाला गया।
बचाव पक्ष के वकील ने एजेंसी की याचिका का विरोध करते हुए दावा किया कि ईडी प्रक्रियाओं का घोर उल्लंघन कर रहा है। अदालत हिरासत बढ़ाने के ईडी के आवेदन पर जल्द ही आदेश पारित कर सकती है। चारों आरोपियों को धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया था। एजेंसी ने पिछले साल जुलाई में कंपनी और उससे जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापा मारा था और दावा किया था कि उसने चीनी नागरिकों और कई भारतीय कंपनियों से जुड़े एक बड़े धनशोधन रैकेट का भंडाफोड़ किया है। ईडी ने तब आरोप लगाया था कि भारत में करों के भुगतान से बचने के लिए वीवो ने 62,476 करोड़ रुपये अवैध रूप से चीन भेजे थे।