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एआई का खतरा, गहराएगा संकट: इस साल टेक कंपनियों में अबतक 80 हजार+ छंटनी; 2030 तक जा सकती हैं 1.8 करोड़ नौकरियां

Thu, 31 Jul 2025 06:59 AM IST
कालीचरण Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 31 Jul 2025 06:59 AM IST
सार

दुनियाभर में छंटनी पर नजर रखने वाली कंपनी लेऑफ्स डॉट एफवाईआई के आंकड़ों के मुताबिक, इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा समेत 171 कंपनियां वैश्विक स्तर इस साल अब तक कुल 80,250 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल चुकी हैं। इंटेल तीन महीने में 27,000 छंटनी के साथ सबसे आगे है।

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Threat of AI Job crisis likely to deepen in IT Sector 80 thousand plus layoffs in tech companies this year
छंटनी (सांकेतिक) - फोटो : adobe stock

विस्तार

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की 12,000 से अधिक कर्मचारियों को निकाले जाने की घोषणा इस बात की चेतावनी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में आईटी क्षेत्र में नौकरियां सुरक्षित नहीं हैं। दुनियाभर की टेक कंपनियों में छंटनी की रफ्तार यह बताती है कि यह संकट आगे और बढ़ेगा। हालांकि, छंटनी के दौर में इन्फोसिस ने इस साल 20,000 फ्रेशर्स को नौकरी देने की घोषणा की है।

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दुनियाभर में छंटनी पर नजर रखने वाली कंपनी लेऑफ्स डॉट एफवाईआई के आंकड़ों के मुताबिक, इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा समेत 171 कंपनियां वैश्विक स्तर इस साल अब तक कुल 80,250 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल चुकी हैं। इंटेल तीन महीने में 27,000 छंटनी के साथ सबसे आगे है। कंपनी इस साल अप्रैल में 22,000 और जुलाई में 5,000 कर्मचारियों को निकाल चुकी है। 
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माइक्रोसॉफ्ट 15,000 छंटनी के साथ इस मामले में दूसरे स्थान पर है। कंपनी ने इस साल मई में पहली बार 6,000 और फिर जुलाई में 9,000 कर्मचारियों को निकालने की घोषणा की थी। मेटा भी 2025 में अब तक करीब 3,600 लोगों को बाहर का रास्ता दिखा चुकी है। 
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कंपनियों की नई नीतियां भी बढ़ा रहीं संकट
जानकारों का कहना है कि आईटी क्षेत्र में नौकरियों पर मंडरा रहे संकट के लिए सिर्फ एआई ही नहीं, बल्कि कंपनियों के अपनी-अपनी नीतियों, लागत में कटौती और पुनर्गठन का आधार भी जिम्मेदार है। 27,000 कर्मचारियों को निकालने वाली इंटेल ने कहा, आसान परिचालन और लागत घटाने के लिए पुनर्गठन के प्रयासों के तहत यह कदम उठाया है। माइक्रोसॉफ्ट ने कर्मचारियों और शीर्ष अधिकारियों के बीच कुछ लेयर कम करने के लिए प्रबंधक स्तर पर छंटनी की है। मेटा ने कर्मचारियों को निकालने के लिए खराब प्रदर्शन को आधार बनाया है।  

  • टीसीएस में छंटनी पर जानकारों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच आईटी सेवाओं की मांग घटने के कारण कंपनी यह कदम उठा रही है। इसके अलावा, कंपनी में ऐसे कर्मचारियों की संख्या भी ज्यादा है, जो बेंच पर हैं यानी जिनके पास कोई प्रोजेक्ट या काम नहीं है।
  • ऐसे कर्मचारियों को निकालने के लिए कंपनी ने नई नीति बनाई है। इसके तहत, उन्हीं कर्मचारियों को रखा जाएगा, जिनकी बिलिंग साल में कम-से-कम 225 दिन हो और वे 35 दिन से अधिक समय तक बेंच पर न हों।

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एआई से 2030 तक 1.8 करोड़ नौकरियां जाएंगी
एजेंटिक एआई का चलन बढ़ने से 2030 तक यानी अगले पांच वर्षों में विनिर्माण, खुदरा और शिक्षा क्षेत्रों में करीब 1.8 करोड़ नौकरियां जा सकती हैं। सर्विसनाउ की रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक एआई से उपजे व्यापक व्यवधान का सर्वाधिक प्रभाव विनिर्माण क्षेत्र पर पड़ेगा, जहां 80 लाख नौकरियां प्रभावित होंगी। खुदरा क्षेत्र में 76 लाख और शिक्षा क्षेत्र में 25 लाख से ज्यादा नौकरियों पर असर पड़ेगा। सर्विसनाउ इंडिया टेक्नोलॉजी एंड बिजनेस सेंटर के प्रबंध निदेशक सुमीत माथुर ने कहा, एजेंटिक एआई 2030 तक नई तकनीकी वाली 30 लाख से ज्यादा नौकरियों का भी सृजन करेगा।

इनमें भी छंटनी

कंपनी का नाम संख्या
नॉर्थ वोल्ट 2,800
हेवलेट पैकर्ड 2,500
एचपी 2,000
वर्कडे 1,750
ओपन टेक्स्ट 1,600
ऑटो डेस्क 1,350
इनडीड 1,300
(आंकड़े : 6 जनवरी से 28 जुलाई तक के)

इन्फोसिस : फ्रेशर्स को नौकरियां देने पर जोर
इन्फोसिस इस साल 20,000 ग्रेजुएट की भर्ती की योजना बना रही है। कंपनी पहली तिमाही में भी 17,000 से अधिक भर्तियां कर चुकी है। इन्फोसिस के सीईओ सलिल पारेख ने कहा, कंपनी एआई और कौशल में रणनीतिक निवेश कर आगे रहने में सक्षम रही है। अब तक 2.75 लाख कर्मचारियों को एआई व डिजिटल कौशल की ट्रेनिंग दी गई है।

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