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निवेश-बचत: ट्रंप के टैरिफ अटैक में अच्छा पैसा बनाने का अवसर, इन शेयरों में कमा सकते हैं मुनाफा

Mon, 04 Aug 2025 05:05 AM IST
दीपक कुमार शर्मा रचित खंडेलवाल, रिसर्च हेड, बीएनके सिक्योरिटीज
रचित खंडेलवाल, रिसर्च हेड, बीएनके सिक्योरिटीज Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 04 Aug 2025 05:05 AM IST
सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ अटैक से घरेलू शेयर बाजार में बेचैनी बढ़ गई है। इससे रत्न-आभूषण, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे श्रम आधारित निर्यातक सेक्टर पर सीधा असर पड़ेगा। इन सेक्टर्स से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में दबाव बढ़ सकता है। इस दौरान कुछ चुनिंदा शेयरों में निवेश से अच्छा पैसा बनाया जा सकता है।
 

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US President Donald Trump tariff attack increased uneasiness in domestic stock market
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AdobeStock

विस्तार

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव ने एक नया मोड़ ले लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर 25 फीसदी टैरिफ यानी आयात शुल्क दिया है। यह निर्णय न सिर्फ द्विपक्षीय व्यापार पर असर डालेगा, बल्कि भारतीय कंपनियों की अमेरिका में प्रतिस्पर्धा को भी कमजोर करेगा। इसके अलावा, रूस से सस्ता तेल और रक्षा उपकरण खरीदने को लेकर अमेरिका की जुर्माना लगाने की चेतावनी से निवेशकों के बीच अनिश्चितता और बढ़ गई है। ऐसे हालात में शेयर बाजार और निर्यात आधारित सेक्टरों पर दबाव बढ़ सकता है। इस दौरान कुछ चुनिंदा शेयरों में निवेश कर अच्छा पैसा बनाया जा सकता है।

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बाजार में बेचैनी की बड़ी वजह
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल 186 अरब डॉलर का व्यापार हुआ, जिसमें भारत ने 86.5 अरब डॉलर का निर्यात किया और अमेरिका से 45.3 अरब डॉलर का आयात हुआ। इससे भारत को 41 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष मिला, जो अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा प्लस पॉइंट है। अब यह अधिशेष संकट में है। दरअसल, अन्य एशियाई देश वियतनाम, थाईलैंड और बांग्लादेश पर कम टैरिफ लगाया गया है। अब ये देश अमेरिका में भारतीय उत्पादों की तुलना में सस्ते विकल्प के रूप में उभर सकते हैं।
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इन शेयरों में कमा सकते हैं मुनाफा
टैरिफ टेंशन से घरेलू शेयर बाजार में दबाव देखा जा रहा है। लेकिन, बाजार की हर बड़ी गिरावट कमाई का मौका लेकर आती है। मौजूदा माहौल में 5 शेयर अगले एक साल में 15 से 25 फीसदी तक रिटर्न दे सकते हैं। ये सभी शेयर आईटी सेक्टर के हैं, जिनकी अमेरिकी बाजार पर ज्यादा निर्भरता नहीं है।     

  • यहां लगा सकते हैं दांव...एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा, एलएंडटी टेक सर्विसेज, परसिस्टेंट सिस्टम्स और जेनसर टेक्नोलॉजीज।

सरकार को इस संकट से निपटने के लिए व्यापार वार्ताओं को प्राथमिकता देनी होगी, साथ ही उद्योगों को समर्थन देने के लिए रणनीतिक आर्थिक उपायों की योजना बनानी होगी। निवेशकों के लिए यह समय सतर्क, लेकिन नए अवसरों से भरा है।

बाजार में मिल रहे क्या संकेत?
ट्रंप के टैरिफ बढ़ाने के फैसले के बाद शेयर बाजार में हल्की अस्थिरता देखी जा रही है। विशेष रूप से उन कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ा है, जो निर्यात पर निर्भर हैं। जैसे टेक्सटाइल, जूलरी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर। निवेशकों को आशंका है कि बढ़ती लागत और घटती मांग से इन क्षेत्रों की कंपनियों की कमाई प्रभावित हो सकती है। वहीं, फार्मा और एफएमसीजी जैसी घरेलू मांग आधारित कंपनियों में अपेक्षाकृत स्थिरता बनी है। बाजार फिलहाल अमेरिका-भारत के बीच संभावित व्यापार वार्ता पर नजर बनाए हुए है, जिससे आगे की दिशा तय होगी।

नए मौके के लिए पोर्टफोलियो की समीक्षा
निवेशकों को इस समय पोर्टफोलियो की समीक्षा कर उन कंपनियों पर फोकस करना चाहिए, जिनकी अमेरिकी बाजार पर निर्भरता कम है या जो घरेलू मांग से संचालित होती हैं। एफएमसीजी और आईटी जैसे सेक्टर्स में स्थिरता बनी रह सकती है। अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित कंपनियों की कमाई और मैनेजमेंट कमेंट्री पर नजर रखना जरूरी है। लंबी अवधि के निवेशक बाजार की गिरावट को नए अवसर की तरह देख सकते हैं।

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इन सेक्टर्स को सबसे बड़ा झटका

  • रत्न एवं आभूषण: अमेरिका का रत्न-आभूषण बाजार 10 अरब डॉलर का है। अमेरिका भारतीय हीरों और स्वर्ण आभूषणों का सबसे बड़ा खरीदार है। भारत पर टैरिफ बढ़ने से सप्लाई चेन बाधित हो सकती है। सूरत जैसे हब में नौकरियों पर खतरा मंडरा सकता है। अमेरिकी ग्राहकों को जूलरी महंगी मिलेगी, जिससे मांग घट सकती है।
  • टेक्सटाइल: भारत का टेक्सटाइल सेक्टर करोड़ों लोगों को रोजगार देता है। वॉलमार्ट, गैप और टारगेट जैसे बड़े अमेरिकी ब्रांड भारत को बड़े पैमाने पर ऑर्डर देते हैं। टैरिफ बढ़ने की वजह से अमेरिकी कंपनियां अपने ऑर्डर बांग्लादेश, वियतनाम या कंबोडिया को स्थानांतरित कर सकती हैं। इससे भारत के तिरुपुर और लुधियाना जैसे शहरों की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर होगा।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स: भारत चीन को पछाड़ कर अमेरिका को सबसे बड़ा स्मार्टफोन निर्यातक बन गया है। टैरिफ की मार से एपल, सैमसंग जैसी कंपनियां भारत में असेंबली यूनिट बढ़ा रही थीं, लेकिन लागत बढ़ने से भारत की प्रतिस्पर्धा कम हो सकती है। निवेश योजनाओं पर भी असर। 
  • फार्मा: नए टैरिफ का भारत के फार्मा सेक्टर पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा। अमेरिका का फार्मा मार्केट 8 अरब डॉलर का है, जिसे भारत बड़ी मात्रा में सस्ती जेनरिक दवाएं निर्यात करता है। यह सेक्टर अपेक्षाकृत सुरक्षित है, क्योंकि जीवनरक्षक दवाओं की मांग स्थिर रहती है।
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