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दावा: अमेरिकी अभियोजकों ने अदालत में दाखिल किया रिश्वत का ब्योरा, सागर के मोबाइल फोन में घूस का पूरा विवरण
Sat, 23 Nov 2024 07:02 AM IST
शुभम कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: शुभम कुमार
Updated Sat, 23 Nov 2024 07:02 AM IST
सार
अमेरिकी अभियोजकों ने कोर्ट में दाखिल दस्तावेज में इस हिसाब को ‘ब्राइब नोट्स’ यानी रिश्वत का चिट्ठा नाम दिया है। इन दस्तावेजों में यह भी कहा गया कि सागर ने अनुबंध हासिल करने के लिए प्रति मेगावाट रिश्वत की दर तय कर रखी थी। इनमें सागर के एक व्हाट्सएप चैट का भी जिक्र है, जिसमें पूछा गया कि 2020 से रिश्वत का खेल कैसा चल रहा है।
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उद्योगपति गौतम अदाणी पर गंभीर आरोप
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अमेरिकी न्याय विभाग ने दिग्गज भारतीय कारोबारी गौतम अदाणी व अन्य पर सौर ऊर्जा अनुबंधों के लिए 2,236 करोड़ रुपये की रिश्वत देने के आरोपों के समर्थन में कुछ दस्तावेज अदालत को सौंपे हैं। इनमें बताया है कि गौतम अदाणी के भतीजे सागर अदाणी रिश्वत की पाई-पाई का हिसाब अपने मोबाइल फोन में रखते थे। किस अधिकारी को कितनी रिश्वत दी गई, उसके बदले में वह अपने क्षेत्र के लिए कितनी मेगावाट सौर ऊर्जा खरीदेगा, 2020 से अब तक का पूरा चिट्ठा सागर के मोबाइल नोट्स में सुरक्षित था।
दाखिल दस्तावेज में रिश्वत का चिट्ठा दिया नाम
अमेरिकी अभियोजकों ने कोर्ट में दाखिल दस्तावेज में इस हिसाब को ‘ब्राइब नोट्स’ यानी रिश्वत का चिट्ठा नाम दिया है। इन दस्तावेजों में यह भी कहा गया कि सागर ने अनुबंध हासिल करने के लिए प्रति मेगावाट रिश्वत की दर तय कर रखी थी। इनमें सागर के एक व्हाट्सएप चैट का भी जिक्र है, जिसमें पूछा गया कि 2020 से रिश्वत का खेल कैसा चल रहा है। जवाब में सागर ने बताया, हां...पर इन बातों को छिपाना बहुत मुश्किल है। अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग ने भी गौतम, सागर व अन्य के खिलाफ एक समानांतर सिविल मामला दायर किया है। एजेंसी
सागर ने ही तैयार किया अदाणी ग्रीन का सौर व पवन ऊर्जा पोर्टफोलियो ब्राउन यूनिवर्सिटी, आइवी लीग कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद सागर अदाणी 2015 में कारोबार में शामिल हुए। अदाणी ग्रीन एनर्जी के संपूर्ण सौर व पवन ऊर्जा पोर्टफोलियो को 30 वर्षीय सागर ने तैयार किया है। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक वर्तमान में अदाणी ग्रीन एनर्जी के सभी रणनीतिक और वित्तीय मामले सागर अदाणी के नियंत्रण में हैं। अमेरिकी अदालत में मामला बीते दो वर्षों में अदाणी समूह के लिए दूसरा बड़ा झटका है।
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अमेरिकी अभियोजकों का दावा
अमेरिकी अभियोजकों ने दावा किया कि सागर ने अपने मोबाइल फोन में जो लेखा-जोखा दर्ज किया है उसमें सरकारी अधिकारियों के नाम संक्षिप्त शीर्षकों से कोड में लिखे गए हैं।
अदाणी ग्रीन ने कमाए थे 422 करोड़
अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (एसईसी) की शिकायत पर दायर केस के अनुसार, वर्ष 2020 की शुरुआत में सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने अदाणी ग्रीन एनर्जी और एक अन्य कंपनी एज्यूर पावर ग्लोबल को 12-गीगावाट सौर ऊर्जा परियोजना के लिए अनुबंध दिया था। सागर संचालित अदाणी ग्रीन एनर्जी के लिए यह एक बड़ा कदम था। एसईसी शिकायत के अनुसार, उस समय तक कंपनी ने अपने इतिहास में करीब 422 करोड़ (50 मिलियन) कमाए थे और कंपनी ने उस समय तक इतना लाभ नहीं कमाया था। हालांकि बाद में रुकावटें आने लगीं।
2022 में भेजा था एज्यूर को समान्य पत्र
