मिलने वाला है बड़ा झटकाः रेल, सड़क से सफर करना होगा और महंगा, GST बना सबसे बड़ा कारण
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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली लागू होने के बाद नेशनल हाईवे पर टोल टैक्स और ट्रेन का किराया ज्यादा चुकाना पड़ सकता है। इसकी वजह है जीएसटी लागू होने के बाद राजमार्ग व रेलवे की परियोजनाओं पर लागत में पांच से 10 फीसदी का इजाफा हो गया है।
इस बढ़ोतरी से सिर्फ सरकारी क्षेत्र ही प्रभावित हुए हैं क्योंकि निजी क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपरों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ मिल जाता है, इसलिए उन पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ता है।
देना पड़ता है 18 फीसदी जीएसटी
केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में वित्तीय मामलों को देखने वाले एक अधिकारी ने जीएसटी के बाद परियोजना लागत से संबंधित सवाल पर कहा कि अब मंत्रालय की परियोजना लागत करीब दस फीसदी बढ़ गई है।
क्यों हो रहा है ऐसा, इस पर उन्होंने बताया कि जीएसटी प्रणाली से पहले सिविल वर्क पर छह फीसदी की दर से सर्विस टैक्स लगता था, जो कि जीएसटी में बढ़ कर 18 फीसदी हो गया है। लेकिन अच्छी बात यह है कि इसमें इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा मिल गई है इसलिए वैसे डेवलपरों के लिए आसानी हो गई है पर सरकारी क्षेत्र को इसका कोई लाभ नहीं है।
क्यों लाभ नहीं है, इस सवाल पर उन्होंने बताया कि सरकारी विभाग किसी चीज की बिक्री नहीं करती है। जब बिक्री नहीं होगी तो खरीद पर चुकाये गए कर का लाभ कैसे ले पाएंगे।
एनएचएआई पर करीब पांच फीसदी का बोझ
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के सदस्य, पीपीपी, नीरज वर्मा का कहना है कि जीएसटी की वजह से उनकी परियोजनाओं की लागत पर चार से पांच फीसदी का असर पड़ा है। उनका कहना है कि अब एनएचएआई की परियोजनाओं में स्टील, सीमेंट आदि का उपयोग काफी बढ़ रहा है।
जीएसटी से पहले सीमेंट या स्टील पर 12-14 फीसदी का केन्द्रीय उत्पाद शुल्क लगता था जबकि विभिन्न राज्यों में 10 से 15 फीसदी का वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) लगता था। मतलब इस पर कुल मिला कर 22 से 29 फीसदी का कर चुकाना पड़ता था।
इसके अलावा कई कमोडिटी पर कैसकेडिंग इफेक्ट पड़ता था मतलब टैक्स पर टैक्स। जीएसटी लगने से यह सब खत्म हो गया। इसलिए अभी चार से पांच फीसदी का इंपेक्ट पड़ा है। हालांकि वह कहते हैं कि उन्हें सड़क बनाने के लिए पैसा सरकार से ही मिलता है और टैक्स का पैसा सरकार के खजाने में ही जाता है, इसलिए कोई दिक्कत की बात नहीं है।
रेल परियोजनाओं पर बढ़ गया 10 फीसदी का बोझ
भारतीय रेल की लेखा सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद उनकी परियोजनाओं की लागत करीब 10 फीसदी बढ़ गई है। उनके मुताबिक पहले उनकी परियोजनाओं पर सर्विस टैक्स नहीं लगता था क्योंकि वित्त विधेयक 1994 में ही ऐसी व्यवस्था कर दी गई थी कि रेल, सड़क और हवाई अड्डे की परियेेजनाओं पर सर्विस टैक्स नहीं लगे। लेकिन जीएसटी में ऐसी व्यवस्था नहीं है। इसलिए अब जीएसटी चुकाना पड़ता है। इसके साथ ही रेलवे को इनपुट टैक्स क्रेडिट का भी लाभ नहीं मिल पाता है, इसलिए परियोजना लागत बढ़ गई है।
छोटे काम पर तो 20 फीसदी का असर
एनएचएआई के एक इंजीनियर का कहना है कि मरम्मत या छोटे-मोटे काम पर तो जीएसटी की वजह से करीब 20 फीसदी लागत बढ़ गई है। ऐसा इसलिए कि इसके लिए छोटे-छोटे ठेकेदारों को काम देते हैं और अक्सर वे इनपुट टैक्स का लाभ नहीं लेते। इसलिए सारी बिलिंग उन्हीं के नाम होती है और कर चुकाना पड़ता है।