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, 2022 में जांच शुरू करने के बाद सीईसी ने 17 मार्च, 2022 को एज्यूर को एक सामान्य जांच पत्र भेजा था। एज्यूर उस समय न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध था। पत्र में उससे हालिया अनुबंधों के बारे में पूछा गया था और पूछा गया था कि क्या विदेशी अधिकारियों ने कोई मूल्यवान चीज मांगी है।
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दाखिल दस्तावेज में रिश्वत का चिट्ठा दिया नाम
अमेरिकी अभियोजकों ने कोर्ट में दाखिल दस्तावेज में इस हिसाब को ‘ब्राइब नोट्स’ यानी रिश्वत का चिट्ठा नाम दिया है। इन दस्तावेजों में यह भी कहा गया कि सागर ने अनुबंध हासिल करने के लिए प्रति मेगावाट रिश्वत की दर तय कर रखी थी। इनमें सागर के एक व्हाट्सएप चैट का भी जिक्र है, जिसमें पूछा गया कि 2020 से रिश्वत का खेल कैसा चल रहा है। जवाब में सागर ने बताया, हां...पर इन बातों को छिपाना बहुत मुश्किल है। अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग ने भी गौतम, सागर व अन्य के खिलाफ एक समानांतर सिविल मामला दायर किया है। एजेंसी
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सागर ने ही तैयार किया अदाणी ग्रीन का सौर व पवन ऊर्जा पोर्टफोलियो ब्राउन यूनिवर्सिटी, आइवी लीग कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद सागर अदाणी 2015 में कारोबार में शामिल हुए। अदाणी ग्रीन एनर्जी के संपूर्ण सौर व पवन ऊर्जा पोर्टफोलियो को 30 वर्षीय सागर ने तैयार किया है। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक वर्तमान में अदाणी ग्रीन एनर्जी के सभी रणनीतिक और वित्तीय मामले सागर अदाणी के नियंत्रण में हैं। अमेरिकी अदालत में मामला बीते दो वर्षों में अदाणी समूह के लिए दूसरा बड़ा झटका है।
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अमेरिकी अभियोजकों का दावा
अमेरिकी अभियोजकों ने दावा किया कि सागर ने अपने मोबाइल फोन में जो लेखा-जोखा दर्ज किया है उसमें सरकारी अधिकारियों के नाम संक्षिप्त शीर्षकों से कोड में लिखे गए हैं।
- 25 फरवरी, 2021 को एक व्हाट्सएप चैट में जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ छत्तीसगढ़ को ग्रीन पावर का संभावित खरीदार बताया। सागर ने लिखा, आपको बता दें कि हमने मंजूरी के लिए कीमत दोगुनी कर दी है।
- सागर ने जुलाई 2021 में ओडिशा के सरकारी अफसरों को 500 मेगावाट बिजली खरीदने के लिए राजी होने के बदले हजारों डॉलर की रिश्वत देने की बात लिखी है।
- अगस्त 2021 में गौतम व सागर ने कई बैठकों के बाद 7,000 मेगावाट के बिजली सौदे के बदले में सीएम सहित आंध्र प्रदेश सरकार के अफसरों को घूस की पेशकश की। रिश्वत 1,750 करोड़ रुपये (लगभग 20 करोड़ डॉलर) थी।
- सागर खेल में शामिल अन्य लोगों से घूस में दी रकम को वापस वसूलने में भी अहम भूमिका निभाता था।
अदाणी ग्रीन ने कमाए थे 422 करोड़
अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (एसईसी) की शिकायत पर दायर केस के अनुसार, वर्ष 2020 की शुरुआत में सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने अदाणी ग्रीन एनर्जी और एक अन्य कंपनी एज्यूर पावर ग्लोबल को 12-गीगावाट सौर ऊर्जा परियोजना के लिए अनुबंध दिया था। सागर संचालित अदाणी ग्रीन एनर्जी के लिए यह एक बड़ा कदम था। एसईसी शिकायत के अनुसार, उस समय तक कंपनी ने अपने इतिहास में करीब 422 करोड़ (50 मिलियन) कमाए थे और कंपनी ने उस समय तक इतना लाभ नहीं कमाया था। हालांकि बाद में रुकावटें आने लगीं।
2022 में भेजा था एज्यूर को समान्य पत्र
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, 2022 में जांच शुरू करने के बाद सीईसी ने 17 मार्च, 2022 को एज्यूर को एक सामान्य जांच पत्र भेजा था। एज्यूर उस समय न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध था। पत्र में उससे हालिया अनुबंधों के बारे में पूछा गया था और पूछा गया था कि क्या विदेशी अधिकारियों ने कोई मूल्यवान चीज मांगी है